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Mohali News: एनडीपीएस मामले के आरोपी को 10 साल कैद व 1 लाख रुपये जुर्माना
Sun, 28 Jan 2024 07:15 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली
संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली
Updated Sun, 28 Jan 2024 07:15 PM IST
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आरोपी जालंधर में भी दो मामलों में शामिल, उदारता नहीं दिखाई जा सकती : अदालत
संवाद न्यूज एजेंसी।
मोहाली। एनडीपीएस के मामले में नामजद आरोपी को मोहाली कोर्ट ने 10 साल कैद व एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। 30 वर्षीय आरोपी डिंपल कुमार निवासी गराह जालंधर को वर्ष 2019 में लालडू पुलिस ने 220 पत्ते नशे की गोलियों के साथ गिरफ्तार किया था। मामले में आरोपी डिंपल के खिलाफ लालडू थाने में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था।
यह मामला मोहाली अदालत में विचाराधीन था। अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि आरोपी जालंधर में भी कम से कम दो अन्य संदिग्ध मामलों में नामजद है और सजा में उदारता नहीं दिखाई जा सकती है। अदालत ने कहा कि स्पैस्मो-प्रॉक्सीवॉन प्लस कैप्सूल के 220 स्ट्रिप्स की वसूली को ध्यान में रखते हुए कुल वजन 3.252 किलो, जिसमें नमक ट्रामडोल होता है, जो वाणिज्यिक मात्रा और एंटीकेडेंट्स के अंतर्गत आता है। इसमें दोषी को दस साल के लिए कठोर कारावास से गुजरने की सजा सुनाई जाती है और एक लाख रुपये जुर्माना किया जाता है। अगर आरोपी जुर्माना नहीं भरता तो एक साल की और सजा काटनी पड़ेगी।
आरोपी के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि एसआई हरजिंदर सिंह से पूछताछ की गई, जिन्होंने सैंपल पार्सल पर यूनिक कोड डाला था। याचिकाकर्ता का बयान सीआरपीसी की धारा 313 के तहत दर्ज किया गया, जिसके तहत उसे अपने खिलाफ आने वाली सभी आपत्तिजनक परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उसने अपने खिलाफ लगाए सभी आरोपों से इन्कार किया और दलील दी कि उसे मामले में झूठा फंसाया गया है। उसके पास से कुछ भी बरामद नहीं हुआ। उन्होंने अदालत को बताया कि अभियोजन साक्ष्य में बड़ी विसंगतियां और विरोधाभास है।
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कथित बरामदगी के समय पुलिस की ओर से कोई स्वतंत्र गवाह शामिल नहीं किया गया। रासायनिक परीक्षक को नमूने भेजने में देरी हुई है और कानून के विभिन्न प्रावधानों का अनुपालन नहीं किया गया है। आरोपी को एनडीपीएस एक्ट की धारा 50 के तहत नोटिस नहीं दिया गया है। अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ मामला साबित करने में विफल रहा है और लगाए आरोपों से बरी किया जाना चाहिए। वहीं सरकारी वकील ने इसका विरोध करते हुए अदालत में तर्क दिया कि आरोपी के खिलाफ पहले भी जालंधर में दो अन्य मामले दर्ज हैं। एसआई गुरबचन सिंह जांच अधिकारी ने दर्ज एफआईआर की तर्ज पर गवाही दी। अदालत को बताया कि आरोपी से कॉमर्शियल मात्रा में नशे की गोलियां बरामद हुईं, जिसके तहत एनडीपीएस एक्ट की धारा 50 के तहत नोटिस देने की जरूरत नहीं होती। आरोपी सजा का हकदार है और उसे इसमें किसी तरह की रियायत नहीं मिलनी चाहिए।
यह है मामला
29 जनवरी 2019 को एएसआई नरपिंदर पाल सिंह पुलिस पार्टी के साथ लहली चौक के पास मौजूद थे। रात करीब सवा 9 बजे पुलिस कारों की जांच कर रही थी। इसी दौरान आरोपी ऑटोरिक्शा से उतरा और पिठू बैग के साथ भागने की कोशिश की। हालांकि, पुलिस अधिकारियों की मदद से उसे पकड़ लिया गया। उसके द्वारा ले जाए गए पिट्ठू बैग की जांच की गई, जिसमें नशीले कैप्सूल की 220 पत्ते बरामद हुए। नशे की गोलियों के बैच नंबर भी नोट किए। इसके बाद एसआई गुरबचन सिंह को बुलाया गया, जिन्होंने जांच की। पुलिस स्टेशन लौटने पर आरोपी को इंस्पेक्टर दलबीर सिंह के सामने पेश किया गया, जिन्होंने केस प्रॉपर्टी पर मोहर भी लगाई। अगले दिन आरोपी को एसआई गुरबचन सिंह ने इलाका मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जिन्होंने प्रत्येक पार्सल की 2 पट्टियों के नमूने लिए और फॉर्म नंबर -29 भी तैयार किया। नमूने रासायनिक परीक्षक को भेजे और रिपोर्ट में ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड पाया गया। इसके बाद केस दर्ज किया गया।
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संवाद न्यूज एजेंसी।
मोहाली। एनडीपीएस के मामले में नामजद आरोपी को मोहाली कोर्ट ने 10 साल कैद व एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। 30 वर्षीय आरोपी डिंपल कुमार निवासी गराह जालंधर को वर्ष 2019 में लालडू पुलिस ने 220 पत्ते नशे की गोलियों के साथ गिरफ्तार किया था। मामले में आरोपी डिंपल के खिलाफ लालडू थाने में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था।
यह मामला मोहाली अदालत में विचाराधीन था। अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि आरोपी जालंधर में भी कम से कम दो अन्य संदिग्ध मामलों में नामजद है और सजा में उदारता नहीं दिखाई जा सकती है। अदालत ने कहा कि स्पैस्मो-प्रॉक्सीवॉन प्लस कैप्सूल के 220 स्ट्रिप्स की वसूली को ध्यान में रखते हुए कुल वजन 3.252 किलो, जिसमें नमक ट्रामडोल होता है, जो वाणिज्यिक मात्रा और एंटीकेडेंट्स के अंतर्गत आता है। इसमें दोषी को दस साल के लिए कठोर कारावास से गुजरने की सजा सुनाई जाती है और एक लाख रुपये जुर्माना किया जाता है। अगर आरोपी जुर्माना नहीं भरता तो एक साल की और सजा काटनी पड़ेगी।
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आरोपी के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि एसआई हरजिंदर सिंह से पूछताछ की गई, जिन्होंने सैंपल पार्सल पर यूनिक कोड डाला था। याचिकाकर्ता का बयान सीआरपीसी की धारा 313 के तहत दर्ज किया गया, जिसके तहत उसे अपने खिलाफ आने वाली सभी आपत्तिजनक परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उसने अपने खिलाफ लगाए सभी आरोपों से इन्कार किया और दलील दी कि उसे मामले में झूठा फंसाया गया है। उसके पास से कुछ भी बरामद नहीं हुआ। उन्होंने अदालत को बताया कि अभियोजन साक्ष्य में बड़ी विसंगतियां और विरोधाभास है।
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कथित बरामदगी के समय पुलिस की ओर से कोई स्वतंत्र गवाह शामिल नहीं किया गया। रासायनिक परीक्षक को नमूने भेजने में देरी हुई है और कानून के विभिन्न प्रावधानों का अनुपालन नहीं किया गया है। आरोपी को एनडीपीएस एक्ट की धारा 50 के तहत नोटिस नहीं दिया गया है। अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ मामला साबित करने में विफल रहा है और लगाए आरोपों से बरी किया जाना चाहिए। वहीं सरकारी वकील ने इसका विरोध करते हुए अदालत में तर्क दिया कि आरोपी के खिलाफ पहले भी जालंधर में दो अन्य मामले दर्ज हैं। एसआई गुरबचन सिंह जांच अधिकारी ने दर्ज एफआईआर की तर्ज पर गवाही दी। अदालत को बताया कि आरोपी से कॉमर्शियल मात्रा में नशे की गोलियां बरामद हुईं, जिसके तहत एनडीपीएस एक्ट की धारा 50 के तहत नोटिस देने की जरूरत नहीं होती। आरोपी सजा का हकदार है और उसे इसमें किसी तरह की रियायत नहीं मिलनी चाहिए।
यह है मामला
29 जनवरी 2019 को एएसआई नरपिंदर पाल सिंह पुलिस पार्टी के साथ लहली चौक के पास मौजूद थे। रात करीब सवा 9 बजे पुलिस कारों की जांच कर रही थी। इसी दौरान आरोपी ऑटोरिक्शा से उतरा और पिठू बैग के साथ भागने की कोशिश की। हालांकि, पुलिस अधिकारियों की मदद से उसे पकड़ लिया गया। उसके द्वारा ले जाए गए पिट्ठू बैग की जांच की गई, जिसमें नशीले कैप्सूल की 220 पत्ते बरामद हुए। नशे की गोलियों के बैच नंबर भी नोट किए। इसके बाद एसआई गुरबचन सिंह को बुलाया गया, जिन्होंने जांच की। पुलिस स्टेशन लौटने पर आरोपी को इंस्पेक्टर दलबीर सिंह के सामने पेश किया गया, जिन्होंने केस प्रॉपर्टी पर मोहर भी लगाई। अगले दिन आरोपी को एसआई गुरबचन सिंह ने इलाका मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जिन्होंने प्रत्येक पार्सल की 2 पट्टियों के नमूने लिए और फॉर्म नंबर -29 भी तैयार किया। नमूने रासायनिक परीक्षक को भेजे और रिपोर्ट में ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड पाया गया। इसके बाद केस दर्ज किया गया।