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Mohali News: मोहाली में हजारों शिक्षकों का प्रदर्शन, सीएम आवास की ओर निकाला रोष मार्च
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मोहाली। गवर्नमेंट टीचर्स यूनियन (जीटीयू) पंजाब के बैनर तले सोमवार को हजारों शिक्षकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर विद्या भवन, मोहाली में जोरदार प्रदर्शन किया। राज्य प्रधान सुखविंदर सिंह चाहल और महासचिव गुरबिंदर सिंह ससकौर की अगुवाई में आयोजित रैली के बाद शिक्षकों ने मुख्यमंत्री आवास की ओर रोष मार्च शुरू किया, लेकिन चंडीगढ़ और पंजाब पुलिस ने बैरिकेड लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद शिक्षकों ने सड़क पर धरना देकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि केंद्र और पंजाब सरकार की नीतियों से सरकारी शिक्षा व्यवस्था कमजोर हो रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के नाम पर स्कूलों को शिक्षक विहीन किया जा रहा है। शिक्षकों ने महंगाई भत्ते को केंद्र से डी-लिंक करने की कथित कोशिशों, वेतन संशोधन के बकाया भुगतान में देरी और बार-बार पेपर लीक की घटनाओं को लेकर भी सरकार को घेरा।
रैली को संबोधित करते हुए विभिन्न शिक्षक नेताओं ने पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, टेट की अनिवार्यता समाप्त करने, सभी कैडरों की लंबित पदोन्नतियां पूरी करने तथा शिक्षा विभाग में कार्यरत कंप्यूटर, एनएसक्यूएफ, शिक्षा प्रोवाइडर, ईजीएस, एसटीआर वॉलंटियर और अन्य संविदा शिक्षकों को नियमित करने की मांग उठाई।
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शिक्षकों ने 18 प्रतिशत लंबित महंगाई भत्ता जारी करने, वेतन आयोग की विसंगतियां दूर करने, बंद किए गए भत्तों को बहाल करने, गैर-शैक्षणिक कार्यों से शिक्षकों को मुक्त करने और नई शिक्षक भर्तियां करने की भी मांग की। इसके अलावा स्कूलों में खेल सुविधाओं में सुधार, पाठ्य पुस्तकों की समय पर उपलब्धता और सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
सरकार ने बैठक का दिया लिखित आश्वासन
धरने के दौरान प्रशासन की ओर से शिक्षकों को 9 जून को शिक्षा विभाग के साथ पैनल बैठक और 23 जून को कैबिनेट सब-कमेटी के साथ बैठक का लिखित आश्वासन दिया गया। इसके बाद प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया। रैली में विभिन्न शिक्षक संगठनों और बेरोजगार शिक्षक यूनियनों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया और शिक्षा तथा शिक्षकों से जुड़े मुद्दों का शीघ्र समाधान करने की मांग की।
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प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि केंद्र और पंजाब सरकार की नीतियों से सरकारी शिक्षा व्यवस्था कमजोर हो रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के नाम पर स्कूलों को शिक्षक विहीन किया जा रहा है। शिक्षकों ने महंगाई भत्ते को केंद्र से डी-लिंक करने की कथित कोशिशों, वेतन संशोधन के बकाया भुगतान में देरी और बार-बार पेपर लीक की घटनाओं को लेकर भी सरकार को घेरा।
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रैली को संबोधित करते हुए विभिन्न शिक्षक नेताओं ने पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, टेट की अनिवार्यता समाप्त करने, सभी कैडरों की लंबित पदोन्नतियां पूरी करने तथा शिक्षा विभाग में कार्यरत कंप्यूटर, एनएसक्यूएफ, शिक्षा प्रोवाइडर, ईजीएस, एसटीआर वॉलंटियर और अन्य संविदा शिक्षकों को नियमित करने की मांग उठाई।
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शिक्षकों ने 18 प्रतिशत लंबित महंगाई भत्ता जारी करने, वेतन आयोग की विसंगतियां दूर करने, बंद किए गए भत्तों को बहाल करने, गैर-शैक्षणिक कार्यों से शिक्षकों को मुक्त करने और नई शिक्षक भर्तियां करने की भी मांग की। इसके अलावा स्कूलों में खेल सुविधाओं में सुधार, पाठ्य पुस्तकों की समय पर उपलब्धता और सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
सरकार ने बैठक का दिया लिखित आश्वासन
धरने के दौरान प्रशासन की ओर से शिक्षकों को 9 जून को शिक्षा विभाग के साथ पैनल बैठक और 23 जून को कैबिनेट सब-कमेटी के साथ बैठक का लिखित आश्वासन दिया गया। इसके बाद प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया। रैली में विभिन्न शिक्षक संगठनों और बेरोजगार शिक्षक यूनियनों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया और शिक्षा तथा शिक्षकों से जुड़े मुद्दों का शीघ्र समाधान करने की मांग की।