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Mohali News: डॉक्टरों की हड़ताल के कारण बिना इलाज लौटे मरीज
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जीरकपुर। डॉक्टरों और पैरा मेडकिल स्टाफ की पंजाब व्यापी हड़ताल का असर जीरकपुर में भी देखने को मिल रहा है। शुक्रवार को ढकोली की डिस्पेंसरी बंद होने के कारण मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ा।
ढकोली के कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर में ताला था और बाहर हड़ताल और स्टाफ की मांगों का पोस्टर लहरा रहा था। आने वाले मरीजों को हैरानी थी कि अब उनका इलाज कैसे होगा। कुछ मरीज ऐसे थे जिनका पहले से इलाज यहां पर चल रहा है, और उन्हें शुक्रवार को आगे के इलाज के लिए बुलाया गया था। लेकिन डिस्पेंसरी के गेट बंद मिलने से उन्हें निराशा का सामना करना पड़ा।
एक बुजुर्ग राजिंदर पुरी को आगे की दवाई के लिए डाक्टर से परामर्श करना था, उन्हें वापस लौटना पड़ा। उन्होंने बताया कि ऐसा पहली बार हुआ है। रिटायर हुए दस साल से अधिक हो चुके हैं। पहले चंडीगढ रहते थे, अब जीरकपुर रह रहे हैं। अब इलाज के लिए कहीं और जाना पड़ेगा। वहीं एक दस साल का बच्चा आंख पर चोट लेकर जब भाई के साथ डिस्पेंसरी पहुंचा तो उसे भी बिना प्राथमिक उपचार के वापस जाना पड़ा। सना अपने माता और बहन के साथ बुखार के चेकअप के लिए आई थी, को बिना दवाई के वापस जाना पड़ा।
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उनके चेहरे पर निराशा और प्राइवेट फीस न भरने की असमर्थता बयान कर रही थी। यहां पर गर्भवती पत्नी को लाए अमन का कहना था कि डॉक्टर से मिलना जरूरी है, आगे की दवाई व चेकअप के लिए कहीं और भी नहीं जा सकते क्योंकि यहां के डॉक्टर को सारा केस पता है। वहीं मेडिकल स्टाफ का कहना था कि इस बंद का असर तब तक रहेगा जब तक मांगें न मान लीं जाएं।
गौरतलब है कि वीरवार तक डिस्पेंसरी की ओपीडी सेवाएं आधे दिन तक चल रहीं थीं, जिससे मरीजों में थोड़ा संतोष था। लेकिन शुक्रवार से यहां ओपीडी सेवाएं पूरी तरह बंद थीं और दवाओं के काउंटर भी बंद थे। बेटी को स्कूल से इलाज करवाने लाई इंदु का कहना था कि सरकार और विभाग राम भरोसे है।
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ढकोली के कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर में ताला था और बाहर हड़ताल और स्टाफ की मांगों का पोस्टर लहरा रहा था। आने वाले मरीजों को हैरानी थी कि अब उनका इलाज कैसे होगा। कुछ मरीज ऐसे थे जिनका पहले से इलाज यहां पर चल रहा है, और उन्हें शुक्रवार को आगे के इलाज के लिए बुलाया गया था। लेकिन डिस्पेंसरी के गेट बंद मिलने से उन्हें निराशा का सामना करना पड़ा।
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एक बुजुर्ग राजिंदर पुरी को आगे की दवाई के लिए डाक्टर से परामर्श करना था, उन्हें वापस लौटना पड़ा। उन्होंने बताया कि ऐसा पहली बार हुआ है। रिटायर हुए दस साल से अधिक हो चुके हैं। पहले चंडीगढ रहते थे, अब जीरकपुर रह रहे हैं। अब इलाज के लिए कहीं और जाना पड़ेगा। वहीं एक दस साल का बच्चा आंख पर चोट लेकर जब भाई के साथ डिस्पेंसरी पहुंचा तो उसे भी बिना प्राथमिक उपचार के वापस जाना पड़ा। सना अपने माता और बहन के साथ बुखार के चेकअप के लिए आई थी, को बिना दवाई के वापस जाना पड़ा।
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उनके चेहरे पर निराशा और प्राइवेट फीस न भरने की असमर्थता बयान कर रही थी। यहां पर गर्भवती पत्नी को लाए अमन का कहना था कि डॉक्टर से मिलना जरूरी है, आगे की दवाई व चेकअप के लिए कहीं और भी नहीं जा सकते क्योंकि यहां के डॉक्टर को सारा केस पता है। वहीं मेडिकल स्टाफ का कहना था कि इस बंद का असर तब तक रहेगा जब तक मांगें न मान लीं जाएं।
गौरतलब है कि वीरवार तक डिस्पेंसरी की ओपीडी सेवाएं आधे दिन तक चल रहीं थीं, जिससे मरीजों में थोड़ा संतोष था। लेकिन शुक्रवार से यहां ओपीडी सेवाएं पूरी तरह बंद थीं और दवाओं के काउंटर भी बंद थे। बेटी को स्कूल से इलाज करवाने लाई इंदु का कहना था कि सरकार और विभाग राम भरोसे है।

डॉ. कप्तान सिंह, सीएमएस।