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जेल मंत्री ने 'सोचां दी उड़ान' का किया विमोचन
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पंजाब के जेल विभाग की ओर से उठाए अनूठे कदम ने कैदियों के विचारों को पंख लगा दिए हैं। कैदियों ने अपने विचारों को कलम की मदद से पटियाला की सेंट्रल जेल की ओर से शुरू किए गए तिमाही रसाले के कैनवस पर उकेरा है। पंजाब के जेल मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने वीरवार शाम पटियाला जेल के दौरे के दौरान ‘सोचां दी उड़ान’ रसाले के पहले अंक को रिलीज करते कहा कि कैदियों की ओर से इस रसाले में व्यक्त किए विचार उनकी अंदरूनी प्रतिभा को दर्शाते हैं। साथ ही कहा कि जेलों में कैदियों को अच्छा साहित्य उपलब्ध कराने की योजना है, ताकि उनके विचारों में कानून पक्षीय सकारात्मक तबदीली लाई जा सके। जेलों में कैदियों को जल्द ही धार्मिक साहित्य मुहैया करवाया जाएगा।
रंधावा ने कहा कि जेल विभाग ने जेल सुधारों के लिए पंजाब उजाला के नाम तहत विशेष प्रयास किया है। जो कैदियों के जीवन में सकारात्मक सुधार व तबदीलियां लाएगा। पटियाला जेल में जारी किया रसाला इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। इसको पंजाब की बाकी जेलों में भी लागू किया जाएगा।
इतना ही नहीं, बल्कि जेलों से रिहा होने के बाद कैदियों के पुनर्वास के लिए उन्हें रोजगारोन्मुखी शिक्षा प्रदान करने का भी प्रयास किया जा रहा है। पटियाला जेल का उदाहरण देते रंधावा ने कहा कि यहां के कैदियों ने बहुत ही सुंदर सजावटी दस्तकारी वस्तुओं समेत कवर, बैग, हैंड बैग, जूट इत्यादि बनाए हैं। इसके अलावा पुरुष कैदियों में हाथों से किए जाने वाले अन्य काम करने का हुनर लाया जा रहा है। वहीं महिला कैदियों को जूट से बना सामान तैयार करना सिखाया जा रहा है, जिससे वह रिहाई के बाद अपने पैरों पर खड़े हो सकें।
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जेल सुपरिंटेंडेंट शिवराज सिंह नंदगढ़ ने कहा कि रसाले में कैदियों की ओर से लिखी आठ कविताएं, तीन लेख और 11 स्कैच हैं।
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रंधावा ने कहा कि जेल विभाग ने जेल सुधारों के लिए पंजाब उजाला के नाम तहत विशेष प्रयास किया है। जो कैदियों के जीवन में सकारात्मक सुधार व तबदीलियां लाएगा। पटियाला जेल में जारी किया रसाला इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। इसको पंजाब की बाकी जेलों में भी लागू किया जाएगा।
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इतना ही नहीं, बल्कि जेलों से रिहा होने के बाद कैदियों के पुनर्वास के लिए उन्हें रोजगारोन्मुखी शिक्षा प्रदान करने का भी प्रयास किया जा रहा है। पटियाला जेल का उदाहरण देते रंधावा ने कहा कि यहां के कैदियों ने बहुत ही सुंदर सजावटी दस्तकारी वस्तुओं समेत कवर, बैग, हैंड बैग, जूट इत्यादि बनाए हैं। इसके अलावा पुरुष कैदियों में हाथों से किए जाने वाले अन्य काम करने का हुनर लाया जा रहा है। वहीं महिला कैदियों को जूट से बना सामान तैयार करना सिखाया जा रहा है, जिससे वह रिहाई के बाद अपने पैरों पर खड़े हो सकें।
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जेल सुपरिंटेंडेंट शिवराज सिंह नंदगढ़ ने कहा कि रसाले में कैदियों की ओर से लिखी आठ कविताएं, तीन लेख और 11 स्कैच हैं।