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एम्स में तरविंद्र को एंट्री से परिवार में खुशी
Patiala
Updated Fri, 06 Jul 2012 12:00 PM IST
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राजपुरा। आल इंडिया इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) दिल्ली में कामन एंट्रेंस के घोषित रिजल्ट में राजपुरा के तरविंद्र सिंह का मेरिट में आने से उसके पिता एडवोकेट आत्मा सिंह और माता जसविंद्र कौर बेहद खुश हैं। हैलीकस कोचिंग सेंटर चंडीगढ़ से पढ़ाई करने वाले तरविंद्र सिंह ने एससी केटेगिरी में एआईपीएमटी आल इंडिया में दूसरा और पंजाब में पहला स्थान प्राप्त कर राजपुरा का नाम रोशन किया था। वीरवार के दिन उसके दोस्तों और परिजनों ने उसका जोरदार स्वागत किया। उसकी इस सफलता पर वीरवार को दिन भर उसे बधाई देने वालों का तांता लगा रहा।
सेल्फ स्टडी जरूरी
तरविंद्र ने बताया कि सेल्फ स्टडी कोचिंग से अधिक मायने रखती है। घर के अनुशासन और ट्यूशन से अधिक उसने घर में पढ़ाई की। इसके लिए उसने रोजाना 12 घंटे तक स्टडी करके अपने माता पिता का सपना साकार किया। लाखों युवाओं के प्रेरणास्त्रोत बने तरविंद्र ने परीक्षार्थियों को संदेश दिया कि जो पाठ आपको याद न आ रहा हो उसकी बार-बार स्टडी करो। पढ़ाई का शेडयूल अपने हिसाब से बनाएं। जिस विषय में आप कमजोर हैं उस पर ज्यादा ध्यान दें।
नाज है बेटे पर
तरविंद्र के पिता एडवोकेट आत्मा सिंह और माता जसविंद्र कौर को अपने बेटे पर नाज है। उन्होंने बताया कि हर माता पिता का एक ही सपना होता है कि उसके बच्चे उच्च शिक्षा प्राप्त कर उनका मान सम्मान बढ़ाएं। तरविंद्र की दिन-रात की कड़ी मेहनत और एक आंख से पूरी तरह वीक होने के बावजूद वाहे गुरु ने मेहनत का फल दिया।
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भावुक हुए दादा रणजीत सिंह
तरविंद्र के दादा रणजीत सिंह जो अनपढ़ और किसान हैं उन्होंने कहा कि मूल के साथ ब्याज ने देशभर में विशेष मुकाम बनाकर मेरा जन्म सिद्ध कर दिया। अपने पोते तरविंद्र की एम्स में एंट्री मिलने पर उसे गले लगाते हुए दादा की आंखें खुशी से छलक गईं। उन्हें बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी कि पांचवीं तक गांव थुआ के सरकारी एलीमेंट्री स्कूल में पढ़ने वाला तरविंद्र इतना बड़ा मुकाम हासिल कर लेगा। उन्होंने बताया कि तरविंद्र की लगन और मेहनत ने सबको हैरान कर दिया है। दादा पोते को दुनिया के सबसे बड़ा डाक्टर बना हुआ देखना चाहते हैं, जो पैसों के पीछे न भागकर समाज सेवा और गरीब जरूरतमंदों के काम आ सके।
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सेल्फ स्टडी जरूरी
तरविंद्र ने बताया कि सेल्फ स्टडी कोचिंग से अधिक मायने रखती है। घर के अनुशासन और ट्यूशन से अधिक उसने घर में पढ़ाई की। इसके लिए उसने रोजाना 12 घंटे तक स्टडी करके अपने माता पिता का सपना साकार किया। लाखों युवाओं के प्रेरणास्त्रोत बने तरविंद्र ने परीक्षार्थियों को संदेश दिया कि जो पाठ आपको याद न आ रहा हो उसकी बार-बार स्टडी करो। पढ़ाई का शेडयूल अपने हिसाब से बनाएं। जिस विषय में आप कमजोर हैं उस पर ज्यादा ध्यान दें।
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नाज है बेटे पर
तरविंद्र के पिता एडवोकेट आत्मा सिंह और माता जसविंद्र कौर को अपने बेटे पर नाज है। उन्होंने बताया कि हर माता पिता का एक ही सपना होता है कि उसके बच्चे उच्च शिक्षा प्राप्त कर उनका मान सम्मान बढ़ाएं। तरविंद्र की दिन-रात की कड़ी मेहनत और एक आंख से पूरी तरह वीक होने के बावजूद वाहे गुरु ने मेहनत का फल दिया।
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भावुक हुए दादा रणजीत सिंह
तरविंद्र के दादा रणजीत सिंह जो अनपढ़ और किसान हैं उन्होंने कहा कि मूल के साथ ब्याज ने देशभर में विशेष मुकाम बनाकर मेरा जन्म सिद्ध कर दिया। अपने पोते तरविंद्र की एम्स में एंट्री मिलने पर उसे गले लगाते हुए दादा की आंखें खुशी से छलक गईं। उन्हें बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी कि पांचवीं तक गांव थुआ के सरकारी एलीमेंट्री स्कूल में पढ़ने वाला तरविंद्र इतना बड़ा मुकाम हासिल कर लेगा। उन्होंने बताया कि तरविंद्र की लगन और मेहनत ने सबको हैरान कर दिया है। दादा पोते को दुनिया के सबसे बड़ा डाक्टर बना हुआ देखना चाहते हैं, जो पैसों के पीछे न भागकर समाज सेवा और गरीब जरूरतमंदों के काम आ सके।