मोहाली पुलिस बदहाल: दावे दुबई और सिंगापुर बसाने के, थाने और चौकियां चल रही किराए की इमारतों में
पंजाब के मुख्यमंत्री के सरकारी आवास से करीब तीन किलोमीटर दूरी पर स्थित नयागांव पुलिस थाना बदहाल स्थिति में है। यहां पर पुलिस मुलाजिमों के लिए क्वार्टर तो दूर की बात है, आराम करने के लिए भी कोई उचित प्रबंध नहीं है।
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भले ही मोहाली जिले को सिंगापुर और दुबई की तर्ज पर बसाने के दावे किए जाते हैं लेकिन जिला बनने के 17 साल बीत जाने के बाद भी कई इलाकों में थानों और चौकियों को अपनी इमारत तब नसीब नहीं हो पाई है। किराए की इमारतों या सामुदायिक क्रेंदों में बैठकर पुलिस लोगों की सेवा कर रही है। जबकि कई जो नए बसे एरिया हैं, वहां पर तो अभी तक थाने और चौकी तक नहीं बन पाई है। यह हालात मुख्यमंत्री आवास के नजदीक नयागांव से लेकर जीरकपुर तक में है।
2006 में नयागांव को नगर काउंसिल का दर्जा मिलने के साथ-साथ पुलिस चौकी भी मिली। इसके बाद इस पुलिस चौकी को 2010 में पुलिस थाने में तब्दील कर दिया गया। तब से लेकर अब तक इलाके की आबादी करीब 50 हजार से बढ़कर करीब डेढ़ लाख हो गई है। इलाके में कई पूर्व मंत्री से लेकर विधायक और पुलिस के आला अधिकारियों ने अपने मकान बना लिए हैं। लेकिन थाने को अपनी जगह अभी तक नहीं मिल पाई है। नयागांव का थाना 2010 से अब तक उसी किराए की इमारत में चल रहा है। इसका करीब 9000 रुपये महीने किराया जाता है।
पंजाब के मुख्यमंत्री के सरकारी आवास से करीब तीन किलोमीटर दूरी पर स्थित नयागांव पुलिस थाना बदहाल स्थिति में है। यहां पर पुलिस मुलाजिमों के लिए क्वार्टर तो दूर की बात है, आराम करने के लिए भी कोई उचित प्रबंध नहीं है। थाने में अपनी शिकायत लेकर आने वाले लोगों के लिए कोई प्रतीक्षालय भी नहीं बना हुआ है। जांच अधिकारियों के लिए बने हुए कमरों में बारिश का पानी टपकता रहता है। 2006 से लेकर 2022 तक इलाके की जनसंख्या करीब तीन गुना बढ़ चुकी है। लेकिन पुलिस थाने का हाल जस का तस है। पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ से नजदीक होने के कारण इलाके में प्रदेश के पूर्व मंत्री सिकंदर सिंह मलूका, खरड़ विधानसभा के मौजूदा विधायक कंवर संधू और पंजाब पुलिस के पूर्व डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय कई एआईजी और एसएसपी रैंक के आला अधिकारियों का निवास स्थान भी नयागांव थाने के तहत बना हुआ है। जबकि पुलिस की ओर से पकड़े जाने वाले एक्सीडेंटल वाहन या चोरी के वाहन एक खाली पड़े प्लॉट में रखे जाते हैं।
बलटाना की पुलिस चौकी को नहीं मिल पाई इमारत
बलटाना की पुलिस चौकी भी साल 2006 से एक सामुदायिक केंद्र में चल रही है। अभी तक इसे अपनी इमारत नहीं मिल पाई है। जब यह चौकी बनाई गई थी उस समय इलाके की आबादी 25 हजार थी, जो अब एक लाख हो गई है। लेकिन यहां पर मात्र 13 मुलाजिम हैं और इन्हीं पर पूरे इलाके का भार है। हालांकि कई बार इस संबंध में पुलिस विभाग को भी पत्र लिखे गए हैं। लेकिन अभी तक इस दिशा में उचित कार्रवाई नहीं हो पाई। इसके अलावा खरड़ में दोनों थाने पुरानी इमारतों में चल रहे हैं। तेज बारिश होने पर उनकी छत टपकती है।
नए इलाके तो बसाए पर पुलिस चौकी नहीं बनाई, लोग परेशान
शहर के नए बसे इलाकों में अभी तक पुलिस चौकी नहीं बन पाई है। इसके अलावा पुलिस की गश्त भी न के बराबर ही होती है। इस चीज का भी शरारती तत्व फायदा उठाते हैं। यह समस्या एरोसिटी से लेकर आई सिटी और न्यू चंडीगढ़ मुल्लांपुर तक आती है। वहां पर पुलिस की गश्त काफी कम है। जबकि उक्त इलाके में आपराधिक वारदातें काफी बढ़ गई हैं। लोग कई बार इस संबंध में अधिकारियों को बता चुके हैं, लेकिन उम्मीद है कि अब नई सरकार के आने के बाद इस दिशा में कार्रवाई होगी।
लोगों की मदद के लिए पुलिस तैयार
जिला पुलिस की ओर से लोगों की सुरक्षा को लेकर सभी प्रबंध किए जा रहे हैं। करीब 2300 मुलाजिम जिले की सुरक्षा में तैनात हैं। कुछ नए थाने बन गए हैं, जबकि कुछ का काम चल रहा है। हमारी कोशिश यहीं है कि हर व्यक्ति को पुलिस की मदद मिले। इसके अलावा पुलिस के वाहन से लेकर अन्य सभी चीजें अति आधुनिक हैं। -हरजीत सिंह, एसएसपी मोहाली।