{"_id":"a965b6f217896a1e5716eb82146cd873","slug":"health-minister-s-hometown-fake-medical-camp-busted-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सेहत मंत्री के गृहनगर में फर्जी मेडिकल कैंप का भंडाफोड़ ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सेहत मंत्री के गृहनगर में फर्जी मेडिकल कैंप का भंडाफोड़
ब्यूरो/अमर उजाला, फिरोजपुर
Updated Sun, 07 Jun 2015 10:03 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्वास्थ्य मंत्री चौ. सुरजीत कुमार ज्याणी के गृहनगर फाजिल्का में लोगों की स्वास्थ्य जांच के नाम पर हजारों रुपये ठगने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। इस फर्जी कैंप की सूचना मिलते ही जिला स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर पहुंच कर कैंप में प्रयुक्त की जाने वाली मशीनें और दवाएं आदि कब्जे में ले ली।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर करीब छह लोगों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ शुरू कर दी है। रविवार को फाजिल्का के गांव बहक खास में कुछ लोगों ने स्वास्थ्य जांच कैंप की मुनादी करवाई जिसे सुनकर ग्रामीण कैंप में आने लगे।
कैंप के आयोजक एक मशीन पर मरीज का अंगूठा लगवाकर उनसे उसमें विभिन्न प्रकार की बीमारियां होने की बात कहते थे। इनके इलाज के लिए सैकड़ों रुपये की दवाएं भी खुद ही देते थे।
विज्ञापन
स्वास्थ्य विभाग की बिना मंजूरी के लगाए गए इस कैंप में बिना कंप्यूटर द्वारा पीजीआई जैसे अस्पतालों की तर्ज पर जांच रिपोर्ट भी दी जा रही थी, लेकिन उस रिपोर्ट पर किसी भी डाक्टर या मेडिकल संस्थान का नाम नहीं था। लोगों ने इसकी सूचना पुलिस व स्वास्थ्य विभाग को दी।
सूचना मिलते ही सिविल सर्जन डा. वाई के गुप्ता, एसडीएम सुभाष खटक, एसएमओ डा. राजेश शर्मा, स्वास्थ्य मंत्री के निजी सचिव राकेश सहगल, भाजपा मंडल महासचिव सुबोध वर्मा, डा. चंद्र मोहन कटारिया, बीईई दिवेश कुमार आदि मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों की शिकायत पर पुलिस ने सारा सामान कब्जे में ले लिया।
ड्रग इंस्पेक्टर गगनदीप कौर ने ग्रामीणों को बेची जा रही दवाओं के सैंपल भरे। शिकायतकर्ता सुरिंदर कंबोज ने रिपोर्ट पर किसी भी डाक्टर व संस्थान का नाम न होने पर उन्होंने इसकी शिकायत स्वास्थ्य मंत्री सुरजीत ज्याणी को की। सिविल सर्जन वाईके गुप्ता ने बताया कि कैंप की विभाग की तरफ से कोई मंजूरी नहीं ली गई थी।
इसके अलावा अन्य दवाओं के सैंपल भी लिए गए हैं। पुलिस पूछताछ में पता चला है कि कैंप लगाने वाले ये लोग जलालाबाद में कोई थरैपी सेंटर चलाते हैं और किसी मार्केटिंग कंपनी के साथ मिलकर कैंप आयोजित करते हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
विज्ञापन
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर करीब छह लोगों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ शुरू कर दी है। रविवार को फाजिल्का के गांव बहक खास में कुछ लोगों ने स्वास्थ्य जांच कैंप की मुनादी करवाई जिसे सुनकर ग्रामीण कैंप में आने लगे।
विज्ञापन
कैंप के आयोजक एक मशीन पर मरीज का अंगूठा लगवाकर उनसे उसमें विभिन्न प्रकार की बीमारियां होने की बात कहते थे। इनके इलाज के लिए सैकड़ों रुपये की दवाएं भी खुद ही देते थे।
विज्ञापन
स्वास्थ्य विभाग की बिना मंजूरी के लगाए गए इस कैंप में बिना कंप्यूटर द्वारा पीजीआई जैसे अस्पतालों की तर्ज पर जांच रिपोर्ट भी दी जा रही थी, लेकिन उस रिपोर्ट पर किसी भी डाक्टर या मेडिकल संस्थान का नाम नहीं था। लोगों ने इसकी सूचना पुलिस व स्वास्थ्य विभाग को दी।
सूचना मिलते ही सिविल सर्जन डा. वाई के गुप्ता, एसडीएम सुभाष खटक, एसएमओ डा. राजेश शर्मा, स्वास्थ्य मंत्री के निजी सचिव राकेश सहगल, भाजपा मंडल महासचिव सुबोध वर्मा, डा. चंद्र मोहन कटारिया, बीईई दिवेश कुमार आदि मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों की शिकायत पर पुलिस ने सारा सामान कब्जे में ले लिया।
ड्रग इंस्पेक्टर गगनदीप कौर ने ग्रामीणों को बेची जा रही दवाओं के सैंपल भरे। शिकायतकर्ता सुरिंदर कंबोज ने रिपोर्ट पर किसी भी डाक्टर व संस्थान का नाम न होने पर उन्होंने इसकी शिकायत स्वास्थ्य मंत्री सुरजीत ज्याणी को की। सिविल सर्जन वाईके गुप्ता ने बताया कि कैंप की विभाग की तरफ से कोई मंजूरी नहीं ली गई थी।
इसके अलावा अन्य दवाओं के सैंपल भी लिए गए हैं। पुलिस पूछताछ में पता चला है कि कैंप लगाने वाले ये लोग जलालाबाद में कोई थरैपी सेंटर चलाते हैं और किसी मार्केटिंग कंपनी के साथ मिलकर कैंप आयोजित करते हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है।