{"_id":"e9d70068876bef3998652e60b2a7c1b4","slug":"musical-programm-in-pu","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘मैं दामन तैंडे लगी हां यार’ की पेशकारी रही लाजवाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘मैं दामन तैंडे लगी हां यार’ की पेशकारी रही लाजवाब
Updated Wed, 13 Nov 2013 11:18 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंजाबी यूनिवर्सिटी के संगीत विभाग की ओर से वाइस चांसलर डा. जसपाल सिंह की सरप्रस्ती में संगीताचार्य प्रोफेसर तारा सिंह को समर्पित पहले दो दिवसीय पटियाला संगीत सम्मेलन के समापन पर कलाकारों ने खूब समां बांधा।
इस मौके पर विभाग की प्रमुख डा. निवेदिता सिंह भी मौजूद रहीं। समापन के मौके पर दिल्ली से प्रोफेसर अनुपम महाजन ने सितार वादन, पंजाबी यूनिवर्सिटी के संगीत विभाग के डा. अलंकार सिंह व विभाग की छात्रा कुमारी ईशा सिंह ने शास्त्रीय गायन पेश किया।
कैंपस के कला भवन में हुए इस संगीत सम्मेलन पूर्व डिवीजनल कमिश्नर एसके आहलूवालिया ने भी शिरकत की। प्रोग्राम का आगाज संगीत विभाग की छात्रा कुमारी ईशा सिंह ने शास्त्रीय गायन के साथ किया। उन्होंने राग मधुवंती में विलंबित खियाल व द्रुत ख्याल का गायन किया।
विज्ञापन
इसके बाद संगीत विभाग के असिस्टेंट प्रोेफेसर डा. अलंकार सिंह ने शास्त्रीय गायन पेश किया। उन्होंने राग पुरीया धनाशरी में विलंबित ख्याल पेश किया। जिसमें उन्होंने बंदिश जतन कछू कीजे और द्रुत ख्याल में बंदिश अंतर कछु नाही की सुरीली पेशकारी की।
प्रोग्राम के अंत में उन्होंने राग जोगकौंस में प्रोफेसर तारा सिंह की पंजाबी बंदिश मैं दामन तैंडे लगी हां यार की पेशकारी की।
इस मौके पर तबले पर संगत पंजाब घराने के तबला वादक जैदेव और हारमोनियम पर संगत प्रसिद्ध पंजाबी साहित्यकार अली अकबर की ओर से की गई।
उनके बाद दिल्ली से प्रसिद्ध सितार वादक प्रोफेसर अनुपम महाजन ने मंच संभाला। इस मौके पर पंजाबी भाषा विकास विभाग की प्रमुख डा. जसबीर कौर, डा. यशपाल शर्मा, डा. नवजोत कौर कसेल, डा. मनमोहन शर्मा मौजूद रहे।
विज्ञापन
इस मौके पर विभाग की प्रमुख डा. निवेदिता सिंह भी मौजूद रहीं। समापन के मौके पर दिल्ली से प्रोफेसर अनुपम महाजन ने सितार वादन, पंजाबी यूनिवर्सिटी के संगीत विभाग के डा. अलंकार सिंह व विभाग की छात्रा कुमारी ईशा सिंह ने शास्त्रीय गायन पेश किया।
विज्ञापन
कैंपस के कला भवन में हुए इस संगीत सम्मेलन पूर्व डिवीजनल कमिश्नर एसके आहलूवालिया ने भी शिरकत की। प्रोग्राम का आगाज संगीत विभाग की छात्रा कुमारी ईशा सिंह ने शास्त्रीय गायन के साथ किया। उन्होंने राग मधुवंती में विलंबित खियाल व द्रुत ख्याल का गायन किया।
विज्ञापन
इसके बाद संगीत विभाग के असिस्टेंट प्रोेफेसर डा. अलंकार सिंह ने शास्त्रीय गायन पेश किया। उन्होंने राग पुरीया धनाशरी में विलंबित ख्याल पेश किया। जिसमें उन्होंने बंदिश जतन कछू कीजे और द्रुत ख्याल में बंदिश अंतर कछु नाही की सुरीली पेशकारी की।
प्रोग्राम के अंत में उन्होंने राग जोगकौंस में प्रोफेसर तारा सिंह की पंजाबी बंदिश मैं दामन तैंडे लगी हां यार की पेशकारी की।
इस मौके पर तबले पर संगत पंजाब घराने के तबला वादक जैदेव और हारमोनियम पर संगत प्रसिद्ध पंजाबी साहित्यकार अली अकबर की ओर से की गई।
उनके बाद दिल्ली से प्रसिद्ध सितार वादक प्रोफेसर अनुपम महाजन ने मंच संभाला। इस मौके पर पंजाबी भाषा विकास विभाग की प्रमुख डा. जसबीर कौर, डा. यशपाल शर्मा, डा. नवजोत कौर कसेल, डा. मनमोहन शर्मा मौजूद रहे।