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चार्टर्ड अकाउंटेंट समेत तीन को सात-सात साल कैद
अमर उजाला, पटियाला
Updated Mon, 18 Nov 2013 11:13 PM IST
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दुबई में रहने वाले व्यक्ति से धोखाधड़ी के दोषी एक चार्टर्ड अकाउंटेंट समेत तीन लोगों को पटियाला में सीबीआई स्पेशल जज कंवलजीत सिंह बाजवा की कोर्ट ने सोमवार को सात-सात साल की कैद की सजा सुनाई है।
दोषियों को ढाई-ढाई लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है। सजा पाने वालों में चंडीगढ़ का चार्टर्ड अकाउंटेंट राजिंदर कपूर (53), विजय कुमार झा (65) सेक्टर 31, नोएडा और नंदिता बक्शी (56) डिफेंस कालोनी नई दिल्ली शामिल हैं। इस केस के दो आरोपियों आरके शर्मा और अनुराग बावा की मौत हो चुकी है।
जानकारी के मुताबिक इन पांचों आरोपियों के खिलाफ सीबीआई ने 18 मार्च 1998 को धारा 420, 468, 471 आईपीसी और सेक्शन 13 (1) (डी), सेक्शन 13 (2) आफ प्रिवेंशन आफ करप्शन एक्ट 1988 के तहत पर्चा दर्ज किया था।
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15 साल पुराने इस हाई प्रोफाइल रहे केस के तथ्यों के मुताबिक दुबई के रहने वाले परसराम दरयानी ने 13 लाख यूएस डालर की एफडीआर राजपुरा की स्टेट बैंक आफ इंडिया ब्रांच में कराई थी।
बैंक शाखा के तत्कालीन मैनेजर आरके शर्मा ने चार्टर्ड अकाउंटेंट राजिंदर कपूर, विजय कुमार झा, नंदिता बक्शी, फर्जी हस्ताक्षर करने में माहिर अनुराग के साथ मिलीभगत करके परसराम और उनकी पत्नी नीलम दरयानी के फर्जी हस्ताक्षर करके एक फर्जी अथारिटी लैटर व अन्य कागजात तैयार किए।
इसके आधार पर सभी ने परसराम की एफडीआर पर दो करोड़ 60 लाख का लोन ले लिया। यह घपला तब उजागर हुआ, जब परसराम ने बैंक से पता किया कि उसे एफडीआर कराने के दो महीने के बाद भी कापी नहीं मिली है। इस पर बैंक ने मामले में जांच की और घपला सामने आया।
इस केस की सुनवाई के बाद आज सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने तीनों आरोपियों राजिंदर, नंदिता और विजय कुमार झा पर दोष साबित हो जाने के बाद इन सभी को सात-सात साल की सजा सुनाई गई।
साथ ही सभी दोषियों पर जुर्माना भी लगाया गया। सभी दोषियों को सजा सुनाने के बाद पटियाला की सेंट्रल जेल भेजा गया।
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दोषियों को ढाई-ढाई लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है। सजा पाने वालों में चंडीगढ़ का चार्टर्ड अकाउंटेंट राजिंदर कपूर (53), विजय कुमार झा (65) सेक्टर 31, नोएडा और नंदिता बक्शी (56) डिफेंस कालोनी नई दिल्ली शामिल हैं। इस केस के दो आरोपियों आरके शर्मा और अनुराग बावा की मौत हो चुकी है।
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जानकारी के मुताबिक इन पांचों आरोपियों के खिलाफ सीबीआई ने 18 मार्च 1998 को धारा 420, 468, 471 आईपीसी और सेक्शन 13 (1) (डी), सेक्शन 13 (2) आफ प्रिवेंशन आफ करप्शन एक्ट 1988 के तहत पर्चा दर्ज किया था।
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15 साल पुराने इस हाई प्रोफाइल रहे केस के तथ्यों के मुताबिक दुबई के रहने वाले परसराम दरयानी ने 13 लाख यूएस डालर की एफडीआर राजपुरा की स्टेट बैंक आफ इंडिया ब्रांच में कराई थी।
बैंक शाखा के तत्कालीन मैनेजर आरके शर्मा ने चार्टर्ड अकाउंटेंट राजिंदर कपूर, विजय कुमार झा, नंदिता बक्शी, फर्जी हस्ताक्षर करने में माहिर अनुराग के साथ मिलीभगत करके परसराम और उनकी पत्नी नीलम दरयानी के फर्जी हस्ताक्षर करके एक फर्जी अथारिटी लैटर व अन्य कागजात तैयार किए।
इसके आधार पर सभी ने परसराम की एफडीआर पर दो करोड़ 60 लाख का लोन ले लिया। यह घपला तब उजागर हुआ, जब परसराम ने बैंक से पता किया कि उसे एफडीआर कराने के दो महीने के बाद भी कापी नहीं मिली है। इस पर बैंक ने मामले में जांच की और घपला सामने आया।
इस केस की सुनवाई के बाद आज सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने तीनों आरोपियों राजिंदर, नंदिता और विजय कुमार झा पर दोष साबित हो जाने के बाद इन सभी को सात-सात साल की सजा सुनाई गई।
साथ ही सभी दोषियों पर जुर्माना भी लगाया गया। सभी दोषियों को सजा सुनाने के बाद पटियाला की सेंट्रल जेल भेजा गया।