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मोहाली निगम को नहीं आते पशु पकड़ने

Wed, 11 Sep 2019 01:48 AM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Wed, 11 Sep 2019 01:48 AM IST
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street cattle problem in mohali
मोहाली। भले ही मोहाली नगर निगम शहर को चार साल से कैटल फ्री करने के दावे करता आ रहा है लेकिन अभी तक यह बात असल रूप में सच नही हो पाई है। वहीं, अब नगर निगम के पार्षद ही खुद आरोप लगा रहे है कि नगर निगम के मुलाजिमों को पशु तक पकड़ने नहीं आते हैं। इसके चलते लावारिस पशु सड़कों पर घूम रहे हैं व लोगों के लिए मुसीबत बन रहे है।
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जानकारी के मुताबिक मोहाली शहर के अंदर छह के करीब गांव आते हैं। इनमें मोहाली गांव, शाहीमाजरा, सोहाना, कुंभड़ा, मटौर और मदपनुपर शामिल हैं। इन गांवों में ही लोगों ने पशु रखे हुए हैं। लोग दूध लेने के बाद पशुओं को खुले में छोड़ देते हैं। इसके बाद पशु सड़कों पर मुंह मारते हैं। अब यह समस्या काफी गंभीर हो गई है। मंगलवार को नगर निगम के हाउस की मीटिंग में भी यह मुद्दा गंभीरता से उठा। अधिकतर पार्षदों ने लावारिस पशुओं पर नकेल कसने की मांग की ताकि लोगों को लावारिस पशुओं से राहत मिल पाए। वहीं, मोहाली कैटल फ्री बन पाए। बता दें कि अमर उजाला द्वारा भी लावारिस पशुओं के मामले को गंभीरता से उठाया जा रहा है।
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रस्सा घुमाकर फेंकते ही पशु भाग गए
पार्षद हरपाल सिंह चन्ना ने हाउस की मीटिंग में कुछ दिन पहले की एक घटना का जिक्र किया।उन्होंने बताया कि नगर निगम के एक अधिकारी कार में जा रहे थे। जब उन्होंने सड़कों पर पशुुुओं का झुंड देखा तो इस बारे में निगम की टीम को फोन किया। मौके पर टीम आई। इस दौरान एक गुरुद्वारा साहिब के बाहर लावारिस पशुओं को एक पाठी खाना खिला रहा था लेकिन इस दौरान टीम ने उन्हें नहीं पकड़ा। वहीं तब ऐसे रस्सा घुमाकर फेंका कि पशु वहां से भाग गए। इससे साफ है कि नगर निगम के मुलाजिम को पशु पकड़ने नहीं आते हैं।
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क्या कहना है लोगों का
विकास उप्पल निवासी फेज-पांच ने कहा कि नगर निगम का स्टाफ पशु पकड़ने को लेकर गंभीर नहीं है। बलौँगी से कुंभड़ा जाने वाली सड़क पर हर समय पशुओ के झुंड बैठे रहते हैँ। जबकि यह एरिया गऊशाला के बिल्कुल पास है। इसके बाद भी नगर निगम के स्टाफ द्वारा पशु नहीं पकड़े जाते है।
इकबाल सिंह निवासी सेक्टर-71 का कहना है कि लावारिस पशुओं की समस्या मोहाली में ही नहीं बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी है। ऐसे में नगर निगम को ऐसे राज्यों से सीख लेनी होगी, जिन्होंने खुद को कैटल फ्री घोषित किया। इसके अलावा अपने स्टाफ को भी बकायदा ट्रेनिंग दिलानी चाहिए।

अजीत डोगरा का कहना है कि लावारिस पशुओं को पकड़ने वाली टीम पूरी तरह से ट्रेंड होनी चाहिए। इसके अलावा निगम को अति आधुनिक वाहन लेने चाहिए। ताकि इस समस्या से निपटा जा सके।
नोट -- यह अमर उजाला सीरीज शहर चाहे पशुओं से मुक्ति की दूसरी कडी है। लोगों व फोटो के साथ मुहिम को आगे बढ़ाया जाए
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