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अब विकास पकड़ेगा रफ्तार, गमाडा से निगम को बकाया 13 करोड़ रुपये मिले

Sat, 11 Sep 2021 02:14 AM IST
Mohali Bureau मोहाली ब्‍यूरो
Updated Sat, 11 Sep 2021 02:14 AM IST
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Now development will pick up speed, corporation will get Rs 13 crore due from GMADA
मोहाली। शहर के विकास कार्यों में अब पैसे की दिक्कत नहीं आएगी। सेहत मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू के प्रयास से गमाडा से मिलने वाली बकाया 13 करोड़ रुपये की राशि का चेक नगर निगम को शुक्रवार को मिल गया है। यह सभी पैसे विकास कार्य पर ही खर्च किए जाएंगे। वहीं, अब नगर निगम के पास पैसे की कमी नहीं रही है। अब तक गमाडा की ओर से नगर निगम को 50 करोड़ रुपये सौंपे जा चुके हैं। जबकि नगर निगम के लिए और पैसे का इंतजाम किया जाएगा। सेहत मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने कहा कि उनकी कोशिश है कि मोहाली को दुनिया का एक टॉप शहर बनाना है। इसके लिए ही उनकी तरफ से यह सभी प्रयास किए जा रहे हैं।
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जानकारी के मुताबिक 13 करोड़ रुपये का चेक शुक्रवार को विधायक एवं सेहत मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू की ओर से नगर निगम के मेयर अमरजीत सिंह जीती सिद्धू को सौंपा गया। वहीं, इस मौके पर सेहत मंत्री ने कहा कि जल्द ही नगर निगम को बिलजी विभाग से 5 करोड़ रुपये और पीएसआईसी से 2.50 करोड़ रुपये के चेक लेकर नगर निगम के हवाले किए जाएंगे। जो कि आने वाले समय में नगर निगम के विकास कार्य पर खर्च किए जाएंगे।
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वहीं, दूसरी ओर सेहत मंत्री ने 10 लाख रुपये का चेक अपने कोटे से फेज-5 में स्थित मोहाली आईटीआई को सौंपा है। इससे वहां पर खस्ता हाल चल रहे शौचालय की सूरत को सुधारा जाएगा। साथ ही कुछ अन्य काम किए जाएंगे। इस मौके पर सीनियर डिप्टी मेयर अमरीक सिंह सोमल, डिप्टी मेयर कुलजीत सिंह बेदी, नगर निगम कमिश्नर कमल गर्ग, मंत्री के राजनीतिक सचिव हरकेश चंद शर्मा, पार्षद कमलजीत सिंह बन्नी, सुच्चा सिंह कलौड़ और अन्य मौजूद थे।
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पैसे नहीं मिलने से प्रभावित हुआ था विकास
जानकारी के मुताबिक पिछले लंबे समय से जब राज्य में अकाली-भाजपा सरकार थी। उस समय पूर्व मेयर कुलवंत सिंह ने अकाली दल ज्वाइन करते समय तत्कालीन उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के सामने शर्त रखी थी कि मेंटेनेंस का पूरा काम गमाडा नहीं नगर निगम देखेगा। साथ ही हर साल गमाडा मेंटेेनेंस के लिए नगर निगम को हर साल 50 करोड़ रुपये देगा। लेकिन जब तक सरकार अकाली दल की रही, गमाडा की तरफ से नगर निगम को कोई पैसा नहीं दिया गया। हालांकि सरकार बदल गई। इसी बीच निगम चुनाव से पहले जो विकास कार्यों के प्रस्ताव पास किए गए थे, वह भी रोक दिए गए थे। उस समय कहा गया था कि पैसे नहीं है। इसके बाद सेहत मंत्री ने गमाडा और पावरकॉम से पैसे दिलाने की प्रक्रिया शुरू की थी।

चंडीगढ़ प्रशासन की तर्ज पर की जाती है प्लानिंग
जानकारी के मुताबिक नगर निगम के अधीन शहर के 50 वार्ड हैं। इनमें पूरा शहरी इलाका और 6 गांव आते हैं। इन सभी की संभालने का जिम्मा नगर निगम की ओर से उठाया जाता है। वहीं, अब नगर निगम चंडीगढ़ की तर्ज पर अपना सालाना बजट और योजनाएं बनाता है। इसमें गमाडा की ओर से आने वाले पैसे की प्लानिंग शामिल होती है, लेकिन पैसे नहीं होने के कारण इस काम में दिक्कत आ रही थी।
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