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Mohali News: कौमी इंसाफ मोर्चे का धरना उठाने के लिए तैनात रही पुलिस, हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला
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मोहाली। पिछले करीब सवा साल से कौमी इंसाफ मोर्चा के धरने के कारण मोहाली-चंडीगढ़ सीमा पर वाईपीएस चौक का रास्ता बंद है। यहां पर कौमी इंसाफ मोर्चा की ओर से बंदी सिखों की रिहाई के लिए धरना लगाया हुआ है। हालांकि यहां पर पहले दोनों तरफ की रोड बंद की हुई थी, लेकिन सात महीने पहले हाईकोर्ट के आदेश पर पुलिस ने एक तरफ रास्ता खुलवा दिया था। जबकि वाईपीएस से चंडीगढ़ को जाने वाले मार्ग पर एक तरफ की रोड अब भी बंद है। वीरवार को इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को फटकार लगाई थी और पंजाब सरकार से यह धरना न उठाए जाने पर सवाल किए थे। हाईकोर्ट ने फैसले के लिए 18 अप्रैल की तारीख निश्चित की थी। हालांकि वीरवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस पर फैसला सुरक्षित रख लिया है लेकिन मोहाली पुलिस की ओर से वाईपीएस चौक पर धरना उठाने के लिए पूरी तैयारियां कर ली गई थी। पुलिस फोर्स को पहले ही यहां तैनात कर दिया गया था। शाम तक हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार किया जा रहा था। डीएसपी हरसिमरन बल व उनकी पुलिस फोर्स मौके पर तैनात थी। पुलिस के आलाधिकारियों का कहना था कि जब तक कोई फैसला नहीं आता तब तक उनकी तरफ से कोई कदम नहीं उठाया जाएगा।
7 जनवरी 2023 से वाईपीएस चौक पर धरना चल रहा है। अन्य बातों के अलावा प्रदर्शनकारी पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड के दोषी बलवंत सिंह राजोआना, जगतार सिंह हवारा सहित सिख कैदियों की रिहाई की मांग कर रहे थे। वे 1993 के दिल्ली बम विस्फोट के दोषी देविंदरपाल सिंह भुल्लर की रिहाई भी चाहते हैं। चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर कौमी इंसाफ मोर्चा के इस धरने को लेकर हाईकोर्ट में दायर याचिका पर आइ दिन पहले हाईकोर्ट में सुनवाई हुई थी और हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर पिछले सवा साल से कौमी इंसाफ मोर्चा द्वारा धरना दिया जा रहा है। इसे रोकने में पंजाब सरकार पीछे क्यों हट रही है। जबकि हरियाणा में जब राम रहीम और रामपाल के मामले में हरियाणा सरकार ने फोर्स का इस्तेमाल किया था। फिर पंजाब सरकार ऐसा करने से क्यों कतरा रही है। सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 18 अप्रैल तक का समय पंजाब सरकार को दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि अगर इस बीच धरना नहीं हटाया गया तो उसके बाद पंजाब सरकार बेहद सख्त आदेश के लिए तैयार रहे। इस बीच केंद्र सरकार ने कहा कि कानून व्यवस्था राज्य सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन यदि केंद्र से मदद मांगी गई तो आवश्यकता अनुसार कंपनियां उपलब्ध करवा दी जाएंगी।
अराइव सेफ सोसाइटी ने हाईकोर्ट में दी थी याचिका
अराइव सेफ सोसाइटी की ओर से एडवोकेट रवि कमल गुप्ता के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए कौमी इंसाफ मोर्चा के प्रदर्शन को हटाने की मांग की गई थी। इसमें बताया गया था कि प्रदर्शनकारियों ने चंडीगढ़-मोहाली मार्ग को बाधित किया हुआ है, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पिछले साल जनवरी में यह धरना शुरू हुआ था और मार्च में याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की गई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि इतना लंबा समय बीत जाने और इतने मौके देने के बावजूद सरकार कुछ नहीं कर रही है। अब 18 अप्रैल तक की मोहलत दी जा रही है और यदि इस दौरान प्रदर्शनकारियों को नहीं हटाया गया तो हमारे बेहद सख्त आदेश के लिए सरकार तैयार रहे।
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8 फरवरी 2023 को चंडीगढ़ पुलिस से हुई थी झड़प
8 फरवरी, 2023 को कौमी इंसाफ मोर्चा द्वारा बंदी सिखों की रिहाई की मांग को लेकर पंजाब सीएम आवास को घेरने का प्रयास किया गया। इस दौरान मोर्चा प्रदर्शन हिंसक हो गया और हथियारबंद लोगों ने चंडीगढ़ के पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया और तोड़फोड़ की। इससे चंडीगढ़ की कई महिला पुलिसकर्मी और अन्य जवान घायल हो गए थे। पुलिसकर्मियों ने दौड़कर अपनी जान बचाई थी। इसके बावजूद चंडीगढ़ की अफसरशाही ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज या अन्य कार्रवाई के आदेश नहीं दिए थे। पुलिसकर्मियों से मारपीट और तोड़फोड़ करने पर चंडीगढ़ और मोहाली पुलिस ने हिंसक प्रदर्शनकारियों पर केस दर्ज किए थे।
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7 जनवरी 2023 से वाईपीएस चौक पर धरना चल रहा है। अन्य बातों के अलावा प्रदर्शनकारी पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड के दोषी बलवंत सिंह राजोआना, जगतार सिंह हवारा सहित सिख कैदियों की रिहाई की मांग कर रहे थे। वे 1993 के दिल्ली बम विस्फोट के दोषी देविंदरपाल सिंह भुल्लर की रिहाई भी चाहते हैं। चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर कौमी इंसाफ मोर्चा के इस धरने को लेकर हाईकोर्ट में दायर याचिका पर आइ दिन पहले हाईकोर्ट में सुनवाई हुई थी और हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर पिछले सवा साल से कौमी इंसाफ मोर्चा द्वारा धरना दिया जा रहा है। इसे रोकने में पंजाब सरकार पीछे क्यों हट रही है। जबकि हरियाणा में जब राम रहीम और रामपाल के मामले में हरियाणा सरकार ने फोर्स का इस्तेमाल किया था। फिर पंजाब सरकार ऐसा करने से क्यों कतरा रही है। सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 18 अप्रैल तक का समय पंजाब सरकार को दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि अगर इस बीच धरना नहीं हटाया गया तो उसके बाद पंजाब सरकार बेहद सख्त आदेश के लिए तैयार रहे। इस बीच केंद्र सरकार ने कहा कि कानून व्यवस्था राज्य सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन यदि केंद्र से मदद मांगी गई तो आवश्यकता अनुसार कंपनियां उपलब्ध करवा दी जाएंगी।
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अराइव सेफ सोसाइटी ने हाईकोर्ट में दी थी याचिका
अराइव सेफ सोसाइटी की ओर से एडवोकेट रवि कमल गुप्ता के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए कौमी इंसाफ मोर्चा के प्रदर्शन को हटाने की मांग की गई थी। इसमें बताया गया था कि प्रदर्शनकारियों ने चंडीगढ़-मोहाली मार्ग को बाधित किया हुआ है, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पिछले साल जनवरी में यह धरना शुरू हुआ था और मार्च में याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की गई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि इतना लंबा समय बीत जाने और इतने मौके देने के बावजूद सरकार कुछ नहीं कर रही है। अब 18 अप्रैल तक की मोहलत दी जा रही है और यदि इस दौरान प्रदर्शनकारियों को नहीं हटाया गया तो हमारे बेहद सख्त आदेश के लिए सरकार तैयार रहे।
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8 फरवरी 2023 को चंडीगढ़ पुलिस से हुई थी झड़प
8 फरवरी, 2023 को कौमी इंसाफ मोर्चा द्वारा बंदी सिखों की रिहाई की मांग को लेकर पंजाब सीएम आवास को घेरने का प्रयास किया गया। इस दौरान मोर्चा प्रदर्शन हिंसक हो गया और हथियारबंद लोगों ने चंडीगढ़ के पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया और तोड़फोड़ की। इससे चंडीगढ़ की कई महिला पुलिसकर्मी और अन्य जवान घायल हो गए थे। पुलिसकर्मियों ने दौड़कर अपनी जान बचाई थी। इसके बावजूद चंडीगढ़ की अफसरशाही ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज या अन्य कार्रवाई के आदेश नहीं दिए थे। पुलिसकर्मियों से मारपीट और तोड़फोड़ करने पर चंडीगढ़ और मोहाली पुलिस ने हिंसक प्रदर्शनकारियों पर केस दर्ज किए थे।