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अपने यूनिट बंद, प्राइवेट प्लांटों से ले रहे हैं बिजली
ब्यूरो, अमर उजाला, पटियाला
Updated Sat, 30 Apr 2016 03:28 PM IST
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बिजली परियोजना
- फोटो : अमर उजाला
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गर्मी के इस मौसम में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए पावरकॉम ने अपने थर्मल प्लांटों के ज्यादातर यूनिट बंद कर दिए हैं, लेकिन वहीं दूसरी तरफ प्राइवेट प्लांटों के सभी यूनिट चालू करके बिजली ली जा रही है। इसके पीछे पावरकॉम अधिकारी यह तर्क दे रहे हैं कि इन प्राइवेट प्लांटों के साथ समझौते ऐसे हैं कि पहल के आधार पर पावरकॉम को इन्हीं से बिजली लेनी पड़ती है। हालांकि पावरकॉम को अपने यूनिटों से भी बिजली सस्ती उपलब्ध हो सकती है।
पंजाब में मौसम के तेवर लगातार तीखे होते जा रहे हैं। हालांकि अभी मांग पीक पर नहीं है। बिजली की इस मांग को भी पूरा करने के लिए पावरकॉम प्राइवेट प्लांटों का सहारा ले रहा है, जबकि पावरकॉम ने अपने प्लांटों के कुल 14 यूनिटों में से 10 बंद कर रखे हैं। इनमें से गुरु नानक देव थर्मल प्लांट बठिंडा का 110 मेगावाट का एक यूनिट, गुरु गोबिंद सिंह सुपर थर्मल प्लांट रोपड़ का भी 210 मेगावाट का एक यूनिट और गुरु हर गोबिंद थर्मल प्लांट लहरां मोहब्बत के 210 मेगावाट का एक यूनिट व 250 मेगावाट का एक अन्य यूनिट चल रहा है। बठिंडा के तीन, रोपड़ के पांच और लहरां मोहब्बत के दो यूनिट बंद पड़े हैं। वहीं दूसरी तरफ प्राइवेट थर्मल प्लांट राजपुरा का एक यूनिट और तलवंडी साबो थर्मल प्लांट के दोनों यूनिट इस समय चल रहे हैं। इनसे पावरकॉम को रोजाना 340 लाख यूनिट बिजली मिल रही है।
पावरकॉम के अधिकारियों ने नाम न उजागर करने पर बताया कि इन प्राइवेट थर्मल प्लांटों को लगाने वाली कंपनियों के साथ सरकार ने इस तरह से समझौते किए हैं कि पावरकॉम को पहल के आधार पर इनसे बिजली खरीदनी पड़ती है। हालांकि राजपुरा प्लांट में बिजली का उत्पादन रेट बाकी प्लांटों की तुलना में सस्ता है, लेकिन तलवंडी साबो में बिजली की प्रोडक्शन कास्ट पावरकॉम के अपने लहरां मोहब्बत थर्मल प्लांट से ज्यादा है। ऐसे में सवाल पैदा होता है कि पावरकॉम लहरां मोहब्बत के दो यूनिट बंद करके तलवंडी साबो के सभी यूनिट चला कर यहां से बिजली क्यों ले रहा है। पावरकॉम के पीआरओ सुरजीत सिंह भट्टी ने कहा कि अभी पंजाब में बिजली की मांग ज्यादा नहीं बढ़ी है। इसलिए पावरकॉम ने अपने यूनिट बंद कर रखे हैं। मांग बढ़ने पर चला दिए जाएंगे।
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पंजाब में मौसम के तेवर लगातार तीखे होते जा रहे हैं। हालांकि अभी मांग पीक पर नहीं है। बिजली की इस मांग को भी पूरा करने के लिए पावरकॉम प्राइवेट प्लांटों का सहारा ले रहा है, जबकि पावरकॉम ने अपने प्लांटों के कुल 14 यूनिटों में से 10 बंद कर रखे हैं। इनमें से गुरु नानक देव थर्मल प्लांट बठिंडा का 110 मेगावाट का एक यूनिट, गुरु गोबिंद सिंह सुपर थर्मल प्लांट रोपड़ का भी 210 मेगावाट का एक यूनिट और गुरु हर गोबिंद थर्मल प्लांट लहरां मोहब्बत के 210 मेगावाट का एक यूनिट व 250 मेगावाट का एक अन्य यूनिट चल रहा है। बठिंडा के तीन, रोपड़ के पांच और लहरां मोहब्बत के दो यूनिट बंद पड़े हैं। वहीं दूसरी तरफ प्राइवेट थर्मल प्लांट राजपुरा का एक यूनिट और तलवंडी साबो थर्मल प्लांट के दोनों यूनिट इस समय चल रहे हैं। इनसे पावरकॉम को रोजाना 340 लाख यूनिट बिजली मिल रही है।
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पावरकॉम के अधिकारियों ने नाम न उजागर करने पर बताया कि इन प्राइवेट थर्मल प्लांटों को लगाने वाली कंपनियों के साथ सरकार ने इस तरह से समझौते किए हैं कि पावरकॉम को पहल के आधार पर इनसे बिजली खरीदनी पड़ती है। हालांकि राजपुरा प्लांट में बिजली का उत्पादन रेट बाकी प्लांटों की तुलना में सस्ता है, लेकिन तलवंडी साबो में बिजली की प्रोडक्शन कास्ट पावरकॉम के अपने लहरां मोहब्बत थर्मल प्लांट से ज्यादा है। ऐसे में सवाल पैदा होता है कि पावरकॉम लहरां मोहब्बत के दो यूनिट बंद करके तलवंडी साबो के सभी यूनिट चला कर यहां से बिजली क्यों ले रहा है। पावरकॉम के पीआरओ सुरजीत सिंह भट्टी ने कहा कि अभी पंजाब में बिजली की मांग ज्यादा नहीं बढ़ी है। इसलिए पावरकॉम ने अपने यूनिट बंद कर रखे हैं। मांग बढ़ने पर चला दिए जाएंगे।
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