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सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे बिजली पेंशनर
ब्यूरो, अमर उजाला, पटियाला
Updated Tue, 29 Mar 2016 10:06 PM IST
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पटियाला में मंगलवार को पावरकॉम हेडआफिस के सामने रोड जाम करके धरना देते पेंशनर्स।
- फोटो : amarujala
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मांगों को लेकर मैनेजमेंट व सरकार के अड़ियल रवैये से गुस्साए पावरकॉम और ट्रांसको के पेंशनरों ने मंगलवार को पावरकॉम हेडआफिस के सामने मॉल रोड जाम करके धरना दिया। पंजाब के कोने-कोने से जुटे पेंशनरों ने इस मौके पर जमकर नारेबाजी की। इस दौरान मैनेजमेंट व सरकार से महंगाई भत्ते का बकाया देने, कैशलेस ट्रीटमेंट पूरी तरह से लागू करने के अलावा और भी कई मांगें उठाई गईं जिनके पूरा न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी गई।
पावरकॉम व ट्रांसको की पेंशनर्स एसोसिएशन के प्रधान अविनाश चंद्र शर्मा, प्रदेश महासचिव धनवंत सिंह भट्ठल ने सरकार की ओर से महंगाई भत्ते की किस्तों का बकाया न देने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री की ओर से 10 मार्च को दिया गया बयान पेंशनरों के जख्मों पर नमक छिड़कने के बराबर है। इसमें कहा गया है कि केंद्र द्वारा जारी महंगाई भत्ते की किस्तें राज्य सरकार की ओर से देनी जरूरी नहीं हैं। इस बयान से राज्य भर के पेंशनरों में काफी रोष है।
बिजली रियायत संबंधी कारपोरेशन व सरकार स्तर पर बहुत सारी मीटिंगें हो चुकी हैं, लेकिन यूपी पावर कारपोरेशन, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और दिल्ली के बिजली पेंशनर्स को यह रियायत मिल रही है, लेकिन उनकी इस मांग को नजरअंदाज किया जा रहा है। इस कारण मजबूर होकर पेंशनर्स को संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
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पेंशनरों ने आरोप लगाया कि सरकार का खजाना केवल पेंशनरों के लिए ही खाली रहता है, बाकी सारे काम बिना किसी बाधा के चलते रहते हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब में पावरकॉम पेंशनरों व उनके परिवारों की छह प्रतिशत वोट है। अगर सरकार ने बिजली पेंशनरों की मांगें न मानीं, तो इसका खामियाजा बादल सरकार को 2017 के विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ेगा।
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पावरकॉम व ट्रांसको की पेंशनर्स एसोसिएशन के प्रधान अविनाश चंद्र शर्मा, प्रदेश महासचिव धनवंत सिंह भट्ठल ने सरकार की ओर से महंगाई भत्ते की किस्तों का बकाया न देने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री की ओर से 10 मार्च को दिया गया बयान पेंशनरों के जख्मों पर नमक छिड़कने के बराबर है। इसमें कहा गया है कि केंद्र द्वारा जारी महंगाई भत्ते की किस्तें राज्य सरकार की ओर से देनी जरूरी नहीं हैं। इस बयान से राज्य भर के पेंशनरों में काफी रोष है।
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बिजली रियायत संबंधी कारपोरेशन व सरकार स्तर पर बहुत सारी मीटिंगें हो चुकी हैं, लेकिन यूपी पावर कारपोरेशन, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और दिल्ली के बिजली पेंशनर्स को यह रियायत मिल रही है, लेकिन उनकी इस मांग को नजरअंदाज किया जा रहा है। इस कारण मजबूर होकर पेंशनर्स को संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
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पेंशनरों ने आरोप लगाया कि सरकार का खजाना केवल पेंशनरों के लिए ही खाली रहता है, बाकी सारे काम बिना किसी बाधा के चलते रहते हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब में पावरकॉम पेंशनरों व उनके परिवारों की छह प्रतिशत वोट है। अगर सरकार ने बिजली पेंशनरों की मांगें न मानीं, तो इसका खामियाजा बादल सरकार को 2017 के विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ेगा।