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Mohali News: उद्घाटन से पहले ही नया पीडियाट्रिक वार्ड बीमार
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मोहाली। फेज-6 स्थित एम्स की मदर एंड चाइल्ड बिल्डिंग में 52 बेड का नया पीडियाट्रिक वार्ड लगभग तैयार हो चुका है, जिसे बच्चों के इलाज के लिए वन-रूफ समाधान के तौर पर देखा जा रहा है। इस वार्ड की उद्घाटन से पहले ही सेहत बिगड़ती नजर आ रही है। अस्पताल प्रशासन 14 नवंबर तक इस नए वार्ड का उद्घाटन करने की पूरी कोशिश में है, वहीं निर्माण पूरा होने के बावजूद इसकी छत में सीलन और नमी की गंभीर समस्या सामने आ रही है। वार्ड के एक कमरे में दो स्थानों पर छत पर स्पष्ट रूप से सीलन और काई जम गई है, इससे छत में गलन (सड़ने की प्रक्रिया) शुरू हो गई है। जहां एक तरफ मरीज बेड की कमी से जूझ रहे हैं वहीं दूसरी तरफ नया वार्ड निर्माण की खामियों के कारण अटका पड़ा है। उद्घाटन के लिए लगातार तारीख पर तारीख मिल रही है, जिससे स्टाफ और मरीजों का इंतजार बढ़ता जा रहा है।
स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए खतरा
नए पीडियाट्रिक वार्ड की छत में सीलन और नमी लंबे समय तक बनी रहने से दीवारों और पैनल कमजोर हो सकते हैं। पानी का रिसाव शुरू हो सकता है। नमी, काई और बैक्टीरिया के पनपने का कारण बनती है। इससे बच्चों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। रिसाव से मेडिकल उपकरणों को जहां नुकसान हो सकता है, वहीं इलाज में बाधा भी हो सकती है। ऐसे में सफाई बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा।
बेड की कमी से जूझ रहा मौजूदा वार्ड
नए 52 बेड वाले वार्ड की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी, क्योंकि अस्पताल का मौजूदा पीडियाट्रिक वार्ड बच्चों के भार को संभाल नहीं पा रहा है। वर्तमान में बच्चों के लिए पहली और दूसरी मंजिल पर कुल 40 बेड (22 और 18) हैं। इन वार्डों में बच्चों के साथ-साथ एडल्ट बेड भी है, जो इन्फेक्शन फैलने के जोखिम को बढ़ाता है।
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हालत बदतर : एक बेड पर दो-दो मासूम
पीडियाट्रिक ओपीडी में हर दिन 150 से 200 बच्चों का इलाज होता है। इनमें औसतन 5 से 6 बच्चों को हर दिन इमरजेंसी में भर्ती करना पड़ता है। बेड की संख्या कम होने के कारण मौजूदा वार्ड में हालात बद से बदतर हैं। कई बार स्थिति यह होती है कि गंभीर रूप से बीमार एक बेड पर दो-दो मासूमों को लेटाकर इलाज करना पड़ता है, जो बच्चों के स्वास्थ्य और उनके माता-पिता की पीड़ा को और बढ़ा देता है।
अभी काम चल रहा है, ठेकेदार को कहा गया है कि जो भी कमियां रह गई हैं, उन्हें जल्द से जल्द ठीक किया जाए। पूरी कोशिश है कि 14 नवंबर तक नया पीडियाट्रिक वार्ड का उद्घाटन हो जाए। - डॉ. भवनीत भारती, डायरेक्टर प्रिंसिपल,एम्स मोहाली
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स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए खतरा
नए पीडियाट्रिक वार्ड की छत में सीलन और नमी लंबे समय तक बनी रहने से दीवारों और पैनल कमजोर हो सकते हैं। पानी का रिसाव शुरू हो सकता है। नमी, काई और बैक्टीरिया के पनपने का कारण बनती है। इससे बच्चों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। रिसाव से मेडिकल उपकरणों को जहां नुकसान हो सकता है, वहीं इलाज में बाधा भी हो सकती है। ऐसे में सफाई बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा।
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बेड की कमी से जूझ रहा मौजूदा वार्ड
नए 52 बेड वाले वार्ड की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी, क्योंकि अस्पताल का मौजूदा पीडियाट्रिक वार्ड बच्चों के भार को संभाल नहीं पा रहा है। वर्तमान में बच्चों के लिए पहली और दूसरी मंजिल पर कुल 40 बेड (22 और 18) हैं। इन वार्डों में बच्चों के साथ-साथ एडल्ट बेड भी है, जो इन्फेक्शन फैलने के जोखिम को बढ़ाता है।
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हालत बदतर : एक बेड पर दो-दो मासूम
पीडियाट्रिक ओपीडी में हर दिन 150 से 200 बच्चों का इलाज होता है। इनमें औसतन 5 से 6 बच्चों को हर दिन इमरजेंसी में भर्ती करना पड़ता है। बेड की संख्या कम होने के कारण मौजूदा वार्ड में हालात बद से बदतर हैं। कई बार स्थिति यह होती है कि गंभीर रूप से बीमार एक बेड पर दो-दो मासूमों को लेटाकर इलाज करना पड़ता है, जो बच्चों के स्वास्थ्य और उनके माता-पिता की पीड़ा को और बढ़ा देता है।
अभी काम चल रहा है, ठेकेदार को कहा गया है कि जो भी कमियां रह गई हैं, उन्हें जल्द से जल्द ठीक किया जाए। पूरी कोशिश है कि 14 नवंबर तक नया पीडियाट्रिक वार्ड का उद्घाटन हो जाए। - डॉ. भवनीत भारती, डायरेक्टर प्रिंसिपल,एम्स मोहाली