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JEE Advanced 2021: प्रथम 318 अंकों के साथ पंजाब में 'प्रथम', चंडीगढ़ के चैतन्य को 324 अंकों के साथ ऑल इंडिया में 8वां स्थान
Fri, 15 Oct 2021 10:25 PM IST
भूपेंद्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, पटियाला
अमर उजाला ब्यूरो, पटियाला
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Fri, 15 Oct 2021 10:25 PM IST
सार
जॉइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन एडवांस के शुक्रवार को परिणाम घोषित किए गए। इसमें पंजाब से प्रथम ने ऑल इंडिया में 20वीं रैंक प्राप्त की। वहीं चंडीगढ़ के चैतन्य अग्रवाल ने देश में आठवां स्थान प्राप्त किया।
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प्रथम गर्ग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
शुक्रवार को ज्वाइंट एट्रेंस एग्जामिनेशन (जेईई) एडवांस के घोषित परिणामों में पटियाला के प्रथम गर्ग ने ऑल इंडिया रैंक-20 प्राप्त किया। प्रथम ने 360 में 318 अंक अर्जित कर पंजाब में टॉप किया। प्रथम वर्तमान में प्रथम चंडीगढ़ स्थित श्री चैतन्य इंस्टीट्यूट से कोचिंग ले रहे हैं। इस वर्ष लगभग ढाई लाख छात्रों ने परीक्षा दी थी। इस बीच श्री चैतन्य इंस्टीट्यूट के दो अन्य छात्रों ने टॉप 30 में रहकर बाजी मारी है।
यह भी पढ़ें: वायरल वीडियो में दिखा वहशीपन: पहले काटा लखबीर का हाथ, फिर उल्टा लटकाए रखा, गुरुओं का नाम लेकर तड़पता रहा
जेईई एडवांस्ड में चैतन्य बने ट्राइसिटी टॉपर
जेईई एडवांस्ड के नतीजे शुक्रवार को घोषित कर दिए गए। ट्राइसिटी के तीन विद्यार्थियों ने टॉप 30 में जगह बनाई है। 360 में से 324 अंक हासिल कर सेक्टर-44 स्थित श्री गुरु हरकिशन सेकेंडरी स्कूल के विद्यार्थी चैतन्य ने ऑल इंडिया आठवीं रैंक हासिल की है। साथ ही चैतन्य ट्राइसिटी टॉपर बने हैं। वहीं, मोहाली के गुरअमृत ने ऑल इंडिया 26वीं रैंक हासिल कर ट्राइसिटी में दूसरा स्थान हासिल किया है। गुरअमृत ने जेईई मेन में 300 में से 300 अंक हासिल कर प्रथम स्थान हासिल किया था। इनके अलावा भवन विद्यालय पंचकूला के विद्यार्थी खुशांग सिंगला ऑल इंडिया 30वीं रैंक हासिल कर ट्राइसिटी में तीसरे स्थान पर रहे हैं। शानदार नतीजों से इन सभी विद्यार्थियों के परिवार में शुक्रवार को जश्न का माहौल रहा।
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टॉपर्स ने बताया कि व्हाट्सएप और टेलीग्राम से लॉकडाउन के दौरान नोट्स साझा करने, शिक्षकों से प्रश्नों के जवाब पूछने आदि में काफी सहयोग मिला। लॉकडाउन का फायदा यह हुआ कि कोचिंग और स्कूल में आने-जाने में लगने वाले समय की बचत हुई। इस समय को उन्होंने पढ़ाई और टेस्ट पेपर हल करने में लगाया। घर में ही रहना होता था तो तनाव और थकावट भी कम हुई। महामारी के समय में सारी पढ़ाई लैपटॉप और मोबाइल डिवाइस पर ही निर्भर हो गई थी। ऐसे में सोशल मीडिया भी विद्यार्थियों को पढ़ाई करवाने का एक जरिया बना।
निरंतर अभ्यास ही सफलता की कुंजी : चैतन्य
चैतन्य अग्रवाल ने जेईई मेन में ऑल इंडिया 62वीं रैंक पाई थी। उन्होंने बताया कि सफलता का एक ही मंत्र है, निरंतर प्रयास करना। कहा कि छोटे-छोटे लक्ष्य बनाओ और उसी में सफल होने का प्रयास करो। सफलता मिलने पर आगे की योजना बनाओ। पढ़ाई के घंटे मायने नहीं रखते, कम समय में भी कितना ध्यानपूर्वक और मन लगाकर पढ़ा, यह महत्वपूर्ण है। बताया कि लॉकडाउन के दौरान नियमित रूप से अभ्यास पेपर हल किए, जिससे परीक्षा में काफी मदद मिली। चैतन्य के पिता संजीव गुप्ता व्यवसायी और माता निशा सिंगला पीजीआई में नर्सिंग अफसर हैं। दोनों ने बताया कि बेटे की मेहनत रंग लाई। बेटे की सफलता से पूरा परिवार उत्साहित है।
तनाव दूर रहने के लिए क्रिकेट और फुटबाल खेला : गुरअमृत
मोहाली निवासी गुरअमृत के पिता गुरदर्शन सिंह व्यवसायी हैं और मां प्रीति गृहिणी। गुरअमृत सिंह आईआईटी बाम्बे से कंप्यूटर इंजीनियरिंग में बीटेक करना चाहते हैं। गुरअमृत भवन विद्यालय चंडीगढ़ के विद्यार्थी रहे हैं। उन्होंने बताया कि पढ़ाई के साथ तनाव को दूर रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए वह क्रिकेट और फुटबाल खेलते हैं। जेईई की तैयारी के लिए रोजाना छह से सात घंटे पढ़ने के साथ वह टेस्ट सीरिज हल करते थे। कहा कि मुझे लगता है कि सुकून से छह घंटे पढ़ाई बहुत होती है। पूरा दिन पढ़ने के लिए बैठने पर सिर्फ तनाव ही होगा तैयारी नहीं।
तनाव छोड़कर लक्ष्य पर करें ध्यान केंद्रित : खुशांग
भवन विद्यालय पंचकूला के विद्यार्थी खुशांग सिंगला मूलरूप से लुधियाना के रहने वाले हैं, लेकिन ग्यारहवीं और बारहवीं की पढ़ाई पंचकूला से की है। खुशांग ने जेईई एडवांस्ड में 360 में से 307 अंक हासिल किए हैं। पिता रविंदर कुमार सिंगला सरकारी स्कूल में लेक्चरर हैं जबकि मां एसबीआई में कार्यरत हैं। खुशांग भी आईआईटी बाम्बे से कंप्यूटर इंजीनियरिंग में बीटेक करना चाहते हैं। खुशांग ने बताया कि आईआईटी से पढ़ाई करना उनका सपना था, इसलिए उन्होंने इस पर पूरा ध्यान केंद्रित किया। सफल होने का एक ही मूल मंत्र है कि तनाव को छोड़ो और अपने लक्ष्य पर फोकस करो। कहा कि तनाव से बचने के लिए वह संगीत सुनने के साथ बैडमिंटन खेलते थे। प्रतियोगी परीक्षाओं के उम्मीदवारों को किसी भी खेल को हमेशा तैयारी का हिस्सा बनाना चाहिए। क्योंकि इससे मानसिक तनाव के साथ शारीरिक रूप से भी आप स्वस्थ रहेंगे।
पंजाब और हरियाणा के चार विद्यार्थियों ने टॉप 100 में बनाई जगह
चंडीगढ़ में रहकर पढ़ाई करने वाले पंजाब और हरियाणा के चार विद्यार्थियों ने जेईई एडवांस्ड में टॉप 100 में जगह बनाई है। इनमें पटियाला के प्रथम ने ऑल इंडिया 20वीं रैंक, कुरुक्षेत्र के रूद्रांश ने ऑल इंडिया 32वीं, बठिंडा के पुलकित गोयल ने ऑल इंडिया 42वीं रैंक और फिरोजपुर के दानिश ने ऑल इंडिया 97वीं हासिल की है।
बहन से ली इंजीनियरिंग की प्रेरणा : पुलकित
बठिंडा निवासी पुलकित के पिता विजय कुमार व्यवसायी और मां नीलम गृहिणी हैं। पुलकित की बहन इंजीनियरिंग के पेशे में हैं, उन्हीं को देखकर पुलकित को इंजीनियर बनने की प्रेरणा मिली। वह भी आईआईटी बाम्बे से कंप्यूटर इंजीनियरिंग में बीटेक करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि तैयारी के समय वह रोजाना सात घंटे पढ़ते थे। साथ ही तनाव दूर करने के लिए उपन्यास पढ़ने के साथ परिवार के साथ समय व्यतीत करते थे।
तनाव दूर करने के लिए खेला क्रिकेट : दानिश
फिरोजपुर निवासी दानिश के पिता संजीव कॉलेज में जूनियर टेक्नीशियन जबकि मां ज्योति सरकारी स्कूल में शिक्षिका हैं। दानिश ने बताया कि उन्होंने रोजाना छह घंटे की पढ़ाई की। साथ ही तनाव दूर करने के लिए गली के बच्चों के साथ क्रिकेट खेला। वह राज्य स्तर पर टेबल टेनिस खिलाड़ी भी रहे हैं। आईआईटी बाम्बे से कंप्यूटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई करना चाहते हैं।
ध्यान और खेल से रहा तनावमुक्त : रुद्रांश
कुरुक्षेत्र निवासी रुद्रांश के पिता राजेश कुमार एनआईटी कुरुक्षेत्र में प्रोफेसर और मां रसिका गृहिणी हैं। रुद्रांश ने बताया कि माता-पिता ने पढ़ाई में काफी मदद की। इसके साथ ही तनाव दूर करने के लिए ध्यान करते थे। उन्होंने बताया कि बैडमिंटन और टेबल टेनिस राज्य स्तर तक खेलता रहा हूं। जेईई की तैयारी के लिए नियमित रूप से छह से सात घंटे पढ़ाई करता था। भविष्य में यूपीएससी की तैयारी करना चाहता हूं। इसलिए दाखिले को लेकर अभी कुछ फैसला नहीं किया है।
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यह भी पढ़ें: वायरल वीडियो में दिखा वहशीपन: पहले काटा लखबीर का हाथ, फिर उल्टा लटकाए रखा, गुरुओं का नाम लेकर तड़पता रहा
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जेईई एडवांस्ड में चैतन्य बने ट्राइसिटी टॉपर
जेईई एडवांस्ड के नतीजे शुक्रवार को घोषित कर दिए गए। ट्राइसिटी के तीन विद्यार्थियों ने टॉप 30 में जगह बनाई है। 360 में से 324 अंक हासिल कर सेक्टर-44 स्थित श्री गुरु हरकिशन सेकेंडरी स्कूल के विद्यार्थी चैतन्य ने ऑल इंडिया आठवीं रैंक हासिल की है। साथ ही चैतन्य ट्राइसिटी टॉपर बने हैं। वहीं, मोहाली के गुरअमृत ने ऑल इंडिया 26वीं रैंक हासिल कर ट्राइसिटी में दूसरा स्थान हासिल किया है। गुरअमृत ने जेईई मेन में 300 में से 300 अंक हासिल कर प्रथम स्थान हासिल किया था। इनके अलावा भवन विद्यालय पंचकूला के विद्यार्थी खुशांग सिंगला ऑल इंडिया 30वीं रैंक हासिल कर ट्राइसिटी में तीसरे स्थान पर रहे हैं। शानदार नतीजों से इन सभी विद्यार्थियों के परिवार में शुक्रवार को जश्न का माहौल रहा।
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टॉपर्स ने बताया कि व्हाट्सएप और टेलीग्राम से लॉकडाउन के दौरान नोट्स साझा करने, शिक्षकों से प्रश्नों के जवाब पूछने आदि में काफी सहयोग मिला। लॉकडाउन का फायदा यह हुआ कि कोचिंग और स्कूल में आने-जाने में लगने वाले समय की बचत हुई। इस समय को उन्होंने पढ़ाई और टेस्ट पेपर हल करने में लगाया। घर में ही रहना होता था तो तनाव और थकावट भी कम हुई। महामारी के समय में सारी पढ़ाई लैपटॉप और मोबाइल डिवाइस पर ही निर्भर हो गई थी। ऐसे में सोशल मीडिया भी विद्यार्थियों को पढ़ाई करवाने का एक जरिया बना।
निरंतर अभ्यास ही सफलता की कुंजी : चैतन्य
चैतन्य अग्रवाल ने जेईई मेन में ऑल इंडिया 62वीं रैंक पाई थी। उन्होंने बताया कि सफलता का एक ही मंत्र है, निरंतर प्रयास करना। कहा कि छोटे-छोटे लक्ष्य बनाओ और उसी में सफल होने का प्रयास करो। सफलता मिलने पर आगे की योजना बनाओ। पढ़ाई के घंटे मायने नहीं रखते, कम समय में भी कितना ध्यानपूर्वक और मन लगाकर पढ़ा, यह महत्वपूर्ण है। बताया कि लॉकडाउन के दौरान नियमित रूप से अभ्यास पेपर हल किए, जिससे परीक्षा में काफी मदद मिली। चैतन्य के पिता संजीव गुप्ता व्यवसायी और माता निशा सिंगला पीजीआई में नर्सिंग अफसर हैं। दोनों ने बताया कि बेटे की मेहनत रंग लाई। बेटे की सफलता से पूरा परिवार उत्साहित है।
तनाव दूर रहने के लिए क्रिकेट और फुटबाल खेला : गुरअमृत
मोहाली निवासी गुरअमृत के पिता गुरदर्शन सिंह व्यवसायी हैं और मां प्रीति गृहिणी। गुरअमृत सिंह आईआईटी बाम्बे से कंप्यूटर इंजीनियरिंग में बीटेक करना चाहते हैं। गुरअमृत भवन विद्यालय चंडीगढ़ के विद्यार्थी रहे हैं। उन्होंने बताया कि पढ़ाई के साथ तनाव को दूर रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए वह क्रिकेट और फुटबाल खेलते हैं। जेईई की तैयारी के लिए रोजाना छह से सात घंटे पढ़ने के साथ वह टेस्ट सीरिज हल करते थे। कहा कि मुझे लगता है कि सुकून से छह घंटे पढ़ाई बहुत होती है। पूरा दिन पढ़ने के लिए बैठने पर सिर्फ तनाव ही होगा तैयारी नहीं।
तनाव छोड़कर लक्ष्य पर करें ध्यान केंद्रित : खुशांग
भवन विद्यालय पंचकूला के विद्यार्थी खुशांग सिंगला मूलरूप से लुधियाना के रहने वाले हैं, लेकिन ग्यारहवीं और बारहवीं की पढ़ाई पंचकूला से की है। खुशांग ने जेईई एडवांस्ड में 360 में से 307 अंक हासिल किए हैं। पिता रविंदर कुमार सिंगला सरकारी स्कूल में लेक्चरर हैं जबकि मां एसबीआई में कार्यरत हैं। खुशांग भी आईआईटी बाम्बे से कंप्यूटर इंजीनियरिंग में बीटेक करना चाहते हैं। खुशांग ने बताया कि आईआईटी से पढ़ाई करना उनका सपना था, इसलिए उन्होंने इस पर पूरा ध्यान केंद्रित किया। सफल होने का एक ही मूल मंत्र है कि तनाव को छोड़ो और अपने लक्ष्य पर फोकस करो। कहा कि तनाव से बचने के लिए वह संगीत सुनने के साथ बैडमिंटन खेलते थे। प्रतियोगी परीक्षाओं के उम्मीदवारों को किसी भी खेल को हमेशा तैयारी का हिस्सा बनाना चाहिए। क्योंकि इससे मानसिक तनाव के साथ शारीरिक रूप से भी आप स्वस्थ रहेंगे।
पंजाब और हरियाणा के चार विद्यार्थियों ने टॉप 100 में बनाई जगह
चंडीगढ़ में रहकर पढ़ाई करने वाले पंजाब और हरियाणा के चार विद्यार्थियों ने जेईई एडवांस्ड में टॉप 100 में जगह बनाई है। इनमें पटियाला के प्रथम ने ऑल इंडिया 20वीं रैंक, कुरुक्षेत्र के रूद्रांश ने ऑल इंडिया 32वीं, बठिंडा के पुलकित गोयल ने ऑल इंडिया 42वीं रैंक और फिरोजपुर के दानिश ने ऑल इंडिया 97वीं हासिल की है।
बहन से ली इंजीनियरिंग की प्रेरणा : पुलकित
बठिंडा निवासी पुलकित के पिता विजय कुमार व्यवसायी और मां नीलम गृहिणी हैं। पुलकित की बहन इंजीनियरिंग के पेशे में हैं, उन्हीं को देखकर पुलकित को इंजीनियर बनने की प्रेरणा मिली। वह भी आईआईटी बाम्बे से कंप्यूटर इंजीनियरिंग में बीटेक करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि तैयारी के समय वह रोजाना सात घंटे पढ़ते थे। साथ ही तनाव दूर करने के लिए उपन्यास पढ़ने के साथ परिवार के साथ समय व्यतीत करते थे।
तनाव दूर करने के लिए खेला क्रिकेट : दानिश
फिरोजपुर निवासी दानिश के पिता संजीव कॉलेज में जूनियर टेक्नीशियन जबकि मां ज्योति सरकारी स्कूल में शिक्षिका हैं। दानिश ने बताया कि उन्होंने रोजाना छह घंटे की पढ़ाई की। साथ ही तनाव दूर करने के लिए गली के बच्चों के साथ क्रिकेट खेला। वह राज्य स्तर पर टेबल टेनिस खिलाड़ी भी रहे हैं। आईआईटी बाम्बे से कंप्यूटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई करना चाहते हैं।
ध्यान और खेल से रहा तनावमुक्त : रुद्रांश
कुरुक्षेत्र निवासी रुद्रांश के पिता राजेश कुमार एनआईटी कुरुक्षेत्र में प्रोफेसर और मां रसिका गृहिणी हैं। रुद्रांश ने बताया कि माता-पिता ने पढ़ाई में काफी मदद की। इसके साथ ही तनाव दूर करने के लिए ध्यान करते थे। उन्होंने बताया कि बैडमिंटन और टेबल टेनिस राज्य स्तर तक खेलता रहा हूं। जेईई की तैयारी के लिए नियमित रूप से छह से सात घंटे पढ़ाई करता था। भविष्य में यूपीएससी की तैयारी करना चाहता हूं। इसलिए दाखिले को लेकर अभी कुछ फैसला नहीं किया है।