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फर्द की फीस जीरो.. फिर भी मांगे 500 रुपये, नायब तहसीलदार बोले- शिकायत नहीं मिली
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जीरकपुर। देश के अंदर फैली कोरोना वायरस जैसी महामारी के बाद पैदा हुए आर्थिक हालात का स्थानीय पटवारी के दफ्तर में बैठे कारिंदे भरपूर फायदा उठा रहे हैं।
ताजा मामला वीरवार को गांव लोहगढ़ स्थित पटवारी रविंदर कुमार के दफ्तर में देखने को मिला यहां एक व्यक्ति अपने प्लाट का नक्शा तैयार करवाने के लिए जमीन के रिकार्ड संबंधी फर्द दस्तावेज बनवाने पहुंचा था। जिसको दफ्तर के अंदर मौजूद कारिंदों ने यह कहकर वापस भेज दिया कि लॉकडाउन के दौरान फर्द बनाने की कीमत 500 रुपये है, जिसके बाद व्यक्ति मायूस होकर वापस लौट गया। मामले को लेकर तहसीलदार का कहना है कि इस संबंधी हमें कोई शिकायत नहीं मिली है।
वहीं, यदि कोई व्यक्ति जमीन से जुड़ा सरकारी दस्तावेज बनाने दफ्तर में आता है तो दफ्तर में काम करने वाले कारिंदे दस्तावेज बनाने के नाम पर लोगों से अलग-अलग दाम बनाकर वसूली और गुमराह करते हैं।
पंजाब सरकार ने 8 मई को खोले थे ऑफिस
जानकारी के मुताबिक, पंजाब की कांग्रेस सरकार ने अपने लगातार गिरते राजस्व को देखते हुए बीती 8 मई को सूबे के सभी तहसील और सब-तहसील ऑफिस को खोलते हुए प्रापर्टी की खरीद फरोख्त करने वालों के लिए प्रापर्टीज के रजिस्ट्रेशन को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी। वहीं, सरकार द्वारा प्रापर्टीज के रजिस्टेशन को खोलने के पीछे का मकसद यह था कि प्रापर्टी की खरीद-फरोख्त करने वाले कारोबारी अपने बिजनेस को दोबारा से शुरू कर पाएंगे और इसके साथ-साथ सरकार अपने खाली पड़े खजाने को राजस्व से भर पाए। दूसरी ओर, सरकार के आदेशों के बाद प्रापर्टीज का बिजनेस करने वालों ने अपना काम करना तो शुरू कर दिया और अब कारोबारियों को सबसे ज्यादा दिक्कत आ रही है तो वो है पटवारियों द्वारा बनाए जाने वाले जरूरी दस्तावेजों के नाम पर की जाने वाली अवैध वसूली। जिसकी वजह से लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
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इंतकाल और भारमुक्त सर्टिफिकेट के नाम पर होती हैं अवैध वसूली
जानकारी के मुताबिक, जीरकपुर सब-तहसील के अंदर रोज सैकड़ों की संख्या में लोगों की तरफ से प्रापर्टीज की खरीद फरोख्त को लेकर रजिस्ट्रेशन करवाया जाता है और प्रापर्टीज का रजिस्ट्रेशन करवाने के बाद लोगों को इंतकाल, भारमुक्त के अलावा अन्य सर्टिफिकेट के लिए पटवारियों के पास जाने की जरूरत पड़ती है। दूसरी ओर, इन सरकारी दस्तावेजों के बनाने के नाम पर पटवारी दफ्तर में बैठे कारिंदे लोगों से अलग-अलग दाम बनाकर अवैध वसूली के काम को अंजाम देते हैं। इतना ही नहीं, यदि कोई व्यक्ति कारिंदों द्वारा की जाने वाली अवैध वसूली का विरोध करता है तो कोई न कोई कारण बनाकर उसके कई चक्कर लगवाए जाते हैं।
कोट्स..
मुझे आपकी आवाज क्लीयर नहीं आ रही, अगर मेरी आवाज आपको सुन रही है तो आप सोमवार को मेरे दफ्तर में आकर बात कर लीजिए।
-रविंदर कुमार, पटवारी लोहगढ़।
कोट्स..
मामले को लेकर अभी कोई शिकायत नहीं मिली है। अगर कोई शिकायत आती है तो उसके खिलाफ जरूर एक्शन लिया जाएगा।
-वरिन्दर धुत्त, नायब तहसीलदार, जीरकपुर सब-तहसील।
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ताजा मामला वीरवार को गांव लोहगढ़ स्थित पटवारी रविंदर कुमार के दफ्तर में देखने को मिला यहां एक व्यक्ति अपने प्लाट का नक्शा तैयार करवाने के लिए जमीन के रिकार्ड संबंधी फर्द दस्तावेज बनवाने पहुंचा था। जिसको दफ्तर के अंदर मौजूद कारिंदों ने यह कहकर वापस भेज दिया कि लॉकडाउन के दौरान फर्द बनाने की कीमत 500 रुपये है, जिसके बाद व्यक्ति मायूस होकर वापस लौट गया। मामले को लेकर तहसीलदार का कहना है कि इस संबंधी हमें कोई शिकायत नहीं मिली है।
वहीं, यदि कोई व्यक्ति जमीन से जुड़ा सरकारी दस्तावेज बनाने दफ्तर में आता है तो दफ्तर में काम करने वाले कारिंदे दस्तावेज बनाने के नाम पर लोगों से अलग-अलग दाम बनाकर वसूली और गुमराह करते हैं।
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पंजाब सरकार ने 8 मई को खोले थे ऑफिस
जानकारी के मुताबिक, पंजाब की कांग्रेस सरकार ने अपने लगातार गिरते राजस्व को देखते हुए बीती 8 मई को सूबे के सभी तहसील और सब-तहसील ऑफिस को खोलते हुए प्रापर्टी की खरीद फरोख्त करने वालों के लिए प्रापर्टीज के रजिस्ट्रेशन को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी। वहीं, सरकार द्वारा प्रापर्टीज के रजिस्टेशन को खोलने के पीछे का मकसद यह था कि प्रापर्टी की खरीद-फरोख्त करने वाले कारोबारी अपने बिजनेस को दोबारा से शुरू कर पाएंगे और इसके साथ-साथ सरकार अपने खाली पड़े खजाने को राजस्व से भर पाए। दूसरी ओर, सरकार के आदेशों के बाद प्रापर्टीज का बिजनेस करने वालों ने अपना काम करना तो शुरू कर दिया और अब कारोबारियों को सबसे ज्यादा दिक्कत आ रही है तो वो है पटवारियों द्वारा बनाए जाने वाले जरूरी दस्तावेजों के नाम पर की जाने वाली अवैध वसूली। जिसकी वजह से लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
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इंतकाल और भारमुक्त सर्टिफिकेट के नाम पर होती हैं अवैध वसूली
जानकारी के मुताबिक, जीरकपुर सब-तहसील के अंदर रोज सैकड़ों की संख्या में लोगों की तरफ से प्रापर्टीज की खरीद फरोख्त को लेकर रजिस्ट्रेशन करवाया जाता है और प्रापर्टीज का रजिस्ट्रेशन करवाने के बाद लोगों को इंतकाल, भारमुक्त के अलावा अन्य सर्टिफिकेट के लिए पटवारियों के पास जाने की जरूरत पड़ती है। दूसरी ओर, इन सरकारी दस्तावेजों के बनाने के नाम पर पटवारी दफ्तर में बैठे कारिंदे लोगों से अलग-अलग दाम बनाकर अवैध वसूली के काम को अंजाम देते हैं। इतना ही नहीं, यदि कोई व्यक्ति कारिंदों द्वारा की जाने वाली अवैध वसूली का विरोध करता है तो कोई न कोई कारण बनाकर उसके कई चक्कर लगवाए जाते हैं।
कोट्स..
मुझे आपकी आवाज क्लीयर नहीं आ रही, अगर मेरी आवाज आपको सुन रही है तो आप सोमवार को मेरे दफ्तर में आकर बात कर लीजिए।
-रविंदर कुमार, पटवारी लोहगढ़।
कोट्स..
मामले को लेकर अभी कोई शिकायत नहीं मिली है। अगर कोई शिकायत आती है तो उसके खिलाफ जरूर एक्शन लिया जाएगा।
-वरिन्दर धुत्त, नायब तहसीलदार, जीरकपुर सब-तहसील।