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नगर काउंसिल के दर्जा चार कर्मचारियों ने की नारेबाजी
ब्यूरो, अमर उजाला, मंडी गोबिंदगढ़
Updated Sat, 21 May 2016 09:49 PM IST
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मंडी गोबिंदगढ़ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सफाई मजदूर एंड कर्मचारी यूनियन के कार्यकर्ता।
- फोटो : अमर उजाला
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नगर काउंसिल के फोर्थ क्लास मुलाजिमों ने काउंसिल अधिकारियों पर उनके ऋण और सुरक्षा बीमा की किश्त वेतन से काटकर समय पर संबंधित विभाग में जमा न करवाने के आरोप लगाए हैं। कर्मचारियों ने आर्थिक नुकसान की भरपाई न करने की सूरत में संघर्ष की चेतावनी भी दी है।
स्थानीय दशहरा ग्राउंड में शनिवार को एक विशेष बैठक के दौरान सफाई मजदूर एंड कर्मचारी यूनियन नगर काउंसिल मंडी गोबिंदगढ़ के राजिंदर गागट, चेयरमैन सुरिंदरपाल तालमेल संघर्ष कमेटी, बाल कृष्ण, सोमपाल, हरनेक, तरलोचन, सुनील कुमार और पवन कुमार ने बताया कि सरकारी कर्मचारियों के ऋण की किश्त या जीवन बीमा की किश्त उनके वेतन से काट कर नगर काउंसिल द्वारा संबंधित विभाग को भेजी जाती है। ये किश्त उनकी तनख्वाह से तो समय पर काट ली जाती है लेकिन संबंधित विभाग को नहीं भेजी जाती। जिससे उन्हें जुर्माना और ब्याज पड़ जाता है।
इस प्रकार सरकारी कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। राजिंदर गागट ने बताया कि इस संबंध में वह कई बार काउंसिल अधिकारियों से बात कर चुके है लेकिन उनका गैर जिम्मेदाराना जवाब सुनकर वह परेशान हो चुके हैं। उन्होंने मांग की कि उनके वेतन से काटी जाने वाली किश्तों को सही समय पर जमा करवाया जाए ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान न हो। यदि भविष्य में इसी प्रकार से उनका आर्थिक नुकसान होता रहा तो वह संघर्ष के लिए मजबूर होंगे।
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स्थानीय दशहरा ग्राउंड में शनिवार को एक विशेष बैठक के दौरान सफाई मजदूर एंड कर्मचारी यूनियन नगर काउंसिल मंडी गोबिंदगढ़ के राजिंदर गागट, चेयरमैन सुरिंदरपाल तालमेल संघर्ष कमेटी, बाल कृष्ण, सोमपाल, हरनेक, तरलोचन, सुनील कुमार और पवन कुमार ने बताया कि सरकारी कर्मचारियों के ऋण की किश्त या जीवन बीमा की किश्त उनके वेतन से काट कर नगर काउंसिल द्वारा संबंधित विभाग को भेजी जाती है। ये किश्त उनकी तनख्वाह से तो समय पर काट ली जाती है लेकिन संबंधित विभाग को नहीं भेजी जाती। जिससे उन्हें जुर्माना और ब्याज पड़ जाता है।
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इस प्रकार सरकारी कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। राजिंदर गागट ने बताया कि इस संबंध में वह कई बार काउंसिल अधिकारियों से बात कर चुके है लेकिन उनका गैर जिम्मेदाराना जवाब सुनकर वह परेशान हो चुके हैं। उन्होंने मांग की कि उनके वेतन से काटी जाने वाली किश्तों को सही समय पर जमा करवाया जाए ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान न हो। यदि भविष्य में इसी प्रकार से उनका आर्थिक नुकसान होता रहा तो वह संघर्ष के लिए मजबूर होंगे।
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