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Mohali News: जीरकपुर में आतंक, सरकार लेती है काउ सेस, झुंड में घूमते हैं गोवंश

Fri, 10 Oct 2025 02:04 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 10 Oct 2025 02:04 AM IST
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Powercom employees held a rally to protest the sale of valuable assets.
जीरकपुर में आतंक, सरकार लेती है काउ सेस, झुंड में घूमते हैं गोवंश
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सड़कों, गलियों में बनते हैं हादसों का कारण, नहीं हो रही सुनवाई

जीरकपुर। शहर में जगह-जगह पर संरक्षित गोवंश की भरमार है। इनको शहर की विभिन्न सड़कों, गालियों में झुंड बनाकर घूमते या बैठे देखे जा सकता है। घूमते यह पशु जगह-जगह पर गंदगी फैलाते हैं। कई बार जब यह पशु आपस में भिड़ जाते हैं तो मौके पर मौजूद वाहनों को भी भारी नुकसान पहुंचाते हैं। कई बार पास से गुजरने वाले बुजुर्ग चोटिल हो जाते हैं। गलियों से गुजरने वाले लोग कई बार इन पशुओं के झुंड को देखकर अपना रास्ता बदल लेते हैं। यह मवेशी वहां से आने जाने वाले दोपहिया वाहन चालकों और गाड़ियों के राह में रुकावट पैदा करते हैं। जीरकपुर के फ्लाईओवर के नीचे अक्सर ही पशु झुंड बनाकर खड़े देखे जा सकते हैं। इससे वाहन चालकों को परेशानी होती है।



संरक्षित पशुओं का करें समाधान
गायक राजवीर जवंदा का बुधवार को निधन हो गया था। उसका करीब 10 दिन पहले संरक्षित पशुओं के कारण ही एक्सीडेंट हो गया था। राजवीर जवंदा की मृत्यु के बाद लोगों में सरकार के प्रति आक्रोश फैल गया है। लोगों की मांग है कि इन संरक्षित पशुओं का स्थाई समाधान किया जाए।
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सरकार समस्या का समाधान करे

करोड़ों रुपये का गोसेस वसूलने के बावजूद भी सरकार संरक्षित पशुओं की समस्या का समाधान नहीं कर सकी है। सरकार को या तो गो सेस वसूलना बंद कर देना चाहिए अथवा इन संरक्षित पशुओं को पूरी तरह से सड़कों से हटा देना चाहिए। -नवतेज नवी, पार्षद।
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कई हादसे हो चुके हैं
जीरकपुर में संरक्षित पशुओं के कारण कई हादसे हो चुके हैं। एक सांड़ के हमले से गांव गाजीपुर में भी एक बुजुर्ग की मृत्यु हो चुकी है। ढकोली क्षेत्र में स्थित एमएस एनक्लेव में पशुओं की टक्कर मारने से एक मां और बेटी गंभीर रूप से घायल हो गई थी। सरकार ने संरक्षित पशुओं का समाधान नहीं किया तो पता नहीं कितने युवाओं को अपनी जान देनी पड़ेगी। - तेजिंदर सिंह तेजी सिद्धू, पार्षद।

घायल का खर्च सरकार अदा करे

सरकार संरक्षित पशुओं के नाम पर लोगों से गो सेस वसूल रही है। संरक्षित पशुओं की समस्या स्थाई तौर पर हल होना चाहिए। राजवीर जवंदा की तरह अगर किसी भी व्यक्ति का संरक्षित पशुओं के कारण एक्सीडेंट होता है तो उसके इलाज का सारा खर्चा सरकार को अदा करना चाहिए और अगर ऐसे किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो उसके परिवार को एक करोड़ रुपये की सहायता मिलनी चाहिए। - अवतार सिंह सैनी, लोहगढ़।




हम संरक्षित पशुओं को पड़कर गोशाला पहुंचा रहे हैं। जीरकपुर में नगर परिषद दफ्तर के पास स्थित गोशाला में पशुओं को संभालने के लिए 50 रुपए प्रतिदिन प्रति पशु के हिसाब से करीब तीन लाख रुपये प्रति महीना गोशाला संचालकों को अदा करते हैं। इसके अलावा हम यहां से मवेशियों को पकड़ कर लालड़ू स्थित गोशाला भी भेजते हैं, इसके संचालन के लिए 61 रुपये प्रति पशु प्रतिदिन के हिसाब से अपना 60% हिस्सा लालड़ू की गोशाला को अदा करते हैं। -रंजीत कुमार, सेनेटरी इंस्पेक्टर, नगर परिषद जीरकपुर
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