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Mohali News: आईटी सिटी इन्हांसमेंट पर हुआ हंगामा, जनसुनवाई में गमाडा अधिकारियों के पास नहीं थे जवाब
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर बुलाई गई थी जनसुनवाई, अगली बैठक 29 सितंबर को होगी
संवाद न्यूज एजेेंसी
मोहाली। आईटी सिटी के प्लॉट मालिकों पर बढ़ी हुई कीमत (इन्हांसमेंट) के मामले में मंगलवार को हुई जनसुनवाई हंगामेदार रही। गमाडा अधिकारियों को प्लॉट मालिकों के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा, जिनके संतोषजनक जवाब नहीं मिल पाए। इसके चलते जनसुनवाई को 29 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। यह जनसुनवाई पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 29 अगस्त के आदेश के बाद बुलाई गई थी। अदालत ने प्लॉट मालिक परमजीत सिंह द्वारा दायर मामले में गमाडा के पुराने इन्हांसमेंट नोटिस रद्द कर दिए थे। हालांकि, गमाडा को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए नए सिरे से बढ़ी हुई कीमत वसूलने की अनुमति दी गई थी। गमाडा के मुख्य प्रशासक द्वारा यह बैठक बुलाई गई थी। इसमें आईटी सिटी के प्लॉट मालिकों और नागरिक कल्याण संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। पार्षद नसीब सिंह संधू के अनुसार, लोगों ने अधिकारियों से इन्हांसमेंट लागू करने का आधार पूछा। उन्होंने वर्ष 2011 में जमीन अधिग्रहण की लागत, विकास कार्यों के खर्च और गमाडा के मुनाफे का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की। प्लॉट मालिकों ने यह भी जानना चाहा कि पहले प्लॉट बेचकर गमाडा ने कितना मुनाफा कमाया।
पुराने नोटिस और ब्याज पर सवाल
प्लॉट मालिकों ने सवाल उठाया कि वर्ष 2011 में जमीन अधिग्रहण के मुआवजे पर किसानों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। इस मामले का फैसला 2015 में आ गया था। इसके बावजूद गमाडा ने 2019 और 2020 में प्लॉट आवंटन के समय इनहांसमेंट क्यों नहीं लगाई। उन्होंने वर्ष 2015 से 2020 तक की राशि पर ब्याज मांगने के आधार पर भी सवाल उठाए। यह स्पष्टीकरण मांगा गया कि जब फैसला 2015 में आया तो बाद में आवंटन के समय इनहांसमेंट क्यों नहीं जोड़ी गई।
प्रमाणपत्रों में देरी और दबाव के आरोप
बैठक में अधिकारियों से एनओसी, एनडीसी और कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी करने में हो रही देरी पर भी सवाल किए गए। प्लॉट मालिकों ने आरोप लगाया कि इनहांसमेंट जमा करवाने के लिए उन पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कंप्लीशन सर्टिफिकेट के लिए आवेदन करने वालों को भी प्रमाणपत्र नहीं मिल रहे। इससे उन पर नॉन-कंस्ट्रक्शन फीस लगाई जा रही है। बैठक में निर्णय लिया गया कि सभी जरूरी प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे। कंप्लीशन के लिए आवेदन जमा करने की तारीख से ही उसे पूर्ण माना जाएगा।
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मोहाली। आईटी सिटी के प्लॉट मालिकों पर बढ़ी हुई कीमत (इन्हांसमेंट) के मामले में मंगलवार को हुई जनसुनवाई हंगामेदार रही। गमाडा अधिकारियों को प्लॉट मालिकों के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा, जिनके संतोषजनक जवाब नहीं मिल पाए। इसके चलते जनसुनवाई को 29 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। यह जनसुनवाई पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 29 अगस्त के आदेश के बाद बुलाई गई थी। अदालत ने प्लॉट मालिक परमजीत सिंह द्वारा दायर मामले में गमाडा के पुराने इन्हांसमेंट नोटिस रद्द कर दिए थे। हालांकि, गमाडा को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए नए सिरे से बढ़ी हुई कीमत वसूलने की अनुमति दी गई थी। गमाडा के मुख्य प्रशासक द्वारा यह बैठक बुलाई गई थी। इसमें आईटी सिटी के प्लॉट मालिकों और नागरिक कल्याण संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। पार्षद नसीब सिंह संधू के अनुसार, लोगों ने अधिकारियों से इन्हांसमेंट लागू करने का आधार पूछा। उन्होंने वर्ष 2011 में जमीन अधिग्रहण की लागत, विकास कार्यों के खर्च और गमाडा के मुनाफे का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की। प्लॉट मालिकों ने यह भी जानना चाहा कि पहले प्लॉट बेचकर गमाडा ने कितना मुनाफा कमाया।
पुराने नोटिस और ब्याज पर सवाल
प्लॉट मालिकों ने सवाल उठाया कि वर्ष 2011 में जमीन अधिग्रहण के मुआवजे पर किसानों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। इस मामले का फैसला 2015 में आ गया था। इसके बावजूद गमाडा ने 2019 और 2020 में प्लॉट आवंटन के समय इनहांसमेंट क्यों नहीं लगाई। उन्होंने वर्ष 2015 से 2020 तक की राशि पर ब्याज मांगने के आधार पर भी सवाल उठाए। यह स्पष्टीकरण मांगा गया कि जब फैसला 2015 में आया तो बाद में आवंटन के समय इनहांसमेंट क्यों नहीं जोड़ी गई।
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प्रमाणपत्रों में देरी और दबाव के आरोप
बैठक में अधिकारियों से एनओसी, एनडीसी और कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी करने में हो रही देरी पर भी सवाल किए गए। प्लॉट मालिकों ने आरोप लगाया कि इनहांसमेंट जमा करवाने के लिए उन पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कंप्लीशन सर्टिफिकेट के लिए आवेदन करने वालों को भी प्रमाणपत्र नहीं मिल रहे। इससे उन पर नॉन-कंस्ट्रक्शन फीस लगाई जा रही है। बैठक में निर्णय लिया गया कि सभी जरूरी प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे। कंप्लीशन के लिए आवेदन जमा करने की तारीख से ही उसे पूर्ण माना जाएगा।
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