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सुषमा ग्रांडे सोसाइटी निवासियों ने बिल्डर के खिलाफ की नारेबाजी
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जीरकपुर। चंडीगढ़-अंबाला हाईवे पर मौजूद सुषमा ग्रांडे सोसाइटी के लोगों ने अपने ही घर के अंदर न जाने देने के विरोध में गेट पर इकट्ठेे होकर हंगामा किया और बिल्डर के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची तो दोनों पार्टियों को थाने बुलाया गया। वहीं, मामला हल न होने तक किसी को भी घर जाने से न रोकने के निर्देश दिए गए।
सोसाइटी निवासी जगमीत सिंह, प्रभजोत सिंह, तरनजीत सिंह, अशवनी, अनुराग, पुनीत सरीन, विजय आंनद ने बताया कि बिल्डर के कहने पर मरम्मत स्टाफ व सिक्योरिटी गार्ड्स उनके साथ धक्का कर रहे हैं। उनको अपने घर नहीं जाने दिया जा रहा है। गेट बंद कर उनकी गाड़ी पर लगे स्टीकर रद्द कर जबरदस्ती नए स्टीकर लेने के लिए बोला जा रहा है। लोगों का कहना है कि उन्होंने 2 साल की एडवांस मेंटेनेंस दे रखी है, लेकिन फिर से दो साल का एडवांस मांग रहे हैं। इसके साथ ही बिल्डर का स्टाफ जान बूझकर उन्हें परेशान कर रहा है। कभी उनकी लाइट काट दी जाती है कभी पानी काट दिया जाता है और कभी उनको गेट पर ही रोक कर जलील किया जाता है।
कोट...
सोसाइटी वालों को नहीं रोक रहे हम तो केवल मेंटेनेंस फंड मांग रहे हैं। सोसाइटी के 80 से 90 प्रतिशत लोग इससे सहमत हैं। यह कुछ लोग हैं जो जानबूझकर परेशान कर रहे हैं। यदि लोग हर महीने भुगतान करना चाहते हैं तो उसके रेट अलग हैं। दो साल का एडवांस भुगतान किया जाता है तो वह उनको सस्ता पड़ेगा। अगर वह सभी सहमति जताते हैं तो हमें कोई समस्या नहीं है।
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-प्रतीक मित्तल, डायरेक्टर, सुषमा बिल्डर
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सोसाइटी निवासी जगमीत सिंह, प्रभजोत सिंह, तरनजीत सिंह, अशवनी, अनुराग, पुनीत सरीन, विजय आंनद ने बताया कि बिल्डर के कहने पर मरम्मत स्टाफ व सिक्योरिटी गार्ड्स उनके साथ धक्का कर रहे हैं। उनको अपने घर नहीं जाने दिया जा रहा है। गेट बंद कर उनकी गाड़ी पर लगे स्टीकर रद्द कर जबरदस्ती नए स्टीकर लेने के लिए बोला जा रहा है। लोगों का कहना है कि उन्होंने 2 साल की एडवांस मेंटेनेंस दे रखी है, लेकिन फिर से दो साल का एडवांस मांग रहे हैं। इसके साथ ही बिल्डर का स्टाफ जान बूझकर उन्हें परेशान कर रहा है। कभी उनकी लाइट काट दी जाती है कभी पानी काट दिया जाता है और कभी उनको गेट पर ही रोक कर जलील किया जाता है।
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कोट...
सोसाइटी वालों को नहीं रोक रहे हम तो केवल मेंटेनेंस फंड मांग रहे हैं। सोसाइटी के 80 से 90 प्रतिशत लोग इससे सहमत हैं। यह कुछ लोग हैं जो जानबूझकर परेशान कर रहे हैं। यदि लोग हर महीने भुगतान करना चाहते हैं तो उसके रेट अलग हैं। दो साल का एडवांस भुगतान किया जाता है तो वह उनको सस्ता पड़ेगा। अगर वह सभी सहमति जताते हैं तो हमें कोई समस्या नहीं है।
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-प्रतीक मित्तल, डायरेक्टर, सुषमा बिल्डर