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अब रिसर्च पकड़ेगी रफ्तार, नाबी को मिलेंगे चालीस वैज्ञानिक
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मोहाली। किसानों की लागत कम करके उनकी आमदन को बढ़ाने के लिए कृषि क्षेत्र में जल्द ही बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। इसके लिए नेशनल एग्रो-बॉयोटेक्नोलाजी इंस्टीट्यूट (नाबी) में अभी तक जहां गेहूं, सेब और केले पर शोध किया गया है। इसके बाद अब कृषि क्षेत्र में नए-नए प्रयोग के लिए वैज्ञानिकों की भर्ती करने जा रहा है जिसकी मदद से कृषि के क्षेत्र में किसानों को पारंपरिक खेती से छुटकारा दिलाकर नई-नई तकनीक से खेती करने के तरीके सिखाए जाएंगे।
इसके लिए विभाग को मंजूरी मिलने के बाद वैज्ञानिकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आने वाले कुछ महीनों में वैज्ञानिकों की भर्ती प्रक्रिया संपन्न होने के बाद बड़े बदलाव को लेकर काम शुरू किया जाएगा। यह बात नेशनल एग्री-बायोटेक्नोलाजी इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर अश्वनी पारिक ने कही। उनका कहना है कि कुछ समय पहले ही उन्हें नई इमारत मिली थी और अब नए वैज्ञानिक मिलने जा रहे हैं। इसके बाद किसानों को साथ लेकर कृषि क्षेत्र में नए-नए सुधार किए जाएंगे। संवाद
नाबी में काली गेहूं, सेब पर कोटिंग समेत कई चीजों पर हो चुका है शोध
जानकारी के मुताबिक नाबी में इससे पहले वैज्ञानिक मोनिका गर्ग ने काली गेहूं पर शोध किया है। उनके द्वारा तैयार गेहूं की मदद से व्यक्ति के शरीर को सामान्य से ज्यादा मात्रा में प्रोटीन मिलता है और इसके साथ ही शुगर की मात्रा कम पाई जाती है। इसके अलावा वैज्ञानिक कौशिक मजूमदार ने सेब पर लगने वाली मोम की परत की जगह एक वैक्स तैयार की है। इस वैक्स का इस्तेमाल पेड़ों से उतरने वाले सेबों पर कर सकेंगे, जिसे लगाने बाद सेब का स्वाद कई दिन तक बरकरार रहेगा। वहीं एक अन्य वैज्ञानिक ने केले पर शोध करके विटामिन-ए की मात्रा बढ़ाने पर शोध किया है। केले में विटामिन-ए की मात्रा बढ़ने के बाद आंखों की रोशनी बढ़ाने में मददगार साबित होगा।
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संस्थान को सुपर कंप्यूटर भी मिला, छह महीने एडवांस हुआ शोध
जानकारी के अनुसार करीब 20 करोड़ रुपये की लागत से मिली 650 टेराफ्लॉप्स सुपर कंप्यूटिंग सुविधा से कृषि और पोषण जैव प्रौद्योगिकी से संबंधित संस्थान में किए जा रहे अंत: विषय अत्याधुनिक अनुसंधान की जरूरतों को पूरा करने में काफी मदद मिलने लगी है। यह चंडीगढ़ समेत उत्तरी भारत का इकलौता कंप्यूटर है और यह सुपर कंप्यूटर सुविधा एनएबीआई और सीआईएबी के वैज्ञानिकों के लिए उपलब्ध होगी। साथ ही पड़ोसी संस्थानों/विश्वविद्यालयों में कार्यरत वैज्ञानिकों/संकाय के लिए और एनएसएम के तहत स्वीकृत कुछ परियोजनाओं के लिए सहयोगात्मक कार्य के लिए खुली रहेगी। यह उच्च स्तरीय सुविधा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख्याति के विभिन्न संस्थानों और विश्वविद्यालयों में किए जा रहे बड़े पैमाने पर जीनोमिक्स, कार्यात्मक जीनोमिक्स, संरचनात्मक जीनोमिक्स और जनसंख्या अध्ययन से प्राप्त होने वाले बिग डेटा के विश्लेषण के लिए एक वरदान साबित होगी।
क्या कहते हैं अधिकारी
केंद्र में वैज्ञानिकों की भर्ती को लेकर विभाग के पास आवेदन दिया हुआ था। इसे मंजूरी मिलने के बाद अब 1 हजार से अधिक लोगों ने आवेदन किया है। इनमें से 40 को शार्टलिस्ट करके तैनात किया जाएगा जिसके बाद कृषि क्षेत्र में सुधारों में तेजी लाई जाएगी।
-अश्वनी पारिक, डायरेक्टर, नेशनल एग्रो-बायोटेक्नोलॉजी इंस्टीच्यूट, मोहाली।
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इसके लिए विभाग को मंजूरी मिलने के बाद वैज्ञानिकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आने वाले कुछ महीनों में वैज्ञानिकों की भर्ती प्रक्रिया संपन्न होने के बाद बड़े बदलाव को लेकर काम शुरू किया जाएगा। यह बात नेशनल एग्री-बायोटेक्नोलाजी इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर अश्वनी पारिक ने कही। उनका कहना है कि कुछ समय पहले ही उन्हें नई इमारत मिली थी और अब नए वैज्ञानिक मिलने जा रहे हैं। इसके बाद किसानों को साथ लेकर कृषि क्षेत्र में नए-नए सुधार किए जाएंगे। संवाद
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नाबी में काली गेहूं, सेब पर कोटिंग समेत कई चीजों पर हो चुका है शोध
जानकारी के मुताबिक नाबी में इससे पहले वैज्ञानिक मोनिका गर्ग ने काली गेहूं पर शोध किया है। उनके द्वारा तैयार गेहूं की मदद से व्यक्ति के शरीर को सामान्य से ज्यादा मात्रा में प्रोटीन मिलता है और इसके साथ ही शुगर की मात्रा कम पाई जाती है। इसके अलावा वैज्ञानिक कौशिक मजूमदार ने सेब पर लगने वाली मोम की परत की जगह एक वैक्स तैयार की है। इस वैक्स का इस्तेमाल पेड़ों से उतरने वाले सेबों पर कर सकेंगे, जिसे लगाने बाद सेब का स्वाद कई दिन तक बरकरार रहेगा। वहीं एक अन्य वैज्ञानिक ने केले पर शोध करके विटामिन-ए की मात्रा बढ़ाने पर शोध किया है। केले में विटामिन-ए की मात्रा बढ़ने के बाद आंखों की रोशनी बढ़ाने में मददगार साबित होगा।
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संस्थान को सुपर कंप्यूटर भी मिला, छह महीने एडवांस हुआ शोध
जानकारी के अनुसार करीब 20 करोड़ रुपये की लागत से मिली 650 टेराफ्लॉप्स सुपर कंप्यूटिंग सुविधा से कृषि और पोषण जैव प्रौद्योगिकी से संबंधित संस्थान में किए जा रहे अंत: विषय अत्याधुनिक अनुसंधान की जरूरतों को पूरा करने में काफी मदद मिलने लगी है। यह चंडीगढ़ समेत उत्तरी भारत का इकलौता कंप्यूटर है और यह सुपर कंप्यूटर सुविधा एनएबीआई और सीआईएबी के वैज्ञानिकों के लिए उपलब्ध होगी। साथ ही पड़ोसी संस्थानों/विश्वविद्यालयों में कार्यरत वैज्ञानिकों/संकाय के लिए और एनएसएम के तहत स्वीकृत कुछ परियोजनाओं के लिए सहयोगात्मक कार्य के लिए खुली रहेगी। यह उच्च स्तरीय सुविधा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख्याति के विभिन्न संस्थानों और विश्वविद्यालयों में किए जा रहे बड़े पैमाने पर जीनोमिक्स, कार्यात्मक जीनोमिक्स, संरचनात्मक जीनोमिक्स और जनसंख्या अध्ययन से प्राप्त होने वाले बिग डेटा के विश्लेषण के लिए एक वरदान साबित होगी।
क्या कहते हैं अधिकारी
केंद्र में वैज्ञानिकों की भर्ती को लेकर विभाग के पास आवेदन दिया हुआ था। इसे मंजूरी मिलने के बाद अब 1 हजार से अधिक लोगों ने आवेदन किया है। इनमें से 40 को शार्टलिस्ट करके तैनात किया जाएगा जिसके बाद कृषि क्षेत्र में सुधारों में तेजी लाई जाएगी।
-अश्वनी पारिक, डायरेक्टर, नेशनल एग्रो-बायोटेक्नोलॉजी इंस्टीच्यूट, मोहाली।