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मोहाली : रेमडेसिविर का गलत इस्तेमाल करने पर मायो अस्पताल को नोटिस जारी, 48 घंटे में मांगा जवाब
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मोहाली। जिला प्रशासन को मायो अस्पताल के खिलाफ शिकायत मिली थी कि यहां पर रेेमडेसिविर इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जा रहा है और इसका रिकॉर्ड भी नहीं रखा जा रहा है।
इस संबंधी डीसी गिरीश दियालन ने कहा कि रेेमडेसिविर को लेकर नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में मायो अस्पताल के खिलाफ नोटिस जारी किया गया है। साथ ही अगले 48 घंटों में जवाब देने का आदेश दिया है।
जानकारी के मुताबिक राज्य सरकार की ओर से कोविड-19 के मरीजों के लिए रेट निर्धारित कर दिए गए हैं। साथ ही उसी हिसाब से अस्पतालों को टीके जारी किए जाते हैं। लेकिन पता चला है कि मायो अस्पताल की ओर से रिकॉर्ड रखे बिना ही रेेमडेसिविर का इस्तेमाल किया जा रहा था। साथ ही टीकों का गलत प्रयोग किया जा रहा था।
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बता दें कि रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर प्रशासन और सेहत विभाग की ओर से गाइडलाइन जारी की गई है। किस मरीज को टीके की कितनी डोज लगी। इसकी जानकारी मरीज के आधार कार्ड और ट्रीटमेंट चार्ट के साथ सिविल सर्जन ऑफिस को भेजी जाती है। रिपोर्ट के साथ मरीज की कोविड टेस्ट की आरटीपीसीआर रिपोर्ट भी जाती है।
सूत्रों के मुताबिक प्रशासन को मिली शिकायत में बताया गया है कि मरीज के नाम पर अस्पताल में इंजेक्शन अलॉट करवा लिए जाते थे। लेकिन मरीज को इंजेक्शन लगाने के बजाय इसे महंगे दामों में बाहर बेचा जा रहा था। दो तीन मरीजों के तिमारदारों को इसका शक हुआ तो मामला प्रबंधन तक पहुंचा।
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इस संबंधी डीसी गिरीश दियालन ने कहा कि रेेमडेसिविर को लेकर नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में मायो अस्पताल के खिलाफ नोटिस जारी किया गया है। साथ ही अगले 48 घंटों में जवाब देने का आदेश दिया है।
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जानकारी के मुताबिक राज्य सरकार की ओर से कोविड-19 के मरीजों के लिए रेट निर्धारित कर दिए गए हैं। साथ ही उसी हिसाब से अस्पतालों को टीके जारी किए जाते हैं। लेकिन पता चला है कि मायो अस्पताल की ओर से रिकॉर्ड रखे बिना ही रेेमडेसिविर का इस्तेमाल किया जा रहा था। साथ ही टीकों का गलत प्रयोग किया जा रहा था।
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बता दें कि रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर प्रशासन और सेहत विभाग की ओर से गाइडलाइन जारी की गई है। किस मरीज को टीके की कितनी डोज लगी। इसकी जानकारी मरीज के आधार कार्ड और ट्रीटमेंट चार्ट के साथ सिविल सर्जन ऑफिस को भेजी जाती है। रिपोर्ट के साथ मरीज की कोविड टेस्ट की आरटीपीसीआर रिपोर्ट भी जाती है।
सूत्रों के मुताबिक प्रशासन को मिली शिकायत में बताया गया है कि मरीज के नाम पर अस्पताल में इंजेक्शन अलॉट करवा लिए जाते थे। लेकिन मरीज को इंजेक्शन लगाने के बजाय इसे महंगे दामों में बाहर बेचा जा रहा था। दो तीन मरीजों के तिमारदारों को इसका शक हुआ तो मामला प्रबंधन तक पहुंचा।