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Mohali News: तेल टैंकर का बीमा क्लेम खारिज करना एसबीआई जनरल को पड़ा महंगा

Sat, 06 Jun 2026 12:49 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 06 Jun 2026 12:49 AM IST
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SBI General's rejection of oil tanker insurance claim proved costly
मोहाली। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग मोहाली ने एक फैसले में एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को तेल टैंकर के बीमा क्लेम के मामले में शिकायतकर्ता के पक्ष में 6,07,213 रुपये छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करने के आदेश दिए हैं। आयोग ने कंपनी द्वारा क्लेम खारिज करने को सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार माना है। साथ ही 30 हजार रुपये मुआवजा देने के भी निर्देश दिए हैं।
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खरड़ स्थित जय किसान फिलिंग स्टेशन के साझेदार नरेंद्र सिंह ने आयोग में दायर शिकायत में बताया कि उनका टाटा अल्ट्रा ऑयल टैंकर एसबीआई जनरल से 63,452 रुपये प्रीमियम देकर बीमित कराया गया था। यह पॉलिसी पॉलिसी बाजार के माध्यम से खरीदी गई थी। पॉलिसी जारी होने के बाद उन्होंने पाया कि वाहन को ऑयल टैंकर की जगह बॉक्स ट्रक दर्ज किया गया है। इस संबंध में बीमा कंपनी के अधिकारियों से संपर्क करने पर उन्हें भरोसा दिलाया गया कि वाहन पूरी तरह बीमा सुरक्षा के दायरे में है।
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18 नवंबर 2024 को संगरूर के पास हुए सड़क हादसे में टैंकर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया। वाहन की मरम्मत पर 8.28 लाख रुपये से अधिक खर्च आया। बीमा कंपनी ने सर्वेयर नियुक्त कर नुकसान का आकलन कराया, लेकिन बाद में यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि प्रस्ताव फॉर्म में वाहन को गैर-खतरनाक सामान ढोने वाला बताया गया था, जबकि वास्तव में यह तेल टैंकर था।
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बीमा कंपनी ने अपने बचाव में कहा कि शिकायतकर्ता व्यावसायिक गतिविधि से जुड़ा है, इसलिए वह उपभोक्ता की श्रेणी में नहीं आता। साथ ही वाहन संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने का आरोप भी लगाया गया। हालांकि आयोग के अध्यक्ष एसके अग्रवाल और सदस्य परमजीत कौर और लेफ्टिनेंट कर्नल जसबीर सिंह बाथ ने इन दलीलों को खारिज कर दिया।


आयोग ने कहा कि वाहन के पंजीकरण दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से उसे ऑयल टैंकर दर्शाया गया था। कंपनी ने प्रीमियम लेने के बाद पॉलिसी जारी की और दुर्घटना के बाद सर्वे भी कराया। ऐसे में तकनीकी आधार पर क्लेम अस्वीकार करना उचित नहीं था। आयोग ने सर्वेयर द्वारा निर्धारित 6,07,213 रुपये की देनदारी को स्वीकार करते हुए 26 दिसंबर 2024 से भुगतान तक छह प्रतिशत ब्याज देने का आदेश दिया है। मामले में पॉलिसी बाजार को नोटिस के बावजूद उपस्थित न होने पर एकपक्षीय घोषित कर दिया गया।
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