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पंजाब के थर्मलों में कोयले का संकट गहराया
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पंजाब के थर्मल प्लांटों में दावों के विपरीत कोयले का संकट कम होने की बजाय गहराता जा रहा है। वीरवार को थर्मलों में मात्र एक से सात दिनों का कोयला शेष रह गया। ऐसे में माना जा रहा है कि अगर जल्द पंजाब के लिए कोयले की सप्लाई सही तरीके से बहाल न हुई, तो एक बार फिर से बिजली संकट का सामना करना पड़ेगा।
पावरकॉम के सीएमडी ए वेणु प्रसाद ने हाल ही में दावा किया था कि केंद्र से बातचीत के बाद कोयले की लोडिंग पंजाब के थर्मलों के लिए हो चुकी है, लेकिन इन दावों के विपरीत वीरवार को पंजाब के थर्मल प्लांटों में कोयले का संकट और गहरा गया। थर्मलों में अब केवल एक से सात दिनों का कोयला बचा है, जबकि तय नियमों के मुताबिक थर्मल में 25 से 30 दिनों के कोयले का स्टाक का होना जरूरी है।
प्राप्त आंकड़ों के अनुसार सरकारी थर्मल प्लांट रोपड़ में सात, लहरा मुहब्बत में पांच, जबकि प्राइवेट थर्मल प्लांटों तलवंडी साबो में पांच, राजपुरा में छह और गोइंदवाल साहिब में सबसे कम केवल एक दिन का कोयला शेष है। कोयले की कमी की वजह से ही पावरकॉम ने अपने रोपड़ व लहरा मुहब्बत प्लांटों के तीन-तीन यूनिट अभी भी बंद कर रखे हैं। माहिरों का मानना है कि अगर कोयले का संकट दो-तीन दिन इसी तरह से और बना रहा, तो प्राइवेट खास तौर से गोइंदवाल प्लांट बंद हो सकते हैं।
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उधर, बिजली की मांग पंजाब में 10500 मेगावाट से कम नहीं हो रही है। वीरवार को दिन के समय बिजली की मांग 10500 मेगावाट को भी पार कर गई थी। मांग को पूरा करने के लिए पावरकॉम ने बाहर से करीब 6500 मेगावाट बिजली करीब चार रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से खरीदी, जबकि पावरकॉम को अपने थर्मलों से 385 मेगावाट, हाइडलों से 700 मेगावाट और प्राइवेट प्लांटों से 3057 मेगावाट मिली।
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पावरकॉम के सीएमडी ए वेणु प्रसाद ने हाल ही में दावा किया था कि केंद्र से बातचीत के बाद कोयले की लोडिंग पंजाब के थर्मलों के लिए हो चुकी है, लेकिन इन दावों के विपरीत वीरवार को पंजाब के थर्मल प्लांटों में कोयले का संकट और गहरा गया। थर्मलों में अब केवल एक से सात दिनों का कोयला बचा है, जबकि तय नियमों के मुताबिक थर्मल में 25 से 30 दिनों के कोयले का स्टाक का होना जरूरी है।
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प्राप्त आंकड़ों के अनुसार सरकारी थर्मल प्लांट रोपड़ में सात, लहरा मुहब्बत में पांच, जबकि प्राइवेट थर्मल प्लांटों तलवंडी साबो में पांच, राजपुरा में छह और गोइंदवाल साहिब में सबसे कम केवल एक दिन का कोयला शेष है। कोयले की कमी की वजह से ही पावरकॉम ने अपने रोपड़ व लहरा मुहब्बत प्लांटों के तीन-तीन यूनिट अभी भी बंद कर रखे हैं। माहिरों का मानना है कि अगर कोयले का संकट दो-तीन दिन इसी तरह से और बना रहा, तो प्राइवेट खास तौर से गोइंदवाल प्लांट बंद हो सकते हैं।
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उधर, बिजली की मांग पंजाब में 10500 मेगावाट से कम नहीं हो रही है। वीरवार को दिन के समय बिजली की मांग 10500 मेगावाट को भी पार कर गई थी। मांग को पूरा करने के लिए पावरकॉम ने बाहर से करीब 6500 मेगावाट बिजली करीब चार रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से खरीदी, जबकि पावरकॉम को अपने थर्मलों से 385 मेगावाट, हाइडलों से 700 मेगावाट और प्राइवेट प्लांटों से 3057 मेगावाट मिली।