Research: पंजाबियों में स्ट्रोक के खतरे को दोगुना करने वाले जीन्स के विशेष समूह की पहचान, पीयू पटियाला का शोध
स्ट्रोक एक डाॅक्टरी इमरजेंसी है, जिसके नतीजे के तौर पर मौत व दिव्यांग की स्थिति पैदा हो सकती है। विश्व सेहत संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने स्ट्रोक को दुनिया भर में मौत के सबसे प्रमुख कारणों में दूसरे नंबर पर रखा हुआ है।
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पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला में एक शोध के जरिये पंजाबियों के शरीर में पहली बार जीन्स के एक ऐसे समूह की पहचान की गई है, जिसका होना स्ट्रोक के खतरे को दोगुना कर सकता है।
यूनिवर्सिटी के ह्यूमन जेनेटिक्स विभाग से डाॅ. पुनीत पाल सिंह की अगुवाई में शोधकर्ता डाॅ. नितिन कुमार ने शोध के जरिये इस नए हैपलोटाइप (जीन्स के एलील्स रूप का आपसी मेल) के बारे में खुलासा हुआ है, जो पंजाब की आबादी में स्ट्रोक की एक विशेष किस्म इसकैमिक स्ट्रोक के खतरे के लिए काफी जोखिम पैदा करता है।
गौरतलब है कि यह शोध उच्च प्रभाव वाले जरनल इंटरनेशनल जरनल ऑफ इम्युनोजेनेटिक्स में प्रकाशित हुई है। डाॅ. पुनीत पाल सिंह ने इस बारे में बताया कि स्ट्रोक एक डाॅक्टरी इमरजेंसी है, जिसके नतीजे के तौर पर मौत व दिव्यांग की स्थिति पैदा हो सकती है। विश्व सेहत संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने स्ट्रोक को दुनिया भर में मौत के सबसे प्रमुख कारणों में दूसरे नंबर पर रखा हुआ है। उन्होंने बताया कि भारत में यह मौत के कारणों में चौथे स्थान पर है।
उन्होंने बताया कि स्ट्रोक के लिए मुख्य तौर पर माने जाते जोखिम कारकों में हाइपरटेंशन, हाइपरलिपीडिमिया, स्मोकिंग और हवा प्रदूषण के अलावा इंसानी शरीर में कुछ जीन्स भी इस के साथ जुड़े खतरे का कारण बनते हैं। उन्होंने बताया कि शोध के दौरान यह सामने आया है कि इंसानी जीनोम में एनएलआरपी 3, एएससी और केसपेज-1 का आपसी विशेष गठजोड़ दिमाग को खून सप्लाई करने वाली नाड़ियों की दीवारों के अंदर सोजिश बढ़ाता है। इसका होना एनएलआरपी 3 इन्फ्लामेसोम नामक समस्या के क्रियाशील होने का कारण बनता है।
जीन्स के विशेष समूह से स्ट्रोक होने का खतरा दोगुना
शोधकर्ता डाॅ. नितिन कुमार ने बताया कि यह अध्ययन यह दर्शाने में समर्थ रहा है कि जिन लोगों में इन जीन्स का एक विशेष किस्म का समूह (सेट) बनता है, उनको स्ट्रोक होने का खतरा दोगुना होता है। यह खतरा उन लोगों के लिए और भी बढ़ जाता है, जिनके बायोकेमिकल मापदंडों के स्तर ऊंचे होते हैं। अध्ययन के दौरान इस क्षेत्र के कुछ और भी अहम खुलासे हुए हैं, जिनको मेडिकल क्षेत्र में काफी सराहना हासिल हुई है। यूनिवर्सिटी के डीन अकादमिक मामले प्रोफेसर नरिंदर कौर मुल्तानी ने शोधकर्ता व उनके निगरान को इस स्तरीय शोध के लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि ऐसी शोध यूनिवर्सिटी के स्तर को और ऊंचा करती है।