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खरड् चंडीगढ़ हाईवे पर तीन घंटे तक आवाजाही रही बंद
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मोहाली। पंजाब रोडवेज के कच्चे मुलाजिम परिवहन विभाग में आउटसोर्सिंग के माध्यम से भर्ती के विरोध में शनिवार को राज्य सरकार के खिलाफ संघर्ष की राह पर उतर आए। उन्होंने सरकार का विरोध करते हुए करीब तीन घंटे तक खरड़-चंडीगढ़ हाईवे जाम किया। इससे खरड़-बनूड हाईवे और इलाके की अंदरूनी सड़कों पर ट्रैफिक जाम लग गया। आखिर में जिला प्रशासन के अधिकारियों ने संघर्ष पर चल रहे मुलाजिमों को परिवहन मंत्री से 11 अक्तूबर को मुलाकात का समय दिलवाया। इसके बाद उन्होंने अपना संघर्ष खत्म किया।
शनिवार को सुबह आठ बजे से ही मुलाजिम खरड़ में जुटना शुरू हो गए थे। इनमें पंजाब रोडवेज, पीआरटीसी, पनबस के ठेका कर्मी शामिल हुए। दोपहर 11 बजे इन्होंने देसूमाजरा के पास हाईवे पर ही बसें तिरछी करके लगा दीं। साथ ही हाईवे को पूरी तरह से बंद कर दिया। इस दौरान कुछ कर्मी बसों की छतों पर चढ़ गए। साथ ही अपने आपको पेट्रोल लगाकर आग लगाने की धमकी तक देने लेगे। जबकि कुछ मुलाजिम पानी वाली टंकी पर चढ़ गए। इससे प्रशासन के अधिकारी भी आफत में आ गए। यहां पर माहौल बिगड़ता देख इस बारे में उच्च अधिकारियों को सूचित किया गया। छुट्टी होने के चलते सभी अधिकारी सक्रिय हो गए। साथ ही उक्त लोगों को मनाने का प्रयास शुरू किया। लेकिन संघर्षरत मुलाजिम सीधे अपनी मांगों के हल को लेकर सुधार चाहते थे। आखिर में विभाग के अधिकारियों ने परिवहन मंत्री से मुलाकात की। साथ ही उनसे 11 अक्तूबर को मुलाकात का समय तय किया गया। इसके बाद मुलाजिम शांत हुए। मुलाजिमों का कहना है कि वह पीछे हटने वाले नहीं हैं।
अपनी बात से पीछे हट रही सरकार
पंजाब रोडवेज, पनबस, पीआरटीसी कांट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष रेशम सिंह गिल ने बताया कि वह सरकार के आउटसोर्सिंग के माध्यम से ड्राइवरों को काम पर रखने के फैसले का विरोध कर रहे थे। सरकार को स्थायी तौर पर भर्ती करनी चाहिए थी। आप सरकार दावा करती रही है कि ठेका कर्मचारियों को स्थायी किया जा रहा है। साथ ही आउटसोर्सिंग के माध्यम से भर्ती नहीं की जाएगी। जबकि सरकार अब अपनी बात से पीछे हट रही है। परिवहन विभाग में आउटसोर्सिंग के माध्यम से ड्राइवरों को काम पर रखा जा रहा है। उन्हें सिर्फ 9,100 रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जा रहा है।
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शनिवार को सुबह आठ बजे से ही मुलाजिम खरड़ में जुटना शुरू हो गए थे। इनमें पंजाब रोडवेज, पीआरटीसी, पनबस के ठेका कर्मी शामिल हुए। दोपहर 11 बजे इन्होंने देसूमाजरा के पास हाईवे पर ही बसें तिरछी करके लगा दीं। साथ ही हाईवे को पूरी तरह से बंद कर दिया। इस दौरान कुछ कर्मी बसों की छतों पर चढ़ गए। साथ ही अपने आपको पेट्रोल लगाकर आग लगाने की धमकी तक देने लेगे। जबकि कुछ मुलाजिम पानी वाली टंकी पर चढ़ गए। इससे प्रशासन के अधिकारी भी आफत में आ गए। यहां पर माहौल बिगड़ता देख इस बारे में उच्च अधिकारियों को सूचित किया गया। छुट्टी होने के चलते सभी अधिकारी सक्रिय हो गए। साथ ही उक्त लोगों को मनाने का प्रयास शुरू किया। लेकिन संघर्षरत मुलाजिम सीधे अपनी मांगों के हल को लेकर सुधार चाहते थे। आखिर में विभाग के अधिकारियों ने परिवहन मंत्री से मुलाकात की। साथ ही उनसे 11 अक्तूबर को मुलाकात का समय तय किया गया। इसके बाद मुलाजिम शांत हुए। मुलाजिमों का कहना है कि वह पीछे हटने वाले नहीं हैं।
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अपनी बात से पीछे हट रही सरकार
पंजाब रोडवेज, पनबस, पीआरटीसी कांट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष रेशम सिंह गिल ने बताया कि वह सरकार के आउटसोर्सिंग के माध्यम से ड्राइवरों को काम पर रखने के फैसले का विरोध कर रहे थे। सरकार को स्थायी तौर पर भर्ती करनी चाहिए थी। आप सरकार दावा करती रही है कि ठेका कर्मचारियों को स्थायी किया जा रहा है। साथ ही आउटसोर्सिंग के माध्यम से भर्ती नहीं की जाएगी। जबकि सरकार अब अपनी बात से पीछे हट रही है। परिवहन विभाग में आउटसोर्सिंग के माध्यम से ड्राइवरों को काम पर रखा जा रहा है। उन्हें सिर्फ 9,100 रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जा रहा है।
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