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Mohali News: फेज-8बी डंपिंग ग्राउंड की बदलेगी तस्वीर, पुराने कचरे के ढेर से बनेगा ग्रीन जोन
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मोहाली। शहर के इंडस्ट्रियल एरिया फेज-8बी के डंपिंग ग्राउंड को अब नए रूप में विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। नगर निगम की तरफ से एनवायरमेंटल रेस्टोरेशन एंड लैंड रिक्लेमेशन परियोजना के तहत वर्षों पुराने कचरे के ढेर को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस कर इलाके के पर्यावरण को सुधारने और जमीन को दोबारा उपयोग योग्य बनाने की योजना तैयार की गई है। इस परियोजना पर करीब 94.63 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। नगर निगम के अनुसार इस परियोजना को तीन माह के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के तहत डंप साइट पर वर्षों से जमा लिगेसी वेस्ट यानी पुराने ठोस कचरे की प्रोसेसिंग की जाएगी।
यह पूरा कार्य सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2016 के अनुसार किया जाएगा। कचरे की प्रोसेसिंग के बाद भूमि को दोबारा विकसित कर सार्वजनिक उपयोग के लिए तैयार किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट की खास बात यह है कि इसमें जियोटेक्सटाइल मेम्ब्रेन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। यह एक विशेष प्रकार की इंजीनियरिंग फैब्रिक होती है, जिसका उपयोग मिट्टी को मजबूत करने, जमीन के कटाव को रोकने और पर्यावरण संरक्षण के लिए किया जाता है। अधिकारियों का कहना है कि इस तकनीक से डंपिंग ग्राउंड को सुरक्षित और स्थायी रूप से विकसित किया जा सकेगा। लंबे समय से डंपिंग ग्राउंड के कारण आसपास के क्षेत्रों के लोग प्रदूषण और बदबू की समस्या से परेशान थे। खासकर बरसात के मौसम में हालात और खराब हो जाते थे। आसपास के औद्योगिक इकाइयों और रिहायशी क्षेत्रों के लोगों ने कई बार प्रशासन से इस समस्या के समाधान की मांग उठाई थी।
डंपिंग ग्राउंड में कूड़े के पहाड़ को खत्म करने के लिए जियोटेक्सटाइल मेम्ब्रेन तकनीक से काम कर इसे दबाकर ग्राउंड की जमीन को सीधा किया जाएगा। उसके बाद यहां पर क्या बनाना है उसे लेकर कार्रवाई शुरू की जाएगी। - नरेश बत्ता, चीफ इंजीनियर, नगर निगम
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यह पूरा कार्य सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2016 के अनुसार किया जाएगा। कचरे की प्रोसेसिंग के बाद भूमि को दोबारा विकसित कर सार्वजनिक उपयोग के लिए तैयार किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट की खास बात यह है कि इसमें जियोटेक्सटाइल मेम्ब्रेन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। यह एक विशेष प्रकार की इंजीनियरिंग फैब्रिक होती है, जिसका उपयोग मिट्टी को मजबूत करने, जमीन के कटाव को रोकने और पर्यावरण संरक्षण के लिए किया जाता है। अधिकारियों का कहना है कि इस तकनीक से डंपिंग ग्राउंड को सुरक्षित और स्थायी रूप से विकसित किया जा सकेगा। लंबे समय से डंपिंग ग्राउंड के कारण आसपास के क्षेत्रों के लोग प्रदूषण और बदबू की समस्या से परेशान थे। खासकर बरसात के मौसम में हालात और खराब हो जाते थे। आसपास के औद्योगिक इकाइयों और रिहायशी क्षेत्रों के लोगों ने कई बार प्रशासन से इस समस्या के समाधान की मांग उठाई थी।
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डंपिंग ग्राउंड में कूड़े के पहाड़ को खत्म करने के लिए जियोटेक्सटाइल मेम्ब्रेन तकनीक से काम कर इसे दबाकर ग्राउंड की जमीन को सीधा किया जाएगा। उसके बाद यहां पर क्या बनाना है उसे लेकर कार्रवाई शुरू की जाएगी। - नरेश बत्ता, चीफ इंजीनियर, नगर निगम
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