{"_id":"60b7ee048ebc3e7517725be7","slug":"there-is-no-cycle-track-in-vip-city-yet-mohali-cyclist-dominated-the-world-backward-in-tricity-mohali-news-pkl4153797146","type":"story","status":"publish","title_hn":"वीआईपी शहर में साइकिल ट्रैक तक नहीं फिर भी दुनिया में छाए मोहाली के साइक्लिस्ट, ट्राइसिटी में पिछड़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वीआईपी शहर में साइकिल ट्रैक तक नहीं फिर भी दुनिया में छाए मोहाली के साइक्लिस्ट, ट्राइसिटी में पिछड़ा
विज्ञापन
मोहाली। जिले के साइक्लिस्ट देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में जाकर साइक्लिंग में देश का नाम रोशन कर रहे हैैं। साथ ही वह साइकिल चलाकर तंदुरुस्ती के साथ पर्यावरण बचाने और स्वच्छता का संदेश भी दे रहे हैं। कोविड काल में अपने इलाके के साइकिल ग्रुप मानवता की सेवा में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।
वीरवार को पूरी दुनिया अंतरराष्ट्रीय विश्व साइकिल दिवस मना रही है, लेकिन इसे बदकिस्मती कहेंगे कि अपने वीआईपी शहर में साइकिल ट्रैक तक बनाया ही नहीं जा सका। जबकि इसे सिंगापुर और दुबई की तर्ज पर बसाने के दावे किए जाते हैं।
मोहाली नगर निगम ने दो बार योजना भी बनाई, लेकिन वह सिर्फ फाइलों में ही है और इससे आगे नहीं बढ़ पा रही है। प्रशासन की इस लापरवाही का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। जबकि चंडीगढ़ में यह योजना कामयाब हो चुकी है और वहां नगर निगम की योजना के तहत बने साइकिल ट्रैक पर लोग साइकिलें दौड़ा रहे हैं। जबकि मोहाली में ट्रैक नहीं होने के कारण कोविड काल में ही कई साइकिल सवार अपनी जान तक गंवा चुके हैं।
विज्ञापन
चंडीगढ़ और पंचकूला के साथ ही मोहाली भी ट्राइसिटी में शामिल है। साइकिल ट्रैक के मामले में मोहाली काफी पीछे रह गया है। पहले गमाडा ने चंडीगढ़ की सीमा फेज-8 से गुरुद्वारा श्री सिंह शहीदां तक साइकिल ट्रैक बनाने की योजना पर काम शुरू किया था, लेकिन किन्हीं कारणोें से यह योजना कामयाब नहीं हो पाई।
इसके बाद नगर निगम ने साल-2019 में साइकिल ट्रैक की योजना बनाई। इस संबंधी सर्वे आदि के बाद निगम ने फेज-11 से इंडस्ट्रियल एरिया फेज-7 तक के इलाके को चुना है क्योंकि इस पर इंडस्ट्रियल एरिया और अन्य संस्थान हैं। इस प्रोजेक्ट पर 2.27 करोड़ रुपये की लागत आनी थी, लेकिन अभी तक यह प्रोजेक्ट अधर में ही है।
इन सड़कों पर होते हैं ज्यादा हादसे
कुछ सड़कें ऐसी हैं, जहां अक्सर साइकिल सवारों के साथ हादसे होते हैं। कई तो अपनी जान तक गंवा चुके हैं। फेज-11 से सेक्टर-66 वाली सड़क, फेज-3/5 की लाइटों से लखनौर रोड, फेज-3ए से मटौर वाली सड़क, सेक्टर-45 से कुंभड़ा वाली सड़क शामिल है। कोरोना काल में साइकिल सवार एक महिला की सेक्टर -70 में हादसे में मौत हो गई थी। उसके दो बच्चे अनाथ हो गए थे। इसी तरह राधा स्वामी चौक पर भी एक मर्सिडीज कार की चपेट में आने से दो साइकिल सवारों की मौत हो चुकी है।
क्या कहते हैं तकनीकी विशेषज्ञ
कई बार अधिकारियों को बता चुके, लेकिन कोई नहीं गंभीर
मोहाली शहर चंडीगढ़ की तर्ज पर बसाया गया है। चंडीगढ़ में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की सख्ती के चलते 95 फीसदी साइकिल ट्रैक बन चुके हैं। वहां साइकिल शेयरिंग प्रोजेक्ट तक चल रहा है। चंडीगढ़ की तरह मोहाली की सड़कें भी 100 फुट चौड़ी हैं। डीटीपी के प्लान में साइकिल ट्रैक शामिल हैं। वह कई बार इस मामले को निगम अधिकारियों के सामने उठा चुके हैं। लेकिन अधिकारियों की ओर से इस काम में गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।
- एनएस कलसी, तकनीकी विशेषज्ञ, गमाडा से सेवानिवृत्त एक्सईएन
आधुनिक शहर में साइकिल ट्रैक न होना विडंबना
साइकिल ट्रैक सड़क का एक जरूरी हिस्सा होता है, जिससे साइक्लिस्ट सुरक्षित होकर साइकिल चला सकें। लेकिन विडंबना है कि मोहाली जैसे अति आधुनिक शहर में यह सुविधा नहीं है। इस चीज पर गंभीरता से सोचने की जरूरत है, जिससे ट्रैक बनाए जाएं और शहर के लोगों को फायदा हो। जिला प्रशासन को अन्य प्रोजेक्टों की तरह यहां भी पहल कदमी करनी होगी। साइकिल ट्रैक हर वर्ग के लिए जरूरी है।
- सुदीप रावत, साइक्लिस्ट
साइकिल ट्रैक बनाने के प्रति गंभीरता दिखानी होगी, इसके कई फायदे
मोहाली शहर अति आधुनिक शहर है, इसलिए शहर में साइकिल ट्रैक की व्यवस्था होनी चाहिए। क्योंकि इसके कई फायदे हैं। एक तो यह है कि जब बढ़िया साइकिल ट्रैक बने होंगे तो साइकिल चलाने के प्रति लोगों का रुझान बढ़ेगा। लोगों की फिटनेस के प्रति रूचि बढ़ेगी और इसके साथ ही लोग पर्यावरण का ख्याल रख पाएंगे। मैं साइकिल चलाने के साथ ही अब तक 800 से अधिक पीपल और बरगद के पेड़ मोहाली, हिमाचल और पंजाब के विभिन्न हिस्सों में लगा चुका हूं। इससे मुझे संतुष्टि मिलती है।
- करमबीर सिंह, साइक्लिस्ट
साइकिल ट्रैक नहीं बनने से बढ़ रहा प्रदूषण
भले ही मोहाली में सड़कें बड़ी अच्छी बनी हैं। लेकिन साइकिल ट्रैक न होने की वजह से कई नुकसान हैं। इसमें एक शहर में प्रदूषण का बढ़ना है। जब इच्छुक लोग वाहन छोड़ साइकिलें चलाएंगे तो इससे प्रदूषण भी नहीं बढ़ेगा। कई जगह हुए हादसों में तो साइकिल सवारों ने अपनी जिंदगी तक खोई है। ऐसे में सरकार को सबका ख्याल रखना चाहिए। मैं खुद मोहाली में साइकिल ट्रैक न होने के कारण साइकिल चलाने के लिए चंडीगढ़ जाता हूं।
- अभिषेक, दिव्यांग साइक्लिस्ट
साइकिल ट्रैक बनने से हल होंगी कई समस्याएं
साइकिल ट्रैक सभी जगह बनाए जाते हैं, ताकि साइकिल सवार भी सुरक्षित तरीके से सफर कर पाएं। हालांकि मोहाली में इस चीज को महत्ता नहीं दी गई। अगर साइकिल ट्रैक अच्छे होंगे तो लोग कारों की अपेक्षा साइकिल पर घर से निकलेंगे। इससे कई फायदे होंगे। प्रदूषण की दिक्कत खत्म होगी, लोग तंदुरुस्त बनेंगे। साथ ही शहर की सड़कों पर वाहनों की वजह से लगने वाले जाम से भी निजात मिलेगी।
- दर्शन सिंह शाही, सेवानिवृत्त एसई बीएंडआर
साइकिल ट्रैक के लिए नए सिरे से करवाएंगे सर्वे
नगर निगम हाउस की पिछली बैठक में जो साइकिल ट्रैक बनाने संबंधी प्रस्ताव बनाया गया था। उसके टेंडर नहीं लगे थे। अब हम नए सिरे से साइकिल ट्रैक का सर्वे करवाने जा रहे हैं। जिन सड़कों पर भी साइकिल ट्रैक बनाए जा सकते हैं, वहां पर इनका निर्माण किया जाएगा। इस संबंधी अधिकारियों को आदेश दिए जा चुके हैं। जल्दी ही आगे की प्रक्रिया की जाएगी।
- कुलजीत सिंह बेदी, डिप्टी मेयर, नगर निगम मोहाली
विज्ञापन
वीरवार को पूरी दुनिया अंतरराष्ट्रीय विश्व साइकिल दिवस मना रही है, लेकिन इसे बदकिस्मती कहेंगे कि अपने वीआईपी शहर में साइकिल ट्रैक तक बनाया ही नहीं जा सका। जबकि इसे सिंगापुर और दुबई की तर्ज पर बसाने के दावे किए जाते हैं।
विज्ञापन
मोहाली नगर निगम ने दो बार योजना भी बनाई, लेकिन वह सिर्फ फाइलों में ही है और इससे आगे नहीं बढ़ पा रही है। प्रशासन की इस लापरवाही का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। जबकि चंडीगढ़ में यह योजना कामयाब हो चुकी है और वहां नगर निगम की योजना के तहत बने साइकिल ट्रैक पर लोग साइकिलें दौड़ा रहे हैं। जबकि मोहाली में ट्रैक नहीं होने के कारण कोविड काल में ही कई साइकिल सवार अपनी जान तक गंवा चुके हैं।
विज्ञापन
चंडीगढ़ और पंचकूला के साथ ही मोहाली भी ट्राइसिटी में शामिल है। साइकिल ट्रैक के मामले में मोहाली काफी पीछे रह गया है। पहले गमाडा ने चंडीगढ़ की सीमा फेज-8 से गुरुद्वारा श्री सिंह शहीदां तक साइकिल ट्रैक बनाने की योजना पर काम शुरू किया था, लेकिन किन्हीं कारणोें से यह योजना कामयाब नहीं हो पाई।
इसके बाद नगर निगम ने साल-2019 में साइकिल ट्रैक की योजना बनाई। इस संबंधी सर्वे आदि के बाद निगम ने फेज-11 से इंडस्ट्रियल एरिया फेज-7 तक के इलाके को चुना है क्योंकि इस पर इंडस्ट्रियल एरिया और अन्य संस्थान हैं। इस प्रोजेक्ट पर 2.27 करोड़ रुपये की लागत आनी थी, लेकिन अभी तक यह प्रोजेक्ट अधर में ही है।
इन सड़कों पर होते हैं ज्यादा हादसे
कुछ सड़कें ऐसी हैं, जहां अक्सर साइकिल सवारों के साथ हादसे होते हैं। कई तो अपनी जान तक गंवा चुके हैं। फेज-11 से सेक्टर-66 वाली सड़क, फेज-3/5 की लाइटों से लखनौर रोड, फेज-3ए से मटौर वाली सड़क, सेक्टर-45 से कुंभड़ा वाली सड़क शामिल है। कोरोना काल में साइकिल सवार एक महिला की सेक्टर -70 में हादसे में मौत हो गई थी। उसके दो बच्चे अनाथ हो गए थे। इसी तरह राधा स्वामी चौक पर भी एक मर्सिडीज कार की चपेट में आने से दो साइकिल सवारों की मौत हो चुकी है।
क्या कहते हैं तकनीकी विशेषज्ञ
कई बार अधिकारियों को बता चुके, लेकिन कोई नहीं गंभीर
मोहाली शहर चंडीगढ़ की तर्ज पर बसाया गया है। चंडीगढ़ में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की सख्ती के चलते 95 फीसदी साइकिल ट्रैक बन चुके हैं। वहां साइकिल शेयरिंग प्रोजेक्ट तक चल रहा है। चंडीगढ़ की तरह मोहाली की सड़कें भी 100 फुट चौड़ी हैं। डीटीपी के प्लान में साइकिल ट्रैक शामिल हैं। वह कई बार इस मामले को निगम अधिकारियों के सामने उठा चुके हैं। लेकिन अधिकारियों की ओर से इस काम में गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।
- एनएस कलसी, तकनीकी विशेषज्ञ, गमाडा से सेवानिवृत्त एक्सईएन
आधुनिक शहर में साइकिल ट्रैक न होना विडंबना
साइकिल ट्रैक सड़क का एक जरूरी हिस्सा होता है, जिससे साइक्लिस्ट सुरक्षित होकर साइकिल चला सकें। लेकिन विडंबना है कि मोहाली जैसे अति आधुनिक शहर में यह सुविधा नहीं है। इस चीज पर गंभीरता से सोचने की जरूरत है, जिससे ट्रैक बनाए जाएं और शहर के लोगों को फायदा हो। जिला प्रशासन को अन्य प्रोजेक्टों की तरह यहां भी पहल कदमी करनी होगी। साइकिल ट्रैक हर वर्ग के लिए जरूरी है।
- सुदीप रावत, साइक्लिस्ट
साइकिल ट्रैक बनाने के प्रति गंभीरता दिखानी होगी, इसके कई फायदे
मोहाली शहर अति आधुनिक शहर है, इसलिए शहर में साइकिल ट्रैक की व्यवस्था होनी चाहिए। क्योंकि इसके कई फायदे हैं। एक तो यह है कि जब बढ़िया साइकिल ट्रैक बने होंगे तो साइकिल चलाने के प्रति लोगों का रुझान बढ़ेगा। लोगों की फिटनेस के प्रति रूचि बढ़ेगी और इसके साथ ही लोग पर्यावरण का ख्याल रख पाएंगे। मैं साइकिल चलाने के साथ ही अब तक 800 से अधिक पीपल और बरगद के पेड़ मोहाली, हिमाचल और पंजाब के विभिन्न हिस्सों में लगा चुका हूं। इससे मुझे संतुष्टि मिलती है।
- करमबीर सिंह, साइक्लिस्ट
साइकिल ट्रैक नहीं बनने से बढ़ रहा प्रदूषण
भले ही मोहाली में सड़कें बड़ी अच्छी बनी हैं। लेकिन साइकिल ट्रैक न होने की वजह से कई नुकसान हैं। इसमें एक शहर में प्रदूषण का बढ़ना है। जब इच्छुक लोग वाहन छोड़ साइकिलें चलाएंगे तो इससे प्रदूषण भी नहीं बढ़ेगा। कई जगह हुए हादसों में तो साइकिल सवारों ने अपनी जिंदगी तक खोई है। ऐसे में सरकार को सबका ख्याल रखना चाहिए। मैं खुद मोहाली में साइकिल ट्रैक न होने के कारण साइकिल चलाने के लिए चंडीगढ़ जाता हूं।
- अभिषेक, दिव्यांग साइक्लिस्ट
साइकिल ट्रैक बनने से हल होंगी कई समस्याएं
साइकिल ट्रैक सभी जगह बनाए जाते हैं, ताकि साइकिल सवार भी सुरक्षित तरीके से सफर कर पाएं। हालांकि मोहाली में इस चीज को महत्ता नहीं दी गई। अगर साइकिल ट्रैक अच्छे होंगे तो लोग कारों की अपेक्षा साइकिल पर घर से निकलेंगे। इससे कई फायदे होंगे। प्रदूषण की दिक्कत खत्म होगी, लोग तंदुरुस्त बनेंगे। साथ ही शहर की सड़कों पर वाहनों की वजह से लगने वाले जाम से भी निजात मिलेगी।
- दर्शन सिंह शाही, सेवानिवृत्त एसई बीएंडआर
साइकिल ट्रैक के लिए नए सिरे से करवाएंगे सर्वे
नगर निगम हाउस की पिछली बैठक में जो साइकिल ट्रैक बनाने संबंधी प्रस्ताव बनाया गया था। उसके टेंडर नहीं लगे थे। अब हम नए सिरे से साइकिल ट्रैक का सर्वे करवाने जा रहे हैं। जिन सड़कों पर भी साइकिल ट्रैक बनाए जा सकते हैं, वहां पर इनका निर्माण किया जाएगा। इस संबंधी अधिकारियों को आदेश दिए जा चुके हैं। जल्दी ही आगे की प्रक्रिया की जाएगी।
- कुलजीत सिंह बेदी, डिप्टी मेयर, नगर निगम मोहाली