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‘हिंसा शुरू हुई तो भाग गए थे मालिक’
ब्यूरो/अमर उजाला, पटियाला
Updated Mon, 30 Jun 2014 10:07 PM IST
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नौकरी के सिलसिले में इराक गए पटियाला के दो नौजवान रविवार देर रात करीब दो बजे वापस आ गए। इन नौजवानों ने बताया कि कई महीनों से कंपनी के मालिकों ने उनसे कई घंटे लगातार काम करवाया, लेकिन वेतन नहीं दिया। जब हिंसा शुरू हुई, तो मालिक भाग गए।
कंपनी में काम करने वाले पंजाबी नौजवानों के पास थोड़ा-बहुत ही राशन था। जिसके चलते उन्होंने भूखे-प्यासे रहकर समय काटा। किसी तरह से उन लोगों ने इंटरनेट के जरिये संगरूर के सांसद भगवंत मान को संपर्क किया। जिन्होंने उनके समेत गुरदास के दो और लुधियाना के एक नौजवान की टिकट कराके उन्हें उनके घर तक पहुंचाया।
इराक के करबला शहर की कंस्ट्रक्शन कंपनी में नौकरी करने वाले पटियाला के गांव खतौली के अमरजीत सिंह (30) और हरजिंदर सिंह (26) रविवार देर रात दो बजे शहर लौट आए। अमरजीत सिंह ने बताया कि वह और हरजिंदर दोनों ही इसी साल फरवरी में आठ माह के वीजा पर करबला की कंस्ट्रक्शन कंपनी में नौकरी करने गए थे। वहां उन्हें केवल एक महीने की ही सैलरी मिली। उसके बाद सैलरी नहीं दी गई।
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इसी दौरान जब हिंसा की घटनाएं हुईं, तो कंपनी मालिक उन सभी को बिना वेतन दिए भाग खड़े हुए। पीछे से पंजाबी नौजवानों के पास थोड़ा-बहुत ही राशन था। गैस भी काफी कम थी। इसलिए कुछ दिन अधकच्ची रोटी व चावल और सब्जी खाकर गुजारा किया। राशन खत्म होने पर उनके भूखे मरने की नौबत आ गई थी।
किसी तरह से उन लोगों ने इंटरनेट के जरिये संगरूर के सांसद भगवंत मान को संपर्क किया। जिन्होंने उनके समेत गुरदास के दो और लुधियाना के एक नौजवान की टिकट कराके उन्हें उनके घर तक पहुंचाया। गनीमत यह रही कि उन लोगों के पास अपने पासपोर्ट थे। नम आंखों से हरजिंदर सिंह ने बताया कि उनसे दिन में कई घंटे काम कराया गया, लेकिन वेतन नहीं दिया गया। बिना वेतन के भूखे प्यासे वह अपने देश लौटे हैं। उनसे बड़ा धोखा हुआ है, जिसे वह जिंदगी में कभी भुला नहीं सकेंगे।
पटियाला के 27 नौजवान अभी भी इराक में
जिले के कुल 29 नौजवान इराक में फंसे थे, जिनमें से केवल दो ही लौट पाए हैं। जबकि 27 नौजवान अभी भी इराक में ही फंसे हैं, जिसे लेकर उनके परिजन काफी चिंतित हैं। खतौली के सुरजीत सिंह ने कहा कि उनके लड़के मेहताब सिंह समेत बाकी नौजवानों की जल्द वापसी के लिए सरकार जल्द कदम उठाए। उनके बच्चे वहां भूखे प्यासे दिन काट रहे हैं। नाभा के परगट सिंह ने कहा कि उनका साला मलकीत सिंह इराक में फंसा है। सरकार जल्द सभी की वापसी के लिए ठोस कदम उठाए।
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कंपनी में काम करने वाले पंजाबी नौजवानों के पास थोड़ा-बहुत ही राशन था। जिसके चलते उन्होंने भूखे-प्यासे रहकर समय काटा। किसी तरह से उन लोगों ने इंटरनेट के जरिये संगरूर के सांसद भगवंत मान को संपर्क किया। जिन्होंने उनके समेत गुरदास के दो और लुधियाना के एक नौजवान की टिकट कराके उन्हें उनके घर तक पहुंचाया।
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इराक के करबला शहर की कंस्ट्रक्शन कंपनी में नौकरी करने वाले पटियाला के गांव खतौली के अमरजीत सिंह (30) और हरजिंदर सिंह (26) रविवार देर रात दो बजे शहर लौट आए। अमरजीत सिंह ने बताया कि वह और हरजिंदर दोनों ही इसी साल फरवरी में आठ माह के वीजा पर करबला की कंस्ट्रक्शन कंपनी में नौकरी करने गए थे। वहां उन्हें केवल एक महीने की ही सैलरी मिली। उसके बाद सैलरी नहीं दी गई।
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इसी दौरान जब हिंसा की घटनाएं हुईं, तो कंपनी मालिक उन सभी को बिना वेतन दिए भाग खड़े हुए। पीछे से पंजाबी नौजवानों के पास थोड़ा-बहुत ही राशन था। गैस भी काफी कम थी। इसलिए कुछ दिन अधकच्ची रोटी व चावल और सब्जी खाकर गुजारा किया। राशन खत्म होने पर उनके भूखे मरने की नौबत आ गई थी।
किसी तरह से उन लोगों ने इंटरनेट के जरिये संगरूर के सांसद भगवंत मान को संपर्क किया। जिन्होंने उनके समेत गुरदास के दो और लुधियाना के एक नौजवान की टिकट कराके उन्हें उनके घर तक पहुंचाया। गनीमत यह रही कि उन लोगों के पास अपने पासपोर्ट थे। नम आंखों से हरजिंदर सिंह ने बताया कि उनसे दिन में कई घंटे काम कराया गया, लेकिन वेतन नहीं दिया गया। बिना वेतन के भूखे प्यासे वह अपने देश लौटे हैं। उनसे बड़ा धोखा हुआ है, जिसे वह जिंदगी में कभी भुला नहीं सकेंगे।
पटियाला के 27 नौजवान अभी भी इराक में
जिले के कुल 29 नौजवान इराक में फंसे थे, जिनमें से केवल दो ही लौट पाए हैं। जबकि 27 नौजवान अभी भी इराक में ही फंसे हैं, जिसे लेकर उनके परिजन काफी चिंतित हैं। खतौली के सुरजीत सिंह ने कहा कि उनके लड़के मेहताब सिंह समेत बाकी नौजवानों की जल्द वापसी के लिए सरकार जल्द कदम उठाए। उनके बच्चे वहां भूखे प्यासे दिन काट रहे हैं। नाभा के परगट सिंह ने कहा कि उनका साला मलकीत सिंह इराक में फंसा है। सरकार जल्द सभी की वापसी के लिए ठोस कदम उठाए।