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एक्सपोर्टरों को महंगे दामों पर फसलें बेचने को मंडियों में नहीं पहुंचे बड़े किसान
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पटियाला। गेहूं का खरीद सीजन लगभग समाप्त है, लेकिन बड़ी बात यह है कि इस बार तय लक्ष्य से 2.64 लाख मीट्रिक टन गेहूं मंडियों में कम पहुंचा है। इसका कारण मार्च में ही तपती गर्मी पड़ने से गेहूं का झाड़ कम रहना तो है ही, साथ ही एक बड़ी वजह यह भी है कि इस बार खासतौर से बड़े किसान अपनी फसलें बेचने के लिए मंडियों में लेकर नहीं पहुंचे।
बताया जा रहा है कि एक्सपोर्टरों को महंगे दामों पर फसलें बेचने के लिए इन किसानों ने फिलहाल अपनी फसलों को स्टोर कर लिया है। इन किसानों को पूरी उम्मीद है कि जिस तरह से यूपी, राजस्थान और मध्यप्रदेश में एक्सपोर्टरों ने किसानों की फसलों को महंगे दामों पर खरीदा, उसी तर्ज पर पंजाब की मंडियों में भी आने वाले दिनों में एक्सपोर्टर पहुंचेंगे और उनकी फसलों का 2300 से लेकर 2400 प्रति क्विंटल के हिसाब से दाम देंगे।
गौरतलब है कि रूस व यूक्रेन के बीच युद्ध के कारण गेहूं का बड़े उत्पादक यूक्रेन को खुद अपनी खपत के लिए बाहर से गेहूं खरीदनी पड़ रही है। यूक्रेन में इस बार गेहूं की पैदावार न हो पाने कारण पूरे यूरोप में सप्लाई नहीं हो सकी है। इस कारण यूरोप में भी गेहूं की मांग है। उधर श्रीलंका में भी गेहूं की मांग है। इन सबके कारण इस समय मार्केट में गेहूं की मांग बहुत ज्यादा बढ़ने से इसके दाम बढ़ गए हैं। इसलिए बड़े-बड़े एक्सपोर्टर देश के विभिन्न राज्यों की मंडियों में जाकर किसानों से उनकी फसलें महंगे दामों पर खरीद रहे हैं, जबकि सरकारी एमएसपी 2015 प्रति क्विंटल है। गांव ककेपुर निवासी किसान टहल सिंह के मुताबिक बड़े किसानों ने अपनी फसलों को फिलहाल स्टोर कर लिया है। किसानों को पूरी आस है कि आने वाले दिनों में उन्हें अपनी फसलों के एक्सपोर्टरों से अच्छे दाम मिल सकेंगे।
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इस बार गेहूं की रिकार्ड तोड़ प्राइवेट खरीद हुई : जिला मंडी अधिकारी
जिला मंडी अधिकारी अजयपाल सिंह बराड़ ने बताया कि इस बार मंडियों में पिछले सारे सीजनों का रिकार्ड तोड़ते भारी मात्रा में प्राइवेट खरीद हुई है। उन्होंने बताया कि मंडियों में इस बार अब तक छह लाख 10 हजार मीट्रिक टन गेहूं की आवक हुई, जो सारी की सारी बिक चुकी है। इसमें से करीब 35000 मीट्रिक टन प्राइवेट खरीद हुई है, जबकि पिछली बार पूरे सीजन में केवल 270 मीट्रिक टन ही प्राइवेट खरीद हुई थी।
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बताया जा रहा है कि एक्सपोर्टरों को महंगे दामों पर फसलें बेचने के लिए इन किसानों ने फिलहाल अपनी फसलों को स्टोर कर लिया है। इन किसानों को पूरी उम्मीद है कि जिस तरह से यूपी, राजस्थान और मध्यप्रदेश में एक्सपोर्टरों ने किसानों की फसलों को महंगे दामों पर खरीदा, उसी तर्ज पर पंजाब की मंडियों में भी आने वाले दिनों में एक्सपोर्टर पहुंचेंगे और उनकी फसलों का 2300 से लेकर 2400 प्रति क्विंटल के हिसाब से दाम देंगे।
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गौरतलब है कि रूस व यूक्रेन के बीच युद्ध के कारण गेहूं का बड़े उत्पादक यूक्रेन को खुद अपनी खपत के लिए बाहर से गेहूं खरीदनी पड़ रही है। यूक्रेन में इस बार गेहूं की पैदावार न हो पाने कारण पूरे यूरोप में सप्लाई नहीं हो सकी है। इस कारण यूरोप में भी गेहूं की मांग है। उधर श्रीलंका में भी गेहूं की मांग है। इन सबके कारण इस समय मार्केट में गेहूं की मांग बहुत ज्यादा बढ़ने से इसके दाम बढ़ गए हैं। इसलिए बड़े-बड़े एक्सपोर्टर देश के विभिन्न राज्यों की मंडियों में जाकर किसानों से उनकी फसलें महंगे दामों पर खरीद रहे हैं, जबकि सरकारी एमएसपी 2015 प्रति क्विंटल है। गांव ककेपुर निवासी किसान टहल सिंह के मुताबिक बड़े किसानों ने अपनी फसलों को फिलहाल स्टोर कर लिया है। किसानों को पूरी आस है कि आने वाले दिनों में उन्हें अपनी फसलों के एक्सपोर्टरों से अच्छे दाम मिल सकेंगे।
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इस बार गेहूं की रिकार्ड तोड़ प्राइवेट खरीद हुई : जिला मंडी अधिकारी
जिला मंडी अधिकारी अजयपाल सिंह बराड़ ने बताया कि इस बार मंडियों में पिछले सारे सीजनों का रिकार्ड तोड़ते भारी मात्रा में प्राइवेट खरीद हुई है। उन्होंने बताया कि मंडियों में इस बार अब तक छह लाख 10 हजार मीट्रिक टन गेहूं की आवक हुई, जो सारी की सारी बिक चुकी है। इसमें से करीब 35000 मीट्रिक टन प्राइवेट खरीद हुई है, जबकि पिछली बार पूरे सीजन में केवल 270 मीट्रिक टन ही प्राइवेट खरीद हुई थी।