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रिवायती फसलों के चक्र से निकले किसान : बादल
Patiala
Updated Sun, 18 Nov 2012 12:00 PM IST
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संघोल (फतेहगढ़ साहिब)। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने पंजाब के किसानों को रिवायती फसलों के चक्र से निकलने के लिए आह्वान किया। उन्होंने किसानों को खेती के सहायक धंधे अपनाने की सलाह दी। बादल शनिवार को स्थानीय कार्डिया इंस्टीट्यूट्स में ‘ग्रामीण योजना एवं विकास तथा भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में परिवर्तन’ विषय पर करवाए जा रहे दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बोल रहे थे।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यदि हम असल में ग्रामीण क्षेत्रों का विकास चाहते हैं तो पंजाब में ऐसे स्किल सेंटर खोले जाएं जो ग्रामीण युवकों को छोटे समय में पूरे होने वाले रोजगार मुखी कोर्स करवाए जाएं। इससे ग्रामीण युवकों को रोजगार के ज्यादा मौके प्राप्त हो सकेंगे। पंजाब सरकार ने जर्मनी की एक कंपनी के साथ करार किया है जो राज्य में पांच स्किल सेंटर खोलेगी और इनमें राज्य के ग्रामीण नौजवानों को थोड़े समय के रोजगार मुखी कार्यों की ट्रेनिंग दी जाएगी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने अपने शासन काल में 9 निजी यूनिवर्सिटियां बनाई हैं। भारत सरकार लगातार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नजरअंदाज करती आ रही है। इसी के चलते पंजाब के किसानों पर 30 हजार करोड़ का कर्ज चढ़ गया। उन्होंने कहा कि कृषि को भारत सरकार राज्यों का मुद्दा कहती है, लेकिन सारा नियंत्रण अपने हाथों में रखती है। जिससे किसानों को उनका पूरा हक नहीं मिल पाता। वे बोले कि पंजाब की जनसंख्या देश की कुल दो प्रतिशत है लेकिन यह देश के अन्न भंडार में 50 फीसदी योगदान देती है, फिर भी हमारे किसान की हालत बहुत दयनीय है। उन्होंने इस विषय पर एक किताब का विमोचन भी किया। इससे पहले कार्डिया ग्रुप आफ इंस्टीट्यूटस के चेयरमैन व यूके के एमपी लॉर्ड दलजीत राणा ने आए हुए मेहमानों का स्वागत किया। सम्मेलन को कनेडियन काउंसिल जनरल आफ इंडिया स्कॉट स्लेसर, लार्ड राणा ट्रस्ट यूके की निदेशक उर्मिल वर्मा, कार्डिया इंस्टीट्यूटस के कैंपस डायरेक्टर डा. आरके शर्मा और भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय की वीसी डा. पंकज मित्तल ने भी संबोधित किया।
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इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यदि हम असल में ग्रामीण क्षेत्रों का विकास चाहते हैं तो पंजाब में ऐसे स्किल सेंटर खोले जाएं जो ग्रामीण युवकों को छोटे समय में पूरे होने वाले रोजगार मुखी कोर्स करवाए जाएं। इससे ग्रामीण युवकों को रोजगार के ज्यादा मौके प्राप्त हो सकेंगे। पंजाब सरकार ने जर्मनी की एक कंपनी के साथ करार किया है जो राज्य में पांच स्किल सेंटर खोलेगी और इनमें राज्य के ग्रामीण नौजवानों को थोड़े समय के रोजगार मुखी कार्यों की ट्रेनिंग दी जाएगी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने अपने शासन काल में 9 निजी यूनिवर्सिटियां बनाई हैं। भारत सरकार लगातार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नजरअंदाज करती आ रही है। इसी के चलते पंजाब के किसानों पर 30 हजार करोड़ का कर्ज चढ़ गया। उन्होंने कहा कि कृषि को भारत सरकार राज्यों का मुद्दा कहती है, लेकिन सारा नियंत्रण अपने हाथों में रखती है। जिससे किसानों को उनका पूरा हक नहीं मिल पाता। वे बोले कि पंजाब की जनसंख्या देश की कुल दो प्रतिशत है लेकिन यह देश के अन्न भंडार में 50 फीसदी योगदान देती है, फिर भी हमारे किसान की हालत बहुत दयनीय है। उन्होंने इस विषय पर एक किताब का विमोचन भी किया। इससे पहले कार्डिया ग्रुप आफ इंस्टीट्यूटस के चेयरमैन व यूके के एमपी लॉर्ड दलजीत राणा ने आए हुए मेहमानों का स्वागत किया। सम्मेलन को कनेडियन काउंसिल जनरल आफ इंडिया स्कॉट स्लेसर, लार्ड राणा ट्रस्ट यूके की निदेशक उर्मिल वर्मा, कार्डिया इंस्टीट्यूटस के कैंपस डायरेक्टर डा. आरके शर्मा और भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय की वीसी डा. पंकज मित्तल ने भी संबोधित किया।
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