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आग मत लगाएं, पराली से पैसा कमाएं
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पटियाला। आप पराली को आग मत लगाएं। इसको ईंधन की तरह भी इस्तेमाल में लाया जा सकता है। इसके माध्यम से किसान कमाई भी कर सकते हैं। यह कहना है पंजाब पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (पीपीसीबी) के चेयरमैन प्रोफेसर (डा.) आदर्शपाल विग का। उन्होंने कहा कि किसान पराली को खेतों में आग लगाने की बजाय इसका समुचित प्रबंधन करें और अपनी आय में वृद्धि करें।
यह बात चेयरमैन ने बुधवार को किसानों को धान की पराली को आग न लगाने के बारे में जागरूक करने के लिए जागरूकता वैन को हरी झंडी दिखाकर गांवों के लिए रवाना करने के बाद कही। उन्होंने बताया कि बोर्ड की ओर से किसानों को जागरूक करने के लिए यह जागरूकता वैन पंजाब के सारे जिलों में आज से 15 नवंबर तक चलाई जाएंगी। चेयरमैन ने कहा कि पिछले एक साल के दौरान पॉल्यूशन फैलाने वाले ईंट भट्ठे और अन्य उद्योगों को दस करोड़ के जुर्माने किए गए।
उन्होंने आगे कहा कि पराली को आग लगाने से वातावरण प्रदूषित होता है और धरती की उपजाऊ शक्ति खत्म हो जाती है। कीड़े मर जाते हैं और कई घातक बीमारियां जन्म लेती हैं। चेयरमैन ने बताया कि पराली को फैक्ट्री में लगे ब्वायलरों में ईंधन के तौर पर इस्तेमाल किए जाने का प्रस्ताव है। इस बारे में पंजाब सरकार ने गाइड लाइन भी जारी की हैं। इससे पराली को खेतों में आग लगाने के केस घटेंगे और किसानों को पराली का उचित मूल्य मिल सकेगा।
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पंजाब में आग लगने वाली जगहों की सेटेलाइट के माध्यम से नजर रखी जाएगी। इस बारे में बोर्ड ने रिमोट सेंसिंग सेंटर के साथ मिलकर एक एप बनाई है, जिस जरिये पराली को आग लगने वाले स्थानों की जानकारी सरकार द्वारा बनाए गए नोडल अफसरों के मोबाइल फोन पर आ जाएगी, जिससे संबंधित पटवारी की ओर से जमीन के मालिकों के खिलाफ बनती कानूनी कार्रवाई की जा सके। बोर्ड के सदस्य सेक्रेटरी इंजीनियर करुणेश गर्ग ने बताया कि इस साल एक मिलियन मीट्रिक टन पराली को इस्तेमाल में लाने का प्रस्ताव है। इस मौके पर पराली को आग लगने के संबंध में कोई भी शिकायत/सुझाव मोबाइल नंबर पर 9035172000 पर दर्ज कराने की अपील की गई है।
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यह बात चेयरमैन ने बुधवार को किसानों को धान की पराली को आग न लगाने के बारे में जागरूक करने के लिए जागरूकता वैन को हरी झंडी दिखाकर गांवों के लिए रवाना करने के बाद कही। उन्होंने बताया कि बोर्ड की ओर से किसानों को जागरूक करने के लिए यह जागरूकता वैन पंजाब के सारे जिलों में आज से 15 नवंबर तक चलाई जाएंगी। चेयरमैन ने कहा कि पिछले एक साल के दौरान पॉल्यूशन फैलाने वाले ईंट भट्ठे और अन्य उद्योगों को दस करोड़ के जुर्माने किए गए।
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उन्होंने आगे कहा कि पराली को आग लगाने से वातावरण प्रदूषित होता है और धरती की उपजाऊ शक्ति खत्म हो जाती है। कीड़े मर जाते हैं और कई घातक बीमारियां जन्म लेती हैं। चेयरमैन ने बताया कि पराली को फैक्ट्री में लगे ब्वायलरों में ईंधन के तौर पर इस्तेमाल किए जाने का प्रस्ताव है। इस बारे में पंजाब सरकार ने गाइड लाइन भी जारी की हैं। इससे पराली को खेतों में आग लगाने के केस घटेंगे और किसानों को पराली का उचित मूल्य मिल सकेगा।
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पंजाब में आग लगने वाली जगहों की सेटेलाइट के माध्यम से नजर रखी जाएगी। इस बारे में बोर्ड ने रिमोट सेंसिंग सेंटर के साथ मिलकर एक एप बनाई है, जिस जरिये पराली को आग लगने वाले स्थानों की जानकारी सरकार द्वारा बनाए गए नोडल अफसरों के मोबाइल फोन पर आ जाएगी, जिससे संबंधित पटवारी की ओर से जमीन के मालिकों के खिलाफ बनती कानूनी कार्रवाई की जा सके। बोर्ड के सदस्य सेक्रेटरी इंजीनियर करुणेश गर्ग ने बताया कि इस साल एक मिलियन मीट्रिक टन पराली को इस्तेमाल में लाने का प्रस्ताव है। इस मौके पर पराली को आग लगने के संबंध में कोई भी शिकायत/सुझाव मोबाइल नंबर पर 9035172000 पर दर्ज कराने की अपील की गई है।