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पंजाब में खत्म होगा संकट, पचवारा कोयला खदान जून में होगी शुरू
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पटियाला। पंजाब में आने वाले पैडी सीजन में बिजली की कमी से घरेलू उपभोक्ताओं के साथ किसानों को कोई परेशानी न होने की उम्मीद जगी है। पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड की झारखंड स्थित पचवारा कोयला खदान का संचालन जून महीने से शुरू होने जा रहा है। जिससे पंजाब के थर्मल प्लांटों में चल रहा कोयले का संकट खत्म होगा। पचवारा कोयला खदान से पंजाब को हर साल लाखों टन कोयला मिलेगा। इससे बिजली की किल्लत तो दूर होगी ही, साथ ही पावरकॉम के बाहर से कोयला खरीदने पर खर्च होने वाली करोड़ों रुपये की राशि बचेगी।
पंजाब में पैडी सीजन नजदीक है, लेकिन इधर प्रदेश के थर्मल प्लांटों में कोयले का संकट बना हुआ है। शनिवार को पावरकाम के अपने रोपड़ व लहरा मुहब्बत थर्मल प्लांटों में क्रमवार आठ और पांच दिनों का कोयला बचा था। वहीं प्राइवेट में तलवंडी साबो में पांच, गोइंदवाल में दो और राजपुरा में 18 दिनों का कोयला शेष था। कोयले का यह संकट पिछले काफी दिनों से चल रहा है। क्योंकि रूस व यूक्रेन की जंग के चलते विदेशी कोयला महंगा हो गया है। ऐसे में सरकारी प्लांटों के साथ-साथ अब प्राइवेट भी कोल इंडिया से कोयले के लिए निर्भर हो गए हैं। लेकिन कोयले का उत्पादन मांग के मुताबिक न होने से सप्लाई धीमी चल रही है। लेकिन अब पैडी सीजन में पंजाब में बिजली की किल्लत नहीं होगी। क्योंकि पावरकॉम की झारखंड स्थित पचवारा कोयला खदान का संचालन जून से शुरू होने जा रहा है। पावरकॉम के सीएमडी इंजीनियर बलदेव सिंह सरां ने अमर उजाला से बात करते इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि पचवारा कोयला खदान से पावरकॉम को सालाना 70 लाख टन कोयला मिलेगा। इससे पावरकाम के सालाना 600 करोड़ की बचत होगी।
इस समय पावरकॉम आर्थिक मुश्किलों से गुजर रहा है। एक तरफ 9000 करोड़ की सब्सिडी पंजाब सरकार की तरफ पेंडिंग है। दूसरी तरफ पावरकॉम पर 17000 करोड़ का कर्ज चढ़ा है। ऐसे में बाहर से कोयला खरीदने में होने वाले खर्च में बड़ी कटौती से सालाना करीब 700 करोड़ रुपये की बचत हो जाएगी। यहां गौरतलब है कि झारखंड स्थित पचवारा कोयला खदान पावरकॉम को साल 2001 में आवंटित हुई थी। लेकिन बाद में कानूनी उलझनों के चलते इस खदान का संचालन शुरू नहीं हो सका था। दरअसल साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने पचवारा खदान समेत देश की अन्य 212 खदानों का आवंटन रद कर दिया था। हालांकि मार्च 2015 में पावरकॉम को यह कोयला खदान दोबारा आवंटित हुई, लेकिन एक बार फिर से इसका संचालन कानूनी मसलों के चलते टल गया। सितंबर 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने पावरकॉम को कोयला खदान के संचालन के लिए जरूरी प्रक्रिया पूरी करने की इजाजत दी थी।
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पंजाब में पैडी सीजन नजदीक है, लेकिन इधर प्रदेश के थर्मल प्लांटों में कोयले का संकट बना हुआ है। शनिवार को पावरकाम के अपने रोपड़ व लहरा मुहब्बत थर्मल प्लांटों में क्रमवार आठ और पांच दिनों का कोयला बचा था। वहीं प्राइवेट में तलवंडी साबो में पांच, गोइंदवाल में दो और राजपुरा में 18 दिनों का कोयला शेष था। कोयले का यह संकट पिछले काफी दिनों से चल रहा है। क्योंकि रूस व यूक्रेन की जंग के चलते विदेशी कोयला महंगा हो गया है। ऐसे में सरकारी प्लांटों के साथ-साथ अब प्राइवेट भी कोल इंडिया से कोयले के लिए निर्भर हो गए हैं। लेकिन कोयले का उत्पादन मांग के मुताबिक न होने से सप्लाई धीमी चल रही है। लेकिन अब पैडी सीजन में पंजाब में बिजली की किल्लत नहीं होगी। क्योंकि पावरकॉम की झारखंड स्थित पचवारा कोयला खदान का संचालन जून से शुरू होने जा रहा है। पावरकॉम के सीएमडी इंजीनियर बलदेव सिंह सरां ने अमर उजाला से बात करते इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि पचवारा कोयला खदान से पावरकॉम को सालाना 70 लाख टन कोयला मिलेगा। इससे पावरकाम के सालाना 600 करोड़ की बचत होगी।
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इस समय पावरकॉम आर्थिक मुश्किलों से गुजर रहा है। एक तरफ 9000 करोड़ की सब्सिडी पंजाब सरकार की तरफ पेंडिंग है। दूसरी तरफ पावरकॉम पर 17000 करोड़ का कर्ज चढ़ा है। ऐसे में बाहर से कोयला खरीदने में होने वाले खर्च में बड़ी कटौती से सालाना करीब 700 करोड़ रुपये की बचत हो जाएगी। यहां गौरतलब है कि झारखंड स्थित पचवारा कोयला खदान पावरकॉम को साल 2001 में आवंटित हुई थी। लेकिन बाद में कानूनी उलझनों के चलते इस खदान का संचालन शुरू नहीं हो सका था। दरअसल साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने पचवारा खदान समेत देश की अन्य 212 खदानों का आवंटन रद कर दिया था। हालांकि मार्च 2015 में पावरकॉम को यह कोयला खदान दोबारा आवंटित हुई, लेकिन एक बार फिर से इसका संचालन कानूनी मसलों के चलते टल गया। सितंबर 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने पावरकॉम को कोयला खदान के संचालन के लिए जरूरी प्रक्रिया पूरी करने की इजाजत दी थी।
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