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Mohali News: अदालत में नौकरी लगवाने के नाम पर ठगे गए युवाओं को न्याय की दरकार
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अदालत में नौकरी लगवाने के नाम पर ठगे गए युवाओं को न्याय की दरकार
खुद को हाईकोर्ट का वकील बताकर आरोप ने 11 युवकों से ठगे करीब 10 लाख रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
मुल्लांपुर। खुद को हाईकोर्ट का वकील बताकर इलाके के 11 युवकों को अदालत में नौकरी दिलाने के नाम पर नौ लाख 99 हजार 500 रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया है। इस मामले में एसएसपी के आदेश पर मुल्लांपुर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपी की पहचान संजीव कुमार निवासी जासला, बनूड़ जिला पटियाला के रूप में हुई है।
शिकायतकर्ता चरणजीत सिंह निवासी गांव कंसाला ने बताया कि वह और उनकी टीम दरगाह पर कव्वालियां गाती हैं। उनकी टीम उक्त आरोपी के गांव में दरगाह पर कव्वालियां गाने जाती थी। इस दौरान संजीव कुमार से मुलाकात के बाद उनकी दोस्ती हो गई। वह लगातार उसके गांव में दरगाह पर जाते रहे। लेकिन इसके बाद पांच साल तक वह उन्हें नहीं मिला। इसी बीच 2019 में संजीव कुमार ने उन्हें फोन किया और कहा कि वह हाईकोर्ट में वकील बन गया है, इस कारण वह पांच साल तक उनसे नहीं मिल सका। उसने यह भी बताया कि हाईकोर्ट समेत राज्य की अन्य अदालतों में क्लर्क, चपरासी और ड्राइवर रखे जाने हैं और वह उस कमेटी का सदस्य है, जिसने यह नियुक्तियां फाइनल करनी हैं।
अगर उन्हें किसी को नौकरी लगवानी है तो वह बता दें लेकिन इसके लिए पैसे लगेंगे। उसकी बात पर भरोसा करके उन्होंने तीन बच्चों को नौकरी पर रखवाने के लिए 70 हजार रुपये प्रति बच्चे के हिसाब से पैसे दे दिए। पैसे लेने के बाद उसने फार्म भरने की बात कहकर बहाना बनाया कि उनकी अर्जी उसने फाइनल कर दी है, लेकिन अभी कुछ और पद खाली हैं। अगर और किसी को रखवाना है तो बता दो। उसकी बात सुनकर उन्होंने अपने रिश्तेदारों को बोलकर आठ और बच्चों को रखवाने के लिए इसे पैसे दिए। इसके बाद वह कभी बच्चों को सेक्टर-17 तो कभी सेक्टर-22 में मिलने के लिए बुलाता रहा। एक-दो बार उसने मिलने के लिए रोपड़ अदालत में बुलाया। इसके बाद कभी मुल्लांपुर, तो कभी कहीं और बुलाकर नकद पैसे भी लिए।
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इसी बीच कोरोना काल शुरू होने पर उसने थोड़ा ओर समय लगने की बात कही। लेकिन इसके बाद भी जब कुछ नहीं बना तो इससे परेशान होकर एक दिन उन्होंने इस बारे में खुद ही छानबीन की तो पता चला कि हाईकोर्ट और अन्य अदालतों में कहीं भी नौकरी के लिए कहीं कोई भर्ती प्रक्रिया नहीं चल रही है। यह पता चलने पर उन्होंने उक्त आरोपी से या तो बच्चों को नौकरी लगवाने या फिर पैसे लौटाने के लिए कहा। लेकिन वह उन्हें आश्वासन देता रहा। इसी बीच वे उसके घर गए तो उसने उन्हें डेढ़-डेढ़ लाख रुपये के दो चेक दिए, लेकिन वे भी बाउंस हो गए। बच्चों को न तो नौकरी मिलने और न ही पैसे मिलने से परेशान होकर उन्होंने 5 दिसंबर, 2020 को इस बारे में एसएसपी कार्यालय में शिकायत दी।
इस शिकायत की जांच डीएसपी मुल्लांपुर ने करके एसपी (ग्रामीण) को दी। उन्होंने जांच करने के बाद रिपोर्ट एसएसपी को दी। इसके बाद एसएसपी डॉ. संदीप गर्ग ने डीए लीगल से सलाह लेकर आरोपी पर केस दर्ज करने का आदेश दिया।
सावधान रहें... किसी भी अदालत में कोई नहीं करवा सकता भर्ती
हाईकोर्ट के वकील कमलदीप सिंह सिद्धू ने कहा कि हाईकोर्ट या किसी भी अदालत में कोई भी किसी को नौकरी पर सीधे तौर पर भर्ती नहीं करवा सकता है। रजिस्ट्रार रिक्रूटमेंट सेल की ओर से ही हाईकोर्ट में लोगों को नौकरी पर रखा जाता है। इसके लिए बड़े अखबारों में बाकायदा विज्ञापन दिया जाता है। इसके साथ ही वेबसाइट पर भी इसके बारे में बताया जाता है। इसका फार्म और फीस भरवाकर परीक्षा ली जाती है। परीक्षा के बाद ही बच्चों को नौकरी पर रखा जाता है।
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खुद को हाईकोर्ट का वकील बताकर आरोप ने 11 युवकों से ठगे करीब 10 लाख रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
मुल्लांपुर। खुद को हाईकोर्ट का वकील बताकर इलाके के 11 युवकों को अदालत में नौकरी दिलाने के नाम पर नौ लाख 99 हजार 500 रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया है। इस मामले में एसएसपी के आदेश पर मुल्लांपुर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपी की पहचान संजीव कुमार निवासी जासला, बनूड़ जिला पटियाला के रूप में हुई है।
शिकायतकर्ता चरणजीत सिंह निवासी गांव कंसाला ने बताया कि वह और उनकी टीम दरगाह पर कव्वालियां गाती हैं। उनकी टीम उक्त आरोपी के गांव में दरगाह पर कव्वालियां गाने जाती थी। इस दौरान संजीव कुमार से मुलाकात के बाद उनकी दोस्ती हो गई। वह लगातार उसके गांव में दरगाह पर जाते रहे। लेकिन इसके बाद पांच साल तक वह उन्हें नहीं मिला। इसी बीच 2019 में संजीव कुमार ने उन्हें फोन किया और कहा कि वह हाईकोर्ट में वकील बन गया है, इस कारण वह पांच साल तक उनसे नहीं मिल सका। उसने यह भी बताया कि हाईकोर्ट समेत राज्य की अन्य अदालतों में क्लर्क, चपरासी और ड्राइवर रखे जाने हैं और वह उस कमेटी का सदस्य है, जिसने यह नियुक्तियां फाइनल करनी हैं।
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अगर उन्हें किसी को नौकरी लगवानी है तो वह बता दें लेकिन इसके लिए पैसे लगेंगे। उसकी बात पर भरोसा करके उन्होंने तीन बच्चों को नौकरी पर रखवाने के लिए 70 हजार रुपये प्रति बच्चे के हिसाब से पैसे दे दिए। पैसे लेने के बाद उसने फार्म भरने की बात कहकर बहाना बनाया कि उनकी अर्जी उसने फाइनल कर दी है, लेकिन अभी कुछ और पद खाली हैं। अगर और किसी को रखवाना है तो बता दो। उसकी बात सुनकर उन्होंने अपने रिश्तेदारों को बोलकर आठ और बच्चों को रखवाने के लिए इसे पैसे दिए। इसके बाद वह कभी बच्चों को सेक्टर-17 तो कभी सेक्टर-22 में मिलने के लिए बुलाता रहा। एक-दो बार उसने मिलने के लिए रोपड़ अदालत में बुलाया। इसके बाद कभी मुल्लांपुर, तो कभी कहीं और बुलाकर नकद पैसे भी लिए।
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इसी बीच कोरोना काल शुरू होने पर उसने थोड़ा ओर समय लगने की बात कही। लेकिन इसके बाद भी जब कुछ नहीं बना तो इससे परेशान होकर एक दिन उन्होंने इस बारे में खुद ही छानबीन की तो पता चला कि हाईकोर्ट और अन्य अदालतों में कहीं भी नौकरी के लिए कहीं कोई भर्ती प्रक्रिया नहीं चल रही है। यह पता चलने पर उन्होंने उक्त आरोपी से या तो बच्चों को नौकरी लगवाने या फिर पैसे लौटाने के लिए कहा। लेकिन वह उन्हें आश्वासन देता रहा। इसी बीच वे उसके घर गए तो उसने उन्हें डेढ़-डेढ़ लाख रुपये के दो चेक दिए, लेकिन वे भी बाउंस हो गए। बच्चों को न तो नौकरी मिलने और न ही पैसे मिलने से परेशान होकर उन्होंने 5 दिसंबर, 2020 को इस बारे में एसएसपी कार्यालय में शिकायत दी।
इस शिकायत की जांच डीएसपी मुल्लांपुर ने करके एसपी (ग्रामीण) को दी। उन्होंने जांच करने के बाद रिपोर्ट एसएसपी को दी। इसके बाद एसएसपी डॉ. संदीप गर्ग ने डीए लीगल से सलाह लेकर आरोपी पर केस दर्ज करने का आदेश दिया।
सावधान रहें... किसी भी अदालत में कोई नहीं करवा सकता भर्ती
हाईकोर्ट के वकील कमलदीप सिंह सिद्धू ने कहा कि हाईकोर्ट या किसी भी अदालत में कोई भी किसी को नौकरी पर सीधे तौर पर भर्ती नहीं करवा सकता है। रजिस्ट्रार रिक्रूटमेंट सेल की ओर से ही हाईकोर्ट में लोगों को नौकरी पर रखा जाता है। इसके लिए बड़े अखबारों में बाकायदा विज्ञापन दिया जाता है। इसके साथ ही वेबसाइट पर भी इसके बारे में बताया जाता है। इसका फार्म और फीस भरवाकर परीक्षा ली जाती है। परीक्षा के बाद ही बच्चों को नौकरी पर रखा जाता है।