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जिस चौराहे ने किसानी संघर्ष को दी ताकत, उसका नाम रखा किसान चौक
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मोहाली। केंद्र सरकार की ओर से पारित किए गए कृषि के तीन नए कानूनों के खिलाफ जहां दिल्ली की सीमाओं पर किसान और उनके समर्थक कई महीनों तक किसान आंदोलन में डटे हुए थे। वहीं, शापिंग स्ट्रीट स्थित फेज-3/5 के लाइट प्वाइंट पर भी रोजाना रात को उद्योपति, आम लोग और छात्रों के साथ किसान समर्थक खड़े होकर किसानों के हक में आवाज उठाते थे। यह सिलसिला जब तक कृषि के नए तीन कानून केेंद्र की ओर से वापस नहीं ले लिए गए तब तक एक साल चला। जैसे ही केंद्र सरकार ने उक्त कानून वापस लिए, उससे किसानों और आम लोगों में खुशी की लहर है। वहीं, अब इस संघर्ष को याद रखने के लिए फेज-3/5 के लाइट प्वाइंट को किसान चौक का नाम दे दिया गया है। इस संबंधी वहां पर पंजाबी में लिख दिया गया है। साथ ही किसान संघर्ष को दर्शाती तस्वीर भी प्रदर्शित की गई है, जिससे लोग काफी उत्साहित हैं।
जानकारी के मुताबिक इस चौक का नाम किसान चौक रखने के पीछे लोगों का तर्क यहीं है कि यहां से उन्होंने किसानों के पक्ष में आवाज उठाई थी। इस स्थान की खास अहमियत है। क्योंकि संघर्ष के समय जब किसानों के प्रति गलत प्रचार किया जा रहा था। उस समय उक्त स्थान से लोगों के अज्ञानता को दूर किया गया। इस काम को संघर्ष में जुटे लोगों ने सहमति दे दी है और लोगों का कहना है कि जब चंडीगढ़ में किसान चौक हो सकता है, तो मोहाली में किसान चौक क्यों नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को किसानों से रूबरू करवाने के लिए यह चौक एक मील का पत्थर साबित होगा।
इस मौके पर मोहाली इंडस्ट्री एसोसिएशन के कुछ सदस्यों की ओर से संघर्ष के दौरान रोजाना वहां पर खडे़ होने वाले समर्थकों को ट्रॉफी और सिरोपा देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उद्योगपति इकबाल सिंह, जगदीप सिंह, दिलप्रीत सिंह बोपाराय, एडवोकेट जीएस कोड़ा और अन्य मौजूद थे।
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जानकारी के मुताबिक इस चौक का नाम किसान चौक रखने के पीछे लोगों का तर्क यहीं है कि यहां से उन्होंने किसानों के पक्ष में आवाज उठाई थी। इस स्थान की खास अहमियत है। क्योंकि संघर्ष के समय जब किसानों के प्रति गलत प्रचार किया जा रहा था। उस समय उक्त स्थान से लोगों के अज्ञानता को दूर किया गया। इस काम को संघर्ष में जुटे लोगों ने सहमति दे दी है और लोगों का कहना है कि जब चंडीगढ़ में किसान चौक हो सकता है, तो मोहाली में किसान चौक क्यों नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को किसानों से रूबरू करवाने के लिए यह चौक एक मील का पत्थर साबित होगा।
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इस मौके पर मोहाली इंडस्ट्री एसोसिएशन के कुछ सदस्यों की ओर से संघर्ष के दौरान रोजाना वहां पर खडे़ होने वाले समर्थकों को ट्रॉफी और सिरोपा देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उद्योगपति इकबाल सिंह, जगदीप सिंह, दिलप्रीत सिंह बोपाराय, एडवोकेट जीएस कोड़ा और अन्य मौजूद थे।
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