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चुनाव ड्यूटी रद्द करवाने के लिए अधिकारी, मुलाजिम लगा रहे सिफारिशें
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मोहाली। निकाय चुनाव को बढ़िया तरीके से संपन्न करवाने के लिए प्रशासन पूरी तरह से सख्त हो गया है। जिला निर्वाचन अधिकारी गिरीश दियालन ने इस मामले को लेकर अधिकारियों से बैठक की है। बैठक में सामने आया कि चुनाव ड्यूटी रद्द करवाने के लिए अधिकारी और मुलाजिम सिफारिशें लगा रहे हैं।
डीसी गिरीश दियालन ने कहा कि चुनाव में यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी जानबूूझकर गैर हाजिर रहता है या ड्यूटी में कोहाती करता है तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। जानकारी के मुताबिक बैठक के दौरान सभी रिटर्निंग अफसरों ने बताया कि ड्यूटी पर तैनात कुछ स्टाफ बहाने बनाकर चुनाव ड्यूटी से बचने की कोशिश कर रहा है। इतना ही नहीं कई मामलों में तो ड्यूटी रद्द करवाने के लिए सिफारिशें लगवाकर दबाव बनाने की भी कोशिश की जा रही है।
जिला निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि ड्यूटी रद्द करवाने के लिए बाहरी दबाव बनाने की कोशिश को चुनाव प्रक्रिया में रुकावट माना जाएगा। साथ ही ऐसे मामलों में सख्ती से निपटा जाएगा। ड्यूटी से गैर हाजिर होने की स्थिति में प्रशासन की तरफ से अधिकारी व कर्मचारी के खिलाफ संबधित विभाग के सचिव के पास विभागीय कार्रवाई के लिए सिफारिश की जाएगी। इसके अलावा निर्वाचन आयोग को उचित धाराओं के तहत कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा। जिक्रयोग है कि मोहाली जिले को वीआईपी जिला कहा जाता है। यहां पर अधिकतर राज्य सरकार के अधिकारियों व मंत्रियों के रिश्तेदार ही सरकारी सेवाओं में हैं। ऐसे में इस तरह के केस सामने आते रहते हैं। गत विधानसभा चुनाव के समय भी ऐसे हालात बने थे, लेकिन तत्कालीन डीसी ने किसी की भी चुनाव ड्यूटी खारिज नहीं की थी।
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डीसी गिरीश दियालन ने कहा कि चुनाव में यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी जानबूूझकर गैर हाजिर रहता है या ड्यूटी में कोहाती करता है तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। जानकारी के मुताबिक बैठक के दौरान सभी रिटर्निंग अफसरों ने बताया कि ड्यूटी पर तैनात कुछ स्टाफ बहाने बनाकर चुनाव ड्यूटी से बचने की कोशिश कर रहा है। इतना ही नहीं कई मामलों में तो ड्यूटी रद्द करवाने के लिए सिफारिशें लगवाकर दबाव बनाने की भी कोशिश की जा रही है।
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जिला निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि ड्यूटी रद्द करवाने के लिए बाहरी दबाव बनाने की कोशिश को चुनाव प्रक्रिया में रुकावट माना जाएगा। साथ ही ऐसे मामलों में सख्ती से निपटा जाएगा। ड्यूटी से गैर हाजिर होने की स्थिति में प्रशासन की तरफ से अधिकारी व कर्मचारी के खिलाफ संबधित विभाग के सचिव के पास विभागीय कार्रवाई के लिए सिफारिश की जाएगी। इसके अलावा निर्वाचन आयोग को उचित धाराओं के तहत कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा। जिक्रयोग है कि मोहाली जिले को वीआईपी जिला कहा जाता है। यहां पर अधिकतर राज्य सरकार के अधिकारियों व मंत्रियों के रिश्तेदार ही सरकारी सेवाओं में हैं। ऐसे में इस तरह के केस सामने आते रहते हैं। गत विधानसभा चुनाव के समय भी ऐसे हालात बने थे, लेकिन तत्कालीन डीसी ने किसी की भी चुनाव ड्यूटी खारिज नहीं की थी।
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