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Mohali News: नए सेक्टरों में न पार्षद न सरपंच, परेशान लोग अपनी समस्याएं लेकर कहां जाएं

Mon, 19 Feb 2024 02:33 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 19 Feb 2024 02:33 AM IST
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There is no councilor or sarpanch in the new sectors, where should troubled people go with their problems?
मोहाली। गमाडा और निजी बिल्डरों के अधीन बसाए गए नए सेक्टरों के निवासी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। लेकिन उनकी समस्याओं का हल करने और बुनियादी मुद्दे उठाने के लिए कोई नहीं है, जिनसे वह अपनी गुहार लगाएं। यहां के निवासियों को न पार्षद और न सरपंच को वोट डालने का अधिकार है।
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दस्तावेजों के सत्यापन के लिए लोगों को गजेटेड अफसरों के धक्के खाने पड़ते हैं। निजी क्षेत्र होने के कारण यहां राजनीतिक और सरकारी भी कोई दखल नहीं है। वहीं, बिल्डर तक किसी आम व्यक्ति की पहुंच नहीं हो पाती, इसलिए लोगों की समस्याएं जस की तस बनी रहती हैं। लोग इन क्षेत्रों को नगर निगम या गमाडा के अंदर लाने की मांग कर रहे हैं ताकि समस्याओं के प्रति किसी की तो जवाबदेही हो।
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साल 2006-07 में पंजाब में मेगा हाउसिंग टाउनशिप की नीति के तहत बहुत सारे निजी बिल्डरों ने अपने-अपने प्रोजेक्टों की शुरुआत की थी। हालांकि उस समय जो नीतियां बनाई गईं, वह सभी बिल्डरों के हक में और उपभोक्ता के विरोध में बनी, जो आज तक ज्यों की त्यों चल रही हैं। इस कारण आम लोगों की लूट निरंतर जारी है। इन सेक्टरों के निवासियों की हालत में ग्रामीणों से भी बदतर है। बुनियादी सुविधाएं जैसे बिजली, पानी, सीवरेज और सड़कों को माना जाता है, लेकिन यहां के निवासियों को यह भी नसीब नहीं होता।
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नए सेक्टरों के लोगों की कहीं कोई सुनवाई नहीं

नए सेक्टरों में हजारों की संख्या में लोगों ने अपने घर बनाए हैं। इनसे मेनटेनेंस के नाम पर भारी भरकम शुल्क भी लिया जाता है। लेकिन सुविधाएं नाम मात्र ही हैं, जहां ड्रेनेज लाइन्स, पानी, स्ट्रीट लाइट्स, सड़कें आदि जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। अगर इन समस्याओं की मांग भी उठाई जाए तो कोई उत्तरदायी नहीं है। इतना ही नहीं निजी सेक्टर्स को मोहाली की मेन वाटर सप्लाई लाइन और सीवरेज लाइन से भी नहीं जोड़ा जा रहा, जिस वजह से लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। ज्यादातर इलाकों में तो सीवरेज के लिए बनाए एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) काम नहीं तक नहीं कर रहे।

स्वास्थ्य और खेल सुविधाओं का अभाव
इन नए सेक्टरों में बड़े-बड़े निजी अस्पताल हैं, जो मामूली जांच की भी मोटी रकम वसूलते हैं। आम आदमी सरकार हर गली-मोहल्ले में आम आदमी क्लीनिक बनाने का दावा कर रही है, लेकिन इन इलाकों में सरकारी डिस्पेंसरी तक नहीं है। किसी भी इलाके के आठ किलोमीटर के दायरे में कोई स्पोर्ट्स स्टेडियम तक नहीं है। अकेले एम्मार सेक्टर-108 की आबादी आज करीब पांच हजार है, लेकिन आने वाले दो साल में 20 हजार होने का अनुमान है। लोग अपने बच्चों का अच्छा भविष्य बनाने की चाहत में आज यहां महंगे भाव में जमीन खरीद रहे हैं। मगर जिस तरह के यहां हालात हैं भविष्य को लेकर लोग चिंतित हैं। ऐसा ही हाल एम्मार सेक्टर-98, 99, 104 ,105,106, टीडीआई, आंसल सेक्टर-114, सेक्टर-110, 111 आदि इलाकों के हैं।


लगातार कम हो रहा भूजल स्तर

शहर में लगातार बड़ी-बड़ी इमारतों के निर्माण पर निर्माण किए जा रहे हैं, लेकिन संसाधनों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। आए दिन किसी न किसी इलाके में जल आपूर्ति की समस्या सामने आती है। जल विभाग भी चेतावनी दे चुका है कि भूजल स्तर लगातार कम होता जा रहा है। आने वाले समय में भयंकर स्थिति देखने को मिलेगी। इन क्षेत्रों के लिए नहरी जल आपूर्ति का कोई प्रस्ताव नहीं है क्योंकि जल स्तर में कमी के कारण 20 वर्षों के बाद भूजल उपलब्ध नहीं होगा। लोगों का आरोप है बिल्डर और गमाडा के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से उनके काम को मंजूरी दे दी जाती है। बिल्डरों की ओर से मनमर्जी की प्रॉपर्टी ट्रांसफर फीस से ली जाती है। इससे सरकार के राजस्व का नुकसान हो रहा है। यहां तक कि लोगों से कॉमन एरिया मेंटेनेंस चार्ज भी लिए जा रहे हैं, उसमें बिना किसी रोक के हर साल बढ़ोतरी की जा रही है।
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