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नई लैंड पूलिंग नीति का विरोध : किसान एकजुट, नौ सेक्टरों के लिए नहीं देंगे अपनी जमीन

Fri, 20 Jun 2025 01:32 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 20 Jun 2025 01:32 AM IST
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Opposition to the new land pooling policy: Farmers united, will not give their land for nine sectors
मोहाली। नौ नए विकसित किए जा रहे सेक्टरों के लिए नई लैंड पूलिंग नीति के अंतर्गत 6,285 एकड़ भूमि अधिग्रहण का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। सेक्टरों को विकसित करने के लिए अधिगृहीत की जाने वाली गांव कुरड़ी, स्याऊ, पत्तों, बड़ी और मटरां के किसानों ने नई लैंड पूलिंग नीति को अस्वीकार कर दिया है। किसानों ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी कीमत पर अपनी जमीनें नए सेक्टरों को नहीं देंगे। किसानों ने कहा कि नई नीति के तहत तीन कनाल तक भूमि वाले किसानों को कोई भी व्यावसायिक स्थान न देना, एक एकड़ वाले किसानों को एक हजार गज के रिहायशी प्लाट देने की पुरानी व्यवस्था तोड़कर पांच-पांच सौ गज के प्लाट देना, औद्योगिक व संस्थागत क्षेत्रों में किसानों को व्यावसायिक स्थान न देना उनके साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि नई लैंड पूलिंग नीति बनाते समय किसी भी किसान से सलाह नहीं ली गई। अब यह नीति उन पर थोपी जा रही है। वह ऐसा नहीं होने देंगे। उन्होंने मांग की कि पुरानी लैंड पूलिंग नीति को लागू किया जाए।
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घर-घर जाकर चलाएंगे जागरूकता अभियान
किसान प्रितपाल सिंह कुरड़ी, अरविंदर सिंह गिल, छज्जा सिंह, बहादुर सिंह बड़ी, सरपंच कुरड़ी नाहर सिंह, हरविंदर सिंह ढोल, जगरूप सिंह ढोल और आम आदमी घर बचाओ मोर्चा के नेता एडवोकेट दर्शन सिंह धालीवाल और हरमिंदर सिंह मावी ने बताया कि नई नीति किसान विरोधी है। उन्होंने कहा कि पुरानी भूमि पूलिंग नीति से हर किसान को लाभ मिलता था, लेकिन नई नीति केवल कॉरपोरेट और बड़ी रियल एस्टेट कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई है। उन्होंने कहा कि वह नई नीति के खिलाफ घर-घर जाकर जागरूकता अभियान चलाकर किसानों को इस नीति के तहत अपनी जमीनें सरकार को न देने की अपील करेंगे।
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भूमि आवंटन को हाईकोर्ट में देंगे चुनौती
किसानों ने बताया कि जब गमाडा किसानों से जमीन लेता है, तो एक एकड़ में 4840 वर्ग गज जमीन ली जाती है। किसानों को भूखंड आवंटित करते समय 4000 वर्ग गज के आधार पर जगह दी जाती है। किसानों ने कहा कि वे भूमि अधिग्रहण और भूखंड आवंटन के लिए निर्धारित अलग-अलग मानदंडों को भी उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे।
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