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जेल में नशे की ओवरडोज से बिगड़ी कैदी की हालत
अमर उजाला, पठानकोट
Updated Thu, 23 Jan 2014 10:22 PM IST
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गुरदासपुर जेल में बंद एक विचाराधीन कैदी की नशे की ओवरडोज लेने से हालत इतनी बिगड़ गई कि उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
डॉक्टरों का कहना है कि अधिक नशा लेने के कारण कैदी के ज्यादातर अंग खराब हो चुके हैं और उसका शरीर नीला पड़ गया है।
वहीं परिजनों का आरोप है कि मरीज को जेल में नशा दिया जा रहा था। इसके कारण उसकी हालत बिगड़ी है।
डॉक्टरों का यह भी कहना है कि कै दी एचआईवी पॉजीटिव है। गुरदासपुर जेल में बंद एक विचारधीन कैदी 15 दिन पहले गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया था।
अस्पताल में भर्ती कैदी का कहना है कि वह आठ माह से जेल में नशा ले रहा था। 15 दिन पहले उसने अन्य कैदियों के साथ मिलकर एक साथ कई नशे के इंजेक्शन लिए थे जिससे उसकी हालत बिगड़ गई।
गुरदासपुर जेल के सुपरिटेंडेट सुरिंदर सैनी का कहना है सभी आरोेप मनगढ़ंत हैं। कैदी को नशा बेचने के आरोप में पकड़ा गया था।
गुरदासपुर जेल में समय-समय पर उच्चाधिकारियों की ओर से जांच की जाती है। जेल के अंदर नशे के कारोबार का तो सवाल ही नहीं उठता।
सिविल अस्पताल की वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. सोनिया का कहना है कि नशे की ओवरडोज से मरीज की ये हालत हुई है।
उन्होंने कैदी के एचआईवी पॉजिटिव होने की भी पुष्टि की है। वहीं, जिला यूथ कांग्रेस पठानकोट के प्रधान रोहित स्याल का कहना है कि नशे के खिलाफ कांग्रेस की मुहिम जारी है।
जेलों के अंदर नशे का कारोबार कर रहे अफसरों पर सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए।
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डॉक्टरों का कहना है कि अधिक नशा लेने के कारण कैदी के ज्यादातर अंग खराब हो चुके हैं और उसका शरीर नीला पड़ गया है।
वहीं परिजनों का आरोप है कि मरीज को जेल में नशा दिया जा रहा था। इसके कारण उसकी हालत बिगड़ी है।
डॉक्टरों का यह भी कहना है कि कै दी एचआईवी पॉजीटिव है। गुरदासपुर जेल में बंद एक विचारधीन कैदी 15 दिन पहले गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया था।
अस्पताल में भर्ती कैदी का कहना है कि वह आठ माह से जेल में नशा ले रहा था। 15 दिन पहले उसने अन्य कैदियों के साथ मिलकर एक साथ कई नशे के इंजेक्शन लिए थे जिससे उसकी हालत बिगड़ गई।
गुरदासपुर जेल के सुपरिटेंडेट सुरिंदर सैनी का कहना है सभी आरोेप मनगढ़ंत हैं। कैदी को नशा बेचने के आरोप में पकड़ा गया था।
गुरदासपुर जेल में समय-समय पर उच्चाधिकारियों की ओर से जांच की जाती है। जेल के अंदर नशे के कारोबार का तो सवाल ही नहीं उठता।
सिविल अस्पताल की वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. सोनिया का कहना है कि नशे की ओवरडोज से मरीज की ये हालत हुई है।
उन्होंने कैदी के एचआईवी पॉजिटिव होने की भी पुष्टि की है। वहीं, जिला यूथ कांग्रेस पठानकोट के प्रधान रोहित स्याल का कहना है कि नशे के खिलाफ कांग्रेस की मुहिम जारी है।
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जेलों के अंदर नशे का कारोबार कर रहे अफसरों पर सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए।