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पाठकों की उम्मीदों पर खरी उतरेगी ‘अजोका फोन संसार’ : वीसी
ब्यूरो,अमर उजाला/पटियाला
Updated Thu, 18 Aug 2016 10:24 PM IST
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पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी में आयोजित कार्यक्रम में डा. सीपी कंबोज की पुस्तक रिलीज करते वीसी डा. जसपाल सिंह।
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाबी यूनिवर्सिटी में आयोजित एक कार्यक्रम दौरान वीसी डा. जसपाल सिंह ने डा. सीपी कंबोज की स्मार्ट फोनों के बारे में लिखी पुस्तक ‘अजोका फोन संसार’ का विमोचन किया।
इस मौके पर वीसी ने कहा कि टेक्नोलॉजी के सबसे आधुनिक विषय के बारे में पंजाबी मेें रचित यह पुस्तक पाठकों की उम्मीदों पर खरी उतरेगी। पंजाबी की तकनीकी शब्दावली बनाने के क्षेत्र में और काम करने की जरूरत है।
इस मौके पर जाने-माने भाषा वैज्ञानिक डा. जोगा सिंह ने कहा कि कंप्यूटर की तकनीकी शब्दावली को लेखक ने बनाने के साथ-साथ इस्तेमाल करके दिखाया है। ऐसी शब्दावली पंजाबी के स्टूडेंट्स के पाठ्यक्रम का हिस्सा होनी चाहिए। कंप्यूटर लेखक व कालमनवीस डा. सीपी कंबोज ने कहा कि उसकी यह इच्छा थी कि वह पंजाबी की शब्दावली वाला कोई काम करें। यह पुस्तक उन पंजाबी कंप्यूटर के बाबा बोहड़ व अपने पीएचडी के गाइड डा. गुरप्रीत सिंह लहल की प्रेरणा से लिखी है और पुस्तक को पंजाबी शब्दावली का जामा पहनाने के लिए उनके बड़े भाई ओंकार सिंह का बड़ा योगदान है।
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फाजिल्का जिले के गांव लाधुका मेंजन्मे डा. कंबोज अब तक 28 पुस्तकें और अखबारों के लगातार कालमों के रूप में 3000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। पुस्तक रिलीज के मौके पर रजिस्टरार डा. देविंदर सिंह, डीन रिसर्च डा. एएस चावला, आरटीआई सेल के इंचार्ज डा. गुरचरन सिंह, कार्यकारी इंजीनियर मनजीत सिंह और ओंकार सिंह शामिल हुए।
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इस मौके पर वीसी ने कहा कि टेक्नोलॉजी के सबसे आधुनिक विषय के बारे में पंजाबी मेें रचित यह पुस्तक पाठकों की उम्मीदों पर खरी उतरेगी। पंजाबी की तकनीकी शब्दावली बनाने के क्षेत्र में और काम करने की जरूरत है।
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इस मौके पर जाने-माने भाषा वैज्ञानिक डा. जोगा सिंह ने कहा कि कंप्यूटर की तकनीकी शब्दावली को लेखक ने बनाने के साथ-साथ इस्तेमाल करके दिखाया है। ऐसी शब्दावली पंजाबी के स्टूडेंट्स के पाठ्यक्रम का हिस्सा होनी चाहिए। कंप्यूटर लेखक व कालमनवीस डा. सीपी कंबोज ने कहा कि उसकी यह इच्छा थी कि वह पंजाबी की शब्दावली वाला कोई काम करें। यह पुस्तक उन पंजाबी कंप्यूटर के बाबा बोहड़ व अपने पीएचडी के गाइड डा. गुरप्रीत सिंह लहल की प्रेरणा से लिखी है और पुस्तक को पंजाबी शब्दावली का जामा पहनाने के लिए उनके बड़े भाई ओंकार सिंह का बड़ा योगदान है।
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फाजिल्का जिले के गांव लाधुका मेंजन्मे डा. कंबोज अब तक 28 पुस्तकें और अखबारों के लगातार कालमों के रूप में 3000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। पुस्तक रिलीज के मौके पर रजिस्टरार डा. देविंदर सिंह, डीन रिसर्च डा. एएस चावला, आरटीआई सेल के इंचार्ज डा. गुरचरन सिंह, कार्यकारी इंजीनियर मनजीत सिंह और ओंकार सिंह शामिल हुए।