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सीपीडीएल में तबादला हुआ तो सरकारी आवास के हक से नहीं कर सकते वंचित: कैट
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चंडीगढ़। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की चंडीगढ़ पीठ ने बिजली विभाग के 24 कर्मचारियों को राहत देते हुए सरकारी आवास आवंटन से जुड़े 27 और 30 मार्च 2026 के कार्यालय आदेश रद्द कर दिए हैं। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि चंडीगढ़ पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (सीपीडीएल) में स्थानांतरण के आधार पर कर्मचारियों के आवास आवेदनों को विचार से बाहर नहीं किया जा सकता।
न्यायिक सदस्य रमेश सिंह ठाकुर ने कहा कि बिजली विभाग की आवासीय कॉलोनियां और क्वार्टर सीपीडीएल को हस्तांतरित नहीं हुए हैं, बल्कि चंडीगढ़ प्रशासन के नियंत्रण में हैं। इसलिए कर्मचारियों के आवेदनों पर नियमानुसार विचार करना जरूरी है।
कर्मचारियों ने मार्च 2026 में सरकारी आवास के लिए आवेदन किया था। उनका आरोप था कि उनके आवेदनों पर विचार किए बिना अन्य शाखाओं के कर्मचारियों को बिजली पूल के मकान आवंटित कर दिए गए। प्रशासन ने दलील दी थी कि सीपीडीएल में स्थानांतरित कर्मचारियों को नए आवास आवंटन या मकान बदलने का अधिकार नहीं है।
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कैट ने कहा कि आवेदन करने मात्र से किसी विशेष मकान का अधिकार नहीं मिलता। पात्रता, वरिष्ठता और अन्य निर्धारित मानकों की जांच जरूरी है। अधिकरण ने संबंधित आवेदनों पर छह सप्ताह के भीतर दोबारा विचार करने के निर्देश दिए हैं।
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न्यायिक सदस्य रमेश सिंह ठाकुर ने कहा कि बिजली विभाग की आवासीय कॉलोनियां और क्वार्टर सीपीडीएल को हस्तांतरित नहीं हुए हैं, बल्कि चंडीगढ़ प्रशासन के नियंत्रण में हैं। इसलिए कर्मचारियों के आवेदनों पर नियमानुसार विचार करना जरूरी है।
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कर्मचारियों ने मार्च 2026 में सरकारी आवास के लिए आवेदन किया था। उनका आरोप था कि उनके आवेदनों पर विचार किए बिना अन्य शाखाओं के कर्मचारियों को बिजली पूल के मकान आवंटित कर दिए गए। प्रशासन ने दलील दी थी कि सीपीडीएल में स्थानांतरित कर्मचारियों को नए आवास आवंटन या मकान बदलने का अधिकार नहीं है।
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कैट ने कहा कि आवेदन करने मात्र से किसी विशेष मकान का अधिकार नहीं मिलता। पात्रता, वरिष्ठता और अन्य निर्धारित मानकों की जांच जरूरी है। अधिकरण ने संबंधित आवेदनों पर छह सप्ताह के भीतर दोबारा विचार करने के निर्देश दिए हैं।