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कारगिल पार्क से युवा पीढी में जगाई जा रही है देश भक्ति की अलख

Tue, 26 Jul 2022 02:09 AM IST
Mohali Bureau मोहाली ब्‍यूरो
Updated Tue, 26 Jul 2022 02:09 AM IST
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The spirit of patriotism is being awakened in the younger generation from Kargil Park
मोहाली। भले ही अपना शहर दुबई और सिंगापुर की तर्ज पर सरकार द्वारा बसाया गया है लेकिन फिर भी युवा पीढ़ी में देशभक्ति की अलख जगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। एक तरफ जहां कारगिल युद्ध में देश की रक्षा करते हुए जान न्योछावर करने वाले वीर सपूतों की याद में कारगिल पार्क स्थापित है, वहीं दूसरी तरफ कारगिल युद्ध में दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाला मिग-21 भी शहर की शान है। इसके अलावा कई सड़कों और पार्कों के नाम शहीदों के नाम पर है।
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इलाके के सबसे प्राइम सेक्टरों में शुमार सेक्टर -71 में कारगिल शहीदों की याद में कारगिल पार्क बनाया गया है। जोकि कारगिल विजय के रूप में बनाया गया है। पार्क में युवाओं को तंदुरुस्त बनाने के लिए ओपन एयर जिम भी स्थापित किया गया। इसके अलावा मेडिटेशन हट का भी प्रबंध है। इस एरिया की विशेषता यह है कि यहां अधिकतर घर सेना से रिटायर अफसरों के हैं। ऐसे में अकसर युवा इस पार्क में आते रहते हैं। एक्स सर्विसमैन ग्रीवासेंस सेल के प्रधान रिटायर कर्नल एसएस सोही बताते हैं कि कारगिल पार्क युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्त्रोत है। उन्होंने कहा कि जब युवा इस पार्क में आएंगे तो वह किसी बहाने अपनी सेना से जुड़ेंगे। उनके अंदर अपनी सेना और देश के प्रति प्यार जागेगा।
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कारगिल का हीरो मिग-21 सेना के भावी अफसरों में भर रहा है जोश
देश सबसे ऊंचे रणक्षेत्र में दुश्मन के छक्के छुड़ाने वाली भारतीय वायुसेना की 17-स्क्वाड्रन गोल्डन ऐरो का फाइटर प्लेन ‘मिग-21’ (त्रिशूल) भी शहर की शान बढ़ा रहा है। इतना ही नहीं यह लड़ाकू विमान अब सेना के तीनों अंगों के लिए तैयार होने वाले अफसरों के अंदर देशभक्ति की भावना व जोश भरने काम काम करता है। इसे महाराजा रणजीत सिंह आर्म्ड फोर्सेज प्रिपेटरी इंस्टीट्यूट परिसर में स्थापित किया गया है। कारगिल युद्ध के दौरान बठिंडा में तैनात वायुसेना की 17-स्क्वाड्रन गोल्डन ऐरो को दुश्मन से लोहा लेने का जिम्मा सौंपा गया था। वायुसेना के 300 जांबाज पायलट 20 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरते थे। कारगिल युद्ध 18 हजार फीट की ऊंचाई पर लड़ा गया था। ‘मिग-21’ विमान में 20 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरना पायलट के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। विमान उसके लिए ताबूत बन सकता है। इसके बावजूद भारतीय वायुसेना के जांबाज पायलटों ने इसकी परवाह न करते हुए दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दिया था।
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