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नगर निगम वार्डबंदी : नक्शा प्रदर्शित न होने पर उम्मीदवार और लोग परेशान
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मोहाली। नगर निगम की प्रस्तावित वार्डबंदी का नक्शा सोमवार को भी जनता के लिए जारी नहीं किया गया, इससे चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों और आम नागरिकों को निराशा का सामना करना पड़ा। वार्डबंदी के प्रस्तावित नक्शे की प्रतीक्षा में पूरा दिन मोहाली निवासी और चुनावी उम्मीदवार नगर निगम कार्यालय के चक्कर लगाते रहे, लेकिन उन्हें कोई जानकारी नहीं मिल सकी।
20 दिसंबर को स्थानीय सरकारी विभाग के चंडीगढ़ कार्यालय में नगर निगम की वार्डबंदी समिति की बैठक में वार्डबंदी को मंजूरी दी गई थी। इसे सोमवार को सुबह जनता के अवलोकन के लिए प्रदर्शित किया जाना था, लेकिन विभिन्न कारणों से नक्शा जारी नहीं किया गया। ऐसा माना जा रहा है कि पहले से तैयार नक्शे में कुछ बदलाव किए जा रहे हैं, इसी वजह से इसे जनता को नहीं दिखाया गया। नगर निगम के अधिकारी इस मामले में कोई स्पष्ट जानकारी देने से बचते रहे। उन्होंने केवल इतना कहा कि जब विभाग से नक्शे की कॉपी मुहैया कराई जाएगी, उसे प्रदर्शित कर दिया जाएगा। इस देरी के कारण चुनावी हलकों में असंतोष बढ़ गया है। उम्मीदवारों का कहना है कि नक्शे के बिना उन्हें अपने वार्ड और मतदाता आधार को समझने में कठिनाई हो रही है, जिससे चुनावी रणनीति बनाने में बाधा आ रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वार्डबंदी में बदलाव और देर से नक्शा जारी करना कुछ राजनीतिक समीकरणों से भी जुड़ा हो सकता है। वहीं आम जनता भी इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रही है, ताकि चुनाव समय पर और निष्पक्ष रूप से संपन्न हो सके।
20 दिसंबर को स्थानीय सरकारी विभाग के चंडीगढ़ कार्यालय में नगर निगम की वार्डबंदी समिति की बैठक में वार्डबंदी को मंजूरी दी गई थी। इसे सोमवार को सुबह जनता के अवलोकन के लिए प्रदर्शित किया जाना था, लेकिन विभिन्न कारणों से नक्शा जारी नहीं किया गया। ऐसा माना जा रहा है कि पहले से तैयार नक्शे में कुछ बदलाव किए जा रहे हैं, इसी वजह से इसे जनता को नहीं दिखाया गया। नगर निगम के अधिकारी इस मामले में कोई स्पष्ट जानकारी देने से बचते रहे। उन्होंने केवल इतना कहा कि जब विभाग से नक्शे की कॉपी मुहैया कराई जाएगी, उसे प्रदर्शित कर दिया जाएगा। इस देरी के कारण चुनावी हलकों में असंतोष बढ़ गया है। उम्मीदवारों का कहना है कि नक्शे के बिना उन्हें अपने वार्ड और मतदाता आधार को समझने में कठिनाई हो रही है, जिससे चुनावी रणनीति बनाने में बाधा आ रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वार्डबंदी में बदलाव और देर से नक्शा जारी करना कुछ राजनीतिक समीकरणों से भी जुड़ा हो सकता है। वहीं आम जनता भी इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रही है, ताकि चुनाव समय पर और निष्पक्ष रूप से संपन्न हो सके।
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