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Mohali News: बिना एफआईआर एक ही मामले में तीसरी जांच, मोहाली के एसएसपी व डीएसपी ट्रैफिक तलब

Thu, 08 Feb 2024 04:16 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 08 Feb 2024 04:16 AM IST
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Third investigation in the same case without FIR, Mohali's SSP and DSP traffic summoned
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक ही मामले में तीसरी बार जांच की बात सामने आने पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे न्यायालय की अवमानना जैसा बताया है। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि बिना एफआईआर जांच कैसे की गई और सुप्रीम कोर्ट के ललिता कुमारी मामले में जारी निर्देश का पालन क्यों नहीं किया गया। अगली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने मोहाली के एसएसपी और डीएसपी ट्रैफिक को हाजिर रहने का आदेश दिया है।याचिका दाखिल करते हुए सुरेंद्र कुमार ने बताया कि उनका मोहाली में एक प्लॉट को लेकर विवाद चल रहा था। यह मामला डेराबस्सी की अदालत में विचाराधीन है। इसी बीच दूसरे पक्ष ने एसएसपी को इस मामले में आपराधिक शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की थी। मामले की जांच एसपी सिटी को सौंपी गई और उन्होंने इसे सिविल विवाद बताते हुए 17 जनवरी 2022 को रिपोर्ट सौंप दी। इसके बाद दोबारा एक शिकायत दी गई और इस बार शिकायत पर जांच एसपी पीआईबी को सौंप दी गई। जांच के बाद इस बार भी मामले को सिविल बताते हुए बंद करने की रिपोर्ट दे दी गई। दो बार क्लोजर रिपोर्ट के बाद अब तीसरी बार फिर से शिकायत दी गई है और इस बार जांच डीएसपी ट्रैफिक को दी गई है। डीएसपी ट्रैफिक बार-बार याची को अपने कार्यालय बुलाकर परेशान कर रहे हैं।
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याची ने कहा कि जब पहले दो बार जांच हो चुकी है और एफआईआर से वरिष्ठ अधिकारी इन्कार कर चुके हैं तो यह तीसरी जांच कैसे वैध है, जबकि इस बार जांच अधिकारी पूर्व के अधिकारियों से कनिष्ठ है। हाईकोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ललिता कुमारी मामले में स्पष्ट कर चुका है कि बिना एफआईआर जांच नहीं की जानी चाहिए। यदि प्राथमिक जांच जरूरी हो तो यह 15 दिन में पूरी होनी चाहिए और विशेष परिस्थितियों में अधिकतम 6 सप्ताह में होनी चाहिए।
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हाईकोर्ट ने कहा कि मोहाली के मामले से यह स्पष्ट है कि अन्य जिलों में भी एक शिकायत पर कई जांच की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। ऐसे में हाईकोर्ट ने फिलहाल मोहाली के एसएसपी से पूछा है कि मोहाली में ऐसे कितने मामले हैं, जिनमें बिना एफआईआर दर्ज किए जांच की गई है। इन मामलों में शिकायतकर्ता कौन है, किस तारीख को शिकायत मिली और जांच आरंभ कर हुई। इसके साथ ही एक शिकायत में कितनी बार जांच हुई, जांच का परिणाम क्या था और जांच अधिकारी कौन था।
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