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नेशनल हाईवे-5 पर आसान नहीं रात का सफर, अंधेरे में रहता है हादसों का डर

Mon, 30 Aug 2021 02:32 AM IST
Mohali Bureau मोहाली ब्‍यूरो
Updated Mon, 30 Aug 2021 02:32 AM IST
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Night journey is not easy on National Highway-5, fear of accidents remains in the dark
मोहाली। नेशनल हाईवे-5 पर सफर आसान नहीं है। चंडीगढ़ जाना है तो संभल कर चलें, राह मुश्किलों भरी है। यहां न तो स्ट्रीट लाइट्स ही ठीक से काम करती हैं, पुलिस का अता-पता नहीं है, रही सही कसर मनमर्जी से बने कट और लावारिस पशु पूरी कर देते हैं। कहने को तो यह ग्रीन हाईवे है, लेकिन इस ग्रीन हाईवे के फ्लाइओवर के नीचे जबरदस्ती के बाजार सज चुके हैं। दो साल की देरी से पूरा हुआ यह ड्रीम प्रोजेक्ट अब भी लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। सुबह-शाम के ट्रैफिक जाम से अब भी लोगों को निजात नहीं मिल पाई है।
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रोजाना 45 से 50 हजार वाहन नेशनल हाईवे-5 से चंडीगढ़ तक पहुंचते हैं। लेकिन यह सफर आसान नहीं है। बलौंगी से खानपुर तक का करीब 10 किमी का सफर बरसों से लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। पहले हाईवे के निर्माण के चलते लोगों को समस्या का सामना करना पड़ा। अब हाईवे तो बन गया, लेकिन समस्याएं खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहीं। बलौंगी से खानपुर तक इस हाईवे पर न तो रात 9 बजे के बाद पुलिस मुलाजिम नजर आते हैं और न ही यहां पर लाइट्स जलती हैं। इस कारण यह सुनसान रात के अंधेरे में डूबा हाईवे लूट की वारदात करने वालों को रास आने लगा है। पिछले समय में यहां लूट की कई वारदात हो चुकी हैं। इसके बावजूद पुलिस की नींद नहीं टूट रही। जिला पुलिस भले ही खरड़ क्षेत्र में बड़े-बड़े मामले सुलझाने का दावा करे, लेकिन अपने इलाके के हाईवे पर लोगों के सफर को सुरक्षित नहीं कर पा रही।
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वहीं, स्ट्रीट लाइट एक बड़ी समस्या बनी हुई है। हालांकि इस हाईवे पर स्ट्रीट लाइट लगाई तो गई हैं, लेकिन उनमें से आधी ही काम करती हैं। आधी स्ट्रीट लाइट जलती ही नहीं। यह समस्या उस समय ज्यादा विकट रूप धारण कर लेती है, जब हाईवे के साथ लगते रिहायशी इलाकों और बाजारों में एंट्री के लिए बने अवैध कटों से कोई वाहन अचानक सामने आ जाता है। इससे बड़े हादसे भी हो सकते हैं और इस कारण यहां कई हादसे हो भी चुके हैं। इसके बावजूद न तो प्रशासन ही इस ओर ध्यान दे रहा है और न ही नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ही इस ओर ध्यान दे रही है।
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बता दें कि इस बहुप्रतिष्ठित हाईवे के निर्माण की समय सीमा को पांच बार बढ़ाया गया था। इसे ग्रीन हाईवे के तौर पर विकसित करने के दावे भी किए गए। लेकिन इस तथाकथित ग्रीन हाईवे के फ्लाईओवर के नीचे अवैध बाजार अपना कब्जा जमा चुके हैं। इस कारण फ्लाईओवर के नीचे आए दिन यातायात जाम के हालात बने रहते हैं।
नेशनल हाईवे-5 मोहाली ही नहीं बल्कि पंजाब, हिमाचल और हरियाणा के लोगों के लिए चंडीगढ़ तक पहुंचने में लाइफलाइन का काम करता है। खरड़, बलौंगी, कुराली में रह रहने वाले अधिकांश लोग चंडीगढ़ में काम करते हैं। रोजाना इन लोगों को आवाजाही के लिए इसी हाईवे पर सफर करना होता है। इन्हें उम्मीद थी कि हाईवे बनने के बाद उनकी समस्याएं खत्म हो जाएंगी, लेकिन हाईवे बनने के बाद भी समस्याएं ज्यों की त्यों बनी हुई हैं। न तो यातायात जाम से निजात मिली है और न ही लावारिस पशुओं से। स्ट्रीट लाइट के न जलने और पुलिस की गैरमौजूदगी के कारण अपराधों को भी बढ़ावा मिला है।
स्ट्रीट लाइट्स हैं पर जलती नहीं
इस नेशनल हाईवे-5 पर देसूमाजरा से मुंडी से खरड़ तक के एक किमी तक रास्ते पर रात के समय अंधेरा पसरा रहता है। जिससे वाहन चालकों को परेशानी होती है। ऐसा नहीं है कि इस इस फ्लाईओवर के ऊपर ओर नीचे से गुजरने वाली सड़क पर स्ट्रीट लाइट नहीं हैं, बल्कि यहां पर स्ट्रीट लाइट्स तो हैं, लेकिन यह जलती नहीं। इसी इलाके में हाईवे के साथ बंगाला बस्ती है और यहां पर स्ट्रीट लाइट्स न होने के कारण कई सड़क हादसे हो चुके हैं।

समस्या दूर करने को उठाएंगे जरूरी कदम
शहर के प्रमुख इलाकों में ट्रैफिक पुलिस की ड्यूटी रहती है। अगर हाईवे पर रात के समय ट्रैफिक पुलिस तैनात नहीं रहती है तो इस मामले की पुलिस की ओर से जांच की जाएगी। वहीं, हाईवे पर सफर करने वाले वाहन चालकों को किसी भी तरह की समस्या न हो, इसके लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे और लोगों की दिक्कतों को जल्द दूर किया जाएगा। - गुरजोत सिंह कलेर, एसपी ट्रैफिक मोहाली।
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