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Mohali News: स्मार्ट सिटी में नहीं सिटी बस, जाम में फंसने को मजबूर लोग

Thu, 18 Sep 2025 11:43 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 18 Sep 2025 11:43 PM IST
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No city bus service in the Smart City, forcing people to face traffic jams
मोहाली। पंजाब सरकार और स्थानीय प्रशासन जिस मोहाली को स्मार्ट सिटी बनाने के दावे कर रहे हैं, उसकी जमीनी हकीकत यह है कि शहर के तेजी से विकसित हो रहे इलाके आज भी सार्वजनिक बस सेवा जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं। एरोसिटी, आईटी सिटी और न्यू चंडीगढ़ जैसे इलाकों में रहने वाले हजारों लोगों के लिए स्मार्ट सिटी का मतलब निजी वाहनों पर खर्च कर ट्रैफिक जाम में फंसना है। स्मार्ट सिटी मिशन के दिशा-निर्देश मजबूत सार्वजनिक परिवहन पर जोर देते हैं, लेकिन मोहाली में इसके ठीक उलट है। दो साल से इलेक्ट्रिक बसें और मिनी शटल सेवा शुरू करने की घोषणाएं होती रही हैं, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं हुआ। प्रशासन का कहना है कि गमाड़ा (पंजाब रोडवेज) और नगर निगम के बीच रूट और फंडिंग को लेकर मतभेद है।
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ट्रैफिक और प्रदूषण का बढ़ता संकट
मोहाली में रोजाना लगभग 1.5 लाख निजी वाहन सड़कों पर उतरते हैं। एयरपोर्ट रोड और इंडस्ट्रियल एरिया की तरफ जाने वाले रास्ते रोजाना जाम रहते हैं। निजी वाहनों की बढ़ती संख्या न केवल ईंधन की खपत बढ़ा रही है, बल्कि वायु प्रदूषण के स्तर को भी लगातार ऊंचा कर रही है। एरोसिटी और आसपास के इलाकों के निवासियों को रोजमर्रा की जिंदगी में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऑफिस जाने वाले कामकाजी, कॉलेज जाने वाले छात्र और घरेलू कामों के लिए निकलने वाली महिलाएं सभी सुरक्षित और सस्ती यात्रा के लिए तरस रहे हैं।
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लोग नए इलाकों की बात करते हैं, लेकिन हम जैसे पुराने इलाकों में रहने वालों की हालत भी ठीक नहीं है। ढकोली में बस सेवा है जरूर, लेकिन बसों की संख्या इतनी कम है कि सुबह-शाम एक बस के लिए भीड़ लगी रहती है। कई बार 45-50 मिनट इंतजार करने के बाद भी बस नहीं मिल पाती, और तब भी वह इतनी भरी हुई होती है कि चढ़ना मुश्किल होता है। स्मार्ट सिटी का पहला कदम तो यह हो कि मौजूदा सेवा को ठीक किया जाए, उसके बाद ही नए इलाकों की सोचें। -राजीव, निवासी ढकोली
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एरोसिटी को स्मार्ट सिटी का फेज बताया जाता है, लेकिन यहां रहने वाली महिलाओं के लिए यह बहुत ही असुविधाजनक जगह है। आईटी पार्क में काम करती हूं। रोज ऑटो या कैब का खर्च महीने में हजारों रुपये बैठता है। यह एक बड़ा आर्थिक बोझ है। देर रात ऑफिस से लौटने पर सुरक्षा को लेकर भी चिंता रहती है। अगर नियमित और सुरक्षित बस सेवा होती, तो न सिर्फ पैसे बचते, बल्कि आने-जाने का तनाव भी खत्म होता। स्मार्ट सिटी तब बनेगी जब यहां की महिलाएं और युवती सुरक्षित और आत्मनिर्भर महसूस करेंगे। -प्रियंका राजपूत, निवासी एरोसिटी



हमारा गांव (बलौंगी) अब धीरे-धीरे शहर की सीमा में आ गया है, लेकिन सुविधाएं अब भी दूर हैं। यहां के युवाओं को पढ़ने-काम करने के लिए मोहाली और चंडीगढ़ जाना पड़ता है। बिना बस सुविधा के हर दिन का सफर बहुत महंगा पड़ता है। निजी वाहन खरीदना हर किसी के बस की बात नहीं। ऐसे में एक किफायती बस सेवा हमारे जैसे लोगों के लिए जीवनरेखा की तरह होगी। यह हमें शहर की मुख्यधारा से जोड़ेगी और रोजगार के अवसर पैदा करेगी। सरकार को सिर्फ शहर के अंदरूनी इलाकों को ही नहीं, बल्कि आसपास के गांवों को शहर से जोड़ने वाली बस सेवा पर भी ध्यान देना चाहिए। - बीरबल, निवासी गांव बलौंगी
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