{"_id":"57ae277a4f1c1bee07ee5ec2","slug":"need-based-policy-mohali-nagar-nigam-mohali-dc-mangat-resident-welfare-association-mohali","type":"story","status":"publish","title_hn":"मोहाली में नीड बेस्ड पॉलिसी लटकी अधर में, हजारों लोग परेशान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मोहाली में नीड बेस्ड पॉलिसी लटकी अधर में, हजारों लोग परेशान
ब्यूरो, अमर उजाला/मोहाली
Updated Sat, 13 Aug 2016 01:16 AM IST
विज्ञापन
महागठबंधन की बैठक
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शहर के लोग नीड बेस्ड पॉलिसी को लेकर कई माह से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से इसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। पॉलिसी तैयार होकर डिप्टी सीएम के पास पहुंच गई, लेकिन वहां से उसे मंजूरी नहीं दी जा रही है। यह मामला शुक्रवार को गमाडा निवासी कल्याणकारी महागठबंधन की फेज-4 में हुई आपात मीटिंग में उठा।
महागठबंधन के मेंबरों ने सरकार से मांग की है कि तुरंत पॉलिसी को मंजूरी दी जाए। ताकि मजबूरी में जीवन व्यतीत कर रहे पच्चीस हजार लोगों को इसका फायदा मिल सके। जानकारी के मुताबिक, महागठबंधन की मीटिंग फेज-4 में एनएस कलसी की प्रधानगी में हुई। मीटिंग में विभिन्न रेसिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशनों के नुमाइंदे मौजूद थे।
इस दौरान कलसी ने बताया कि पॉलिसी तीन महीने से पेंडिंग चल रही है। गमाडा की तरफ से पॉलिसी को तैयार किया गया था। इसके बाद मंजूरी के लिए डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल को भेजा गया था, लेकिन वहां से अब तक मंजूरी नहीं मिल पाई है।
विज्ञापन
वहीं, गठबंधन के महासचिव पीएल धमी ने बताया नीड बेस्ड पॉलिसी शहर की जरूरत है। इसे तुरंत प्रभाव से सरकार को लागू करनी चाहिए। मीटिंग में प्रीत सिंह, बलबीर सिंह काहलो, मनजीत सिंह, जीएस गुलाटी, चन्नण सिंह समेत कई सीनियर मेंबर मौजूद थे।
जिक्रयोग है कि गमाडा ने कुछ माह पहले नई नीड बेस्ड पॉलिसी तैयार की थी, लेकिन उसका फायदा कुछ लोगों को ही मिल पा रहा था। इसके बाद लोग संघर्ष की राह पर उतर आए थे। इसके बाद सांसद ने इस मामले में सीएम प्रकाश सिंह बादल से मुलाकात कर पॉलिसी को रिवाइज करने की मांग रखी थी। फिर सीएम के आदेश पर गमाडा ने नए सिरे से पॉलिसी रिवाइज की थी। इस दौरान गमाडा के अधिकारियों व सांसद के बेटे ने विभिन्न इलाकों में जाकर पॉलिसी तैयार की थी।
सांसद के बेटे का हलका बदलने से रुका विकास
जानकारों की माने तो जब सांसद प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा के बेटे इलाके में सक्रिय थे। तब तक इलाके के हर काम को सरकार द्वारा गंभीरता से लिया जा रहा था। सांसद खुद पार्षदों की मीटिंग कर उनकी राय सुनते थे। लेकिन सांसद के बेटे का अकाली दल ने जब से हलका बदला है। तब से वह इस हलके की तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसका खामियाजा इलाके के लोगों को उठाना पड़ रहा है।
विज्ञापन
महागठबंधन के मेंबरों ने सरकार से मांग की है कि तुरंत पॉलिसी को मंजूरी दी जाए। ताकि मजबूरी में जीवन व्यतीत कर रहे पच्चीस हजार लोगों को इसका फायदा मिल सके। जानकारी के मुताबिक, महागठबंधन की मीटिंग फेज-4 में एनएस कलसी की प्रधानगी में हुई। मीटिंग में विभिन्न रेसिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशनों के नुमाइंदे मौजूद थे।
विज्ञापन
इस दौरान कलसी ने बताया कि पॉलिसी तीन महीने से पेंडिंग चल रही है। गमाडा की तरफ से पॉलिसी को तैयार किया गया था। इसके बाद मंजूरी के लिए डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल को भेजा गया था, लेकिन वहां से अब तक मंजूरी नहीं मिल पाई है।
विज्ञापन
वहीं, गठबंधन के महासचिव पीएल धमी ने बताया नीड बेस्ड पॉलिसी शहर की जरूरत है। इसे तुरंत प्रभाव से सरकार को लागू करनी चाहिए। मीटिंग में प्रीत सिंह, बलबीर सिंह काहलो, मनजीत सिंह, जीएस गुलाटी, चन्नण सिंह समेत कई सीनियर मेंबर मौजूद थे।
जिक्रयोग है कि गमाडा ने कुछ माह पहले नई नीड बेस्ड पॉलिसी तैयार की थी, लेकिन उसका फायदा कुछ लोगों को ही मिल पा रहा था। इसके बाद लोग संघर्ष की राह पर उतर आए थे। इसके बाद सांसद ने इस मामले में सीएम प्रकाश सिंह बादल से मुलाकात कर पॉलिसी को रिवाइज करने की मांग रखी थी। फिर सीएम के आदेश पर गमाडा ने नए सिरे से पॉलिसी रिवाइज की थी। इस दौरान गमाडा के अधिकारियों व सांसद के बेटे ने विभिन्न इलाकों में जाकर पॉलिसी तैयार की थी।
सांसद के बेटे का हलका बदलने से रुका विकास
जानकारों की माने तो जब सांसद प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा के बेटे इलाके में सक्रिय थे। तब तक इलाके के हर काम को सरकार द्वारा गंभीरता से लिया जा रहा था। सांसद खुद पार्षदों की मीटिंग कर उनकी राय सुनते थे। लेकिन सांसद के बेटे का अकाली दल ने जब से हलका बदला है। तब से वह इस हलके की तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसका खामियाजा इलाके के लोगों को उठाना पड़ रहा है।