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मोहाली में सावन के पहले सोमवार पर हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजे शिवालय, भंडारे भी लगाए

Tue, 27 Jul 2021 01:54 AM IST
Mohali Bureau मोहाली ब्‍यूरो
Updated Tue, 27 Jul 2021 01:54 AM IST
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On the first Monday of Sawan in Mohali, the pagoda echoed with the cheers of Har Har Mahadev, also organized Bhandaras.
मोहाली। सावन महीने के पहले सोमवार को शहर के शिवालयों में हर-हर महादेव की गूंज सुनाई दी। अल सुबह से ही श्रद्धालु कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए मंदिरों में पहुंचना शुरू हो गए थे। वीआईपी सिटी के मंदिरों में दिनभर भक्तों को तांता लगा रहा। मंदिरों में विशेष रुद्राभिषेक और पूजन का आयोजन किया गया। शाम के समय भगवान शिव का श्रृंगार हुआ और भक्तों ने संकीर्तन कर भोले नाथ की आराधना की।
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26 जुलाई को कार्तिक मान्यता वालों के लिए पहला सोमवार था, जबकि संक्रांति मान्यता वालों के लिए यह दूसरा सोमवार था। संक्रांति से सावन की शुरूआत मानने वालों के लिए मास में 5 सोमवार हैं, जबकि कार्तिक से मास से शुरूआत मानने वालों के लिए 4 सोमवार होंगे। सोमवार को मंदिरों में शिवलिंगों का दूध और जल से अभिषेक किया गया। शिवलिंगों को पुष्प, बेल पत्र, आंक, धतूरे से सजाकर महाआरती की गई। इस दौरान मंदिरों में घंटी, घड़ियाल, शंख व झालर के बीच भोलेनाथ के उद्घोष से माहौल भक्तिमय बना रहा। भक्तों ने व्रत रख भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी आराधना की।
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शहर के फेज 3बी1 के श्री वैष्णो माता मंदिर, फेज 3बी2 के श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर, फेज 5 के श्री हरि मंदिर, फेज 1 के शिव मंदिर, फेज 7 के श्री सनातन धर्म मंदिर, सोहाना के शिव मंदिर, सेक्टर-68 के श्री दुर्गा माता मंदिर सहित शहर के अन्य शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। श्रद्धालुओं ने पंडितों की मौजूदगी में शिव महाभिषेक किया। पंडित जगदंबा प्रसाद रतूड़ी, पंडित सुंदर लाल बिजलवान, सर्वेश्वर गौढ़, योगेश कंसवाल, शिवानंद जोशी और आचार्य विरेंद्र शास्त्री ने बताया कि मंदिरों में महामृत्युंजय के जाप शुरू हुए और रुद्राभिषेक किया गया। वहीं सावन मास में एक महीने तक प्रत्येक शिव मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का दौर चलेगा। सोमवार को श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर सहित शहर के अन्य मंदिरों में भी भक्तों के लिए भंडारे का आयोजन किया गया।
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अभिषेक का है महत्व
सावन में शिव अभिषेक का विशेष महत्व है। पंडितों के अनुसार पार्थिव शिवलिंग के पूजन से शिवजी का आशीर्वाद मिलता है। समुद्र मंथन में निकले विष का पान करने के बाद जलन को शांत करने शिवजी का जलाभिषेक किया गया था। यह विधि अपनाई जाती है। इसके साथ ही आक और बिल्वपत्र चढ़ाने से अनिष्ट ग्रह की दशा भी शांत होती है। दूध में काले तिल से अभिषेक करने से चंद्र संबंधित कष्ट दूर होते हैं।
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