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अमृतसर में मिला गुरदासपुर का कर्णबीर
अमर उजाला, गुरदासपुर
Updated Thu, 06 Feb 2014 10:36 PM IST
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मोबाइल स्कूल न ले जाने देने पर एक दसवीं कक्षा के छात्र ने अपने ही अपहरण का ड्रामा रच डाला। सिटी पुलिस गुरदासपुर ने छात्र को श्री हरमंदिर साहिब अमृतसर से बरामद कर परिजनों को सौंप दिया है।
सिटी पुलिस स्टेशन इंचार्ज गुरदीप सिंह ने बताया कि 16 वर्षीय कर्णबीर सिंह पुत्र प्रीतम सिंह निवासी गांव मुकंदपुर नवोदय स्कूल पठानकोट में 10वीं कक्षा में पढ़ता है।
उसने अपने दोस्तों से कहा कि ऑस्ट्रेलिया में रहने वाली उसकी बहन ने उसे नया मोबाइल लाकर दिया है।
जब वह स्कूल आएगा तो नया मोबाइल लेकर आएगा। पुलिस अधिकारी ने बताया कि चार फरवरी को जब कर्णबीर स्कूल जाने लगा तो उसने अपने परिजनों से मोबाइल मांगा लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया।
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कर्णबीर ने सोचा कि अगर वह मोबाइल लेकर नहीं गया तो सभी दोस्त उसका मजाक उड़ाएंगे। इसलिए उसने अपहरण का ड्रामा रचा डाला।
गुरदासपुर बस स्टैंड से अपनी मां को पीसीओ से फोन किया कि उसे बचा लो और फोन काट दिया। फोन आने के बाद कर्णबीर के परिजनों ने पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने कर्णबीर के गुम होने की सूचना पंजाब के सभी जिलों की पुलिस को दी।
पुलिस ने मामले की जांच करते हुए कर्णबीर सिंह के अभिभावकों को साथ लेकर श्री हरमंदिर साहिब में तलाश शुरू कर दी।
वहां सीसीटीवी कैमरों की जांच में एक स्थान पर कर्णबीर सिंह का बैग दिखाई दिया। इसपर पुलिस व परिवार वालों ने श्री हरमंदिर साहिब के प्रबंधकों से बात कर एक कैमरा स्थायी रूप से बैग पर फिक्स कर दिया।
पुलिस को यकीन था कि कर्णबीर अपना बैग उठाने के लिए जरूर आएगा। लगभग दो घंटे के इंतजार के बाद कर्णबीर जैसे ही अपना बैग उठाने के लिए आया तो पुलिस ने उसके परिवार वालों की मदद से कर्णबीर सिंह को पकड़ लिया।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि पूछताछ में कर्णबीर ने स्वीकार किया कि उसने अपने अपहरण का नाटक इसलिए रचा था कि उसके परिजनों नेे उसे मोबाइल नहीं दिया।
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सिटी पुलिस स्टेशन इंचार्ज गुरदीप सिंह ने बताया कि 16 वर्षीय कर्णबीर सिंह पुत्र प्रीतम सिंह निवासी गांव मुकंदपुर नवोदय स्कूल पठानकोट में 10वीं कक्षा में पढ़ता है।
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उसने अपने दोस्तों से कहा कि ऑस्ट्रेलिया में रहने वाली उसकी बहन ने उसे नया मोबाइल लाकर दिया है।
जब वह स्कूल आएगा तो नया मोबाइल लेकर आएगा। पुलिस अधिकारी ने बताया कि चार फरवरी को जब कर्णबीर स्कूल जाने लगा तो उसने अपने परिजनों से मोबाइल मांगा लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया।
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कर्णबीर ने सोचा कि अगर वह मोबाइल लेकर नहीं गया तो सभी दोस्त उसका मजाक उड़ाएंगे। इसलिए उसने अपहरण का ड्रामा रचा डाला।
गुरदासपुर बस स्टैंड से अपनी मां को पीसीओ से फोन किया कि उसे बचा लो और फोन काट दिया। फोन आने के बाद कर्णबीर के परिजनों ने पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने कर्णबीर के गुम होने की सूचना पंजाब के सभी जिलों की पुलिस को दी।
पुलिस ने मामले की जांच करते हुए कर्णबीर सिंह के अभिभावकों को साथ लेकर श्री हरमंदिर साहिब में तलाश शुरू कर दी।
वहां सीसीटीवी कैमरों की जांच में एक स्थान पर कर्णबीर सिंह का बैग दिखाई दिया। इसपर पुलिस व परिवार वालों ने श्री हरमंदिर साहिब के प्रबंधकों से बात कर एक कैमरा स्थायी रूप से बैग पर फिक्स कर दिया।
पुलिस को यकीन था कि कर्णबीर अपना बैग उठाने के लिए जरूर आएगा। लगभग दो घंटे के इंतजार के बाद कर्णबीर जैसे ही अपना बैग उठाने के लिए आया तो पुलिस ने उसके परिवार वालों की मदद से कर्णबीर सिंह को पकड़ लिया।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि पूछताछ में कर्णबीर ने स्वीकार किया कि उसने अपने अपहरण का नाटक इसलिए रचा था कि उसके परिजनों नेे उसे मोबाइल नहीं दिया।